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Sonebhadra News : महिला की मौत पर परिजनों का हंगामा; बेड पर तड़पती रही प्रसूता, मोबाइल में लगी रही स्टाफ नर्स

Sun, 30 Mar 2025 08:10 PM IST
नितीश कुमार पांडेय अमर उजाला नेटवर्क, सोनभद्र
अमर उजाला नेटवर्क, सोनभद्र Published by: नितीश कुमार पांडेय Updated Sun, 30 Mar 2025 08:10 PM IST
सार

स्वास्थ्य व्यवस्था में सुधार के तमाम दावे किए जाते रहे हों लेकिन आज भी व्यवस्था पर सवाल खड़े हो रहे हैं। मामला सोनभद्र के लोढ़ी परिसर स्थित मेडिकल कालेज का है जहां परिजनों ने हंगामा कर आरोप लगाया कि बेड पर प्रसूता तड़पती रही और नर्स मोबाइल पर बात करती रही। परिजनों ने कार्रवाई की मांग की।

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Family members created uproar over the death of a woman the pregnant woman kept writhing in pain on the bed
मृतका का फाइल फोटो और नारेबाजी करते लोग - फोटो : Amar Ujala

विस्तार

 मेडिकल कालेज लोढ़ी परिसर में पीपीपी मॉडल पर संचालित एमसीएच विंग में डॉक्टर एवं स्वास्थ्य कर्मियों की लापरवाही का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है।  अस्पताल कर्मियों का अमानवीय चेहरा देखने को मिला है। आरोप है कि बेड पर तड़पते हुए प्रसूता की मौत हो गई और उस समय स्टाफ नर्स मोबाइल में व्यस्त थी।

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परिजनों ने लापरवाही का आरोप लगाते हुए घंटों तक हंगामा किए। एमसीएच विंग में पंद्रह दिनों में जच्चा-बच्चा की मौत की यह तीसरी घटना है।आदिवासी बहुल इलाके में गर्भवतियों और बच्चों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए सरकार से मेडिकल कालेज परिसर में एमसीएच विंग स्थापित किया गया है।
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इसके संचालन की जिम्मेदारी एक निजी कंपनी को सौंपी गई थी। हालांकि यह अस्पताल दुर्व्यवस्था का शिकार रहा है।  जानकारी के अनुसार यहां अक्सर लापरवाही से प्रसुताओं, गर्भवतियों और नवजातों के मौत के मामले सामने आते रहे हैं। करीब पंद्रह दिन पूर्व लापरवाही से जच्चा-बच्चा की मौत का मामला थमा नहीं था कि रविवार को एक प्रसूता की मौत से हड़कंप मच गया।
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 करमा थाना क्षेत्र के बहेरा निवासी ऊषा देवी (24) को प्रसव पीड़ा होने पर शनिवार को परिजनों ने एमसीएच विंग में भर्ती कराया था। जहां रात में आपरेशन से बच्चा पैदा हुआ था। परिजनों के अनुसार सुबह 11 बजे के करीब उनसे ब्लड मंगाया गया। ब्लड चढ़ाने के दौरान कोई डॉक्टर मौजूद नहीं था। जिससे नर्स ने ही खून चढ़ाना शुरू किया।

इसके बाद नर्स दूर जाकर बैठ गई। परिजनों का आरोप है कि इसके बाद ऊषा को तेज दर्ज होने लगा। जिससे वह छटपटाने लगी। किसी काम से बरामदे में गए परिजनों को बेड के आस-पास के तीमारदारों ने पहुंचकर प्रसूता की तबीयत बिगड़ने की बात कहीं। परिजनों का आरोप है कि स्थिति बिगड़ने पर वहां कोई डॉक्टर नहीं था।

आरोप है कि वह नर्स से मदद की गुहार लगाते रहे और नर्स अपने मोबाइल में व्यस्त रहीं। परिजनों की शिकायत को उसने गंभीरता से नहीं लिया। नर्स का कहना था कि कुछ देर बाद मरीज स्वत: ठीक हो जाएगी। हालांकि स्थिति बिगड़ती ही गई। जिसके बाद ऊषा ने दोपहर एक बजे के करीब दम तोड़ दिया। ग्राम प्रधान बहेरा धीरज सिंह ने बताया कि उसकी मौत के बाद अस्पताल कर्मियों ने रेफर कर पर्चा बनाकर वाराणसी जाने को कहा।

जबकि पहले से ही मौत हो चुकी थी। इसके बाद परिजनों ने अस्पताल में लापरवाही का आरोप लगाते हुए जमकर हंगामा किया। 

नहीं आया कोई अधिकारी
परिजन लापरवाही का आरोप लगाते हुए कार्रवाई की मांग पर अड़े रहे। अस्पताल चौकी पुलिस के समझाने के बाद भी परिजन डटे रहे। वह अस्पताल के साथ ही स्वास्थ्य विभाग के उच्चाधिकारियों को मौके पर बुलाने पर अड़े रहे। जो कार्रवाई की मांग कर रहे थे। खबर लिखे जाने तक पुलिस शव को कब्जे में नहीं ले सकी थी।

 

तब जच्चा-बच्चा की हुई थी मौत
सोनभद्र। करीब पंद्रह दिनों पूर्व इसी अस्पताल में जच्चा-बच्चा की माैत के बाद भी लापरवाही का आरोप लगा था। परिजनों के मुताबिक कृष्ण कुमारी (32) निवासी राबर्ट्सगंज सोनवार को अस्पताल में भर्ती कराया गया था। जहां खून की आवयश्कता बताते हुए परिजनों को ब्लड लेने के लिए भेज दिया था।

परिजन खून के इंतजाम में थे। इसी दौरान बिना जानकारी दिए चिकित्सकों ने उसका ऑपरेशन कर दिया। जिससे जच्चा और बच्चा दोनों की मौत हो गई। तब भी परिजनों का आरोप था कि अस्पताल कर्मियों ने जबरन शव को एंबुलेंस में रखवा दिया था।

फरार डॉक्टरों पर कार्रवाई के लिए सीएमओ ने लिखा पत्र
तीनों डॉक्टर हो गये फरार अस्पताल में भर्ती मरीजों और मृतका के परिजनों का आरोप है कि ऊषा जब दर्द से कराह रही थी। तो उसकी मदद के लिए कोई भी चिकित्सक आगे नहीं आया। अस्पताल में तीन डॉक्टरों की ड्यूटी थी। हालांकि मौके से तीनों डॉक्टर फरार हो गये थे।

अगर डॉक्टर समय पर उपचार शुरू कर देते तो उसकी जान बच सकती थी। इस मामले को सीएमओ डॉ. अश्वनी कुमार ने गंभीरता से लिया है। उन्होने बताया कि तीनों डॉक्टर जो मरीज को छोड़कर फरार हो गये थे। तीनों चिकित्सकों के विरूद्ध कार्रवाई और उन्हे हटाने के लिए कार्यदाई संस्था को पत्राचार किया जा रहा है। इस तरह की लापरवाही क्षम्य नहीं है। मामले में कमेटी का गठन किया जा रहा है।

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