अनपरा। एनसीएल बीना परियोजना में ओवर वर्डेन का कार्य करा रही संविदा कंपनी में रोजगार की मांग को लेकर विरोध प्रदर्शन थमने का नाम नहीं ले रहा है। एनसीएल द्वारा घरसड़ी ग्राम पंचायत में निर्मित कराए गए सामुदायिक भवन में ताला जड़ने के बाद शनिवार से विस्थापित धरने पर बैठ गए हैं।
विस्थापित नेता संतोष दुबे ने नाराजगी जताते हुए कहा कि 27 जनवरी एवं 1 फरवरी को दो चरण में संविदा कंपनी प्रबंधन 35 से ज्यादा विस्थापितों का साक्षात्कार लिया, लेकिन सिर्फ 12 विस्थापितों को रोजगार देने के बाद शेष को नहीं रखा गया। आस लगाए बैठे विस्थापित अभी कुछ समझ पाते तब तक बीना परियोजना प्रबंधन ने विस्थापितों की जो सूची निकाली थी उसे निरस्त कर दिया। जिससे विस्थापितों में भारी आक्रोश व्याप्त है। उन्होंने कहा कि बीना परियोजना प्रबंधन रोजगार को राजनीति का रूप देकर विस्थापितों की रोजी रोटी छीनने का कार्य कर रही है जिसे कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। अंतिम सांस तक रोजगार के लिए विस्थापितों की लड़ाई प्रबंधन के साथ चलती रहेगी। घरसडी, चंदुआर, बरवानी, जमशीला, बांसी गांव के 250 विस्थापित परिवार रोजगार के लिए भटक रहे हैं। नाराज विस्थापितों ने गुरुवार को सामुदायिक भवन में ताला जड़कर विरोध प्रदर्शन करते हुए शनिवार से धरने पर बैठ गए है। विस्थापितों का कहना है कि जब तक रोजगार नहीं मिल जाता ताला नहीं खुलेगा। साथ ही एनसीएल द्वारा गांव में कराए जाने वाले विकास कार्यो का भी विरोध किया जाएगा। कहा कि हजारों की संख्या में बाहर केमजदूर कार्य कर रहे है परंतु यहां के स्थानीय व विस्थापितों केलिए रोजगार नहीं है इससे बड़ा और कोई दुर्भाग्य नहीं हो सकता है कि अपना सब कुछ परियेाजना को न्यौछावर करने वाले विस्थापित आज रोजी-रोटी केलिए दर-बदर भटक रहे है।