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बढ़ रहा है कोरोना का खतरा फिर भी बने हैं बेपरवाह
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चोपन। सुबह करीब साढ़े नौ बजे का समय, शनिवार का दिन चोपन रेलवे स्टेशन पर जबलपुर से चलकर हावड़ा जाने वाली शक्तिपुंज एक्सप्रेस के आने का समय हुआ था, हावड़ा सहित अन्य स्थानों पर जाने के लिए तैयार यात्री ट्रेन के इंतजार में थे तभी अचानक घोषणा होती है कि गाड़ी प्लेटफार्म नंबर दो पर आ रही है। ट्रेन रूकी तो कई यात्री उतरे भी। इस दौरान बगैर मास्क लगाए एक दूसरे से धक्का-मुक्की करते हुए यात्रियों ने अपनी सीट ली। इस बीच किसी के भी जेहन में यह विचार नहीं आया कि कोरोना का संक्रमण बढ़ रहा है।
रेलवे स्टेशन पर यह दृश्य एक-दो दिन की नहीं बल्कि हर दिन की है। शनिवार को जब ‘अमर उजाला’ ने जिले के सबसे बड़े रेलवे स्टेशन का लाइव किया तो पता चला कि संक्रमण का खतरा भले ही बढ़ रहा है, लेकिन लोगों को इसकी चिंता नहीं है। रेलवे कर्मचारी भी उदासीन हैं। न तो कोइ मास्क की अनिवार्यता बताने वाला है और ही थर्मल स्कैनिंग का कोई इंतजाम है।
इनसेट--
कोविड की चिंता नहीं, ट्रेन में पहले चढ़ने की होड़
चोपन रेलवे स्टेशन पर जब शक्तिपुंज एक्सप्रेस आई तो यात्रियों में पहले चढ़ने को लेकर होड़ मच गई। जबकि यात्री भी कम थे। जब यात्रियों से पूछा गया कि आखिर इतनी जल्दी क्या है तो बताया गया कि ट्रेन के आने का समय 09.10 बजे ही है। करीब 20 मिनट की देरी से आई है। पता नहीं कितनी देर रूकेगी। इस आपाधापी में कोविड-19 नियमों की धज्जियां उड़ती नजर आईं।
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इनसेट--
बाजार में भी हो रही लापरवाही
कोरोना को को लेकर केवल रेलवे स्टेशनों पर ही नहीं बल्कि बाजारों में भी काफी लापरवाही बरती जा रही है। चट्टी चौराहों से लेकर मुख्य बाजार तक लोग बेफिक्र होकर बिना मास्क के भ्रमण कर रहे हैं।बाइक चालक हों या साइकिल सवार महज पांच से 10 फीसदी लोग ही मास्क लगाए नजर आते हैं। राबर्ट्सगंज नगर में शनिवार को चहल-पहल के बीच लोग कोविड 19 के नियम का पालन करते नजर नहीं आए।
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यात्रियों की प्रतिक्रिया--
महाराष्ट्र में कोरोना का खतरा बढ़ा है। ऐसे में वहां कंपनियों द्वारा कर्मियों को घर भेजा जा रहा है। मैं पीडीडीयू नगर तक ट्रेन से आया, वहां से बस से चोपन आया और यहां से शक्तिपुंज एक्सप्रेस में सवार होकर गढ़वा अपने घर जाऊंगा। रास्ते में कहीं भी थर्मल स्कैनिंग नहीं हुई है।
- श्यामलाल
टिकट लेकर मैं प्लेटफार्म नंबर दो पर आ गया, लेकिन कहीं कोई जांच नहीं हुई है। कोई मास्क के लिए भी नहीं पूछा। मैं स्वत: मास्क लगा लिया हूं।
- नन्हकू
रेलवे स्टेशन पर चाहे टिकट काउंटर हो या ट्रेन में कहीं भी थर्मल स्कैनर का इंतजाम नहीं है। कहीं भी जांच के लिए न तो रोका गया और न ही टोका गया। जब जांच होगी तभी तो लोग कराएंगे।
- शहाबुद्दीन
मैं जबलपुर से आ रहा हूं। वहां स्टेशन पर केवल झोले को सैनिटाइज किया गया, बाकी यात्रियों को नहीं। उसके बाद कहीं भी जांच की कोई व्यवस्था नहीं। कोई बीच में न तो रोका और न ही टोका।
- रवि
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वर्जन-
स्टेशन पर थर्मल स्कैनर की कोई व्यवस्था नहीं है। यात्रियों को कहा जाता है कि वे मास्क लगाकर ही यात्रा करें।
- आशीष श्रीवासतव, वाणिज्य यातायात निरीक्षक
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रेलवे स्टेशन पर यह दृश्य एक-दो दिन की नहीं बल्कि हर दिन की है। शनिवार को जब ‘अमर उजाला’ ने जिले के सबसे बड़े रेलवे स्टेशन का लाइव किया तो पता चला कि संक्रमण का खतरा भले ही बढ़ रहा है, लेकिन लोगों को इसकी चिंता नहीं है। रेलवे कर्मचारी भी उदासीन हैं। न तो कोइ मास्क की अनिवार्यता बताने वाला है और ही थर्मल स्कैनिंग का कोई इंतजाम है।
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इनसेट--
कोविड की चिंता नहीं, ट्रेन में पहले चढ़ने की होड़
चोपन रेलवे स्टेशन पर जब शक्तिपुंज एक्सप्रेस आई तो यात्रियों में पहले चढ़ने को लेकर होड़ मच गई। जबकि यात्री भी कम थे। जब यात्रियों से पूछा गया कि आखिर इतनी जल्दी क्या है तो बताया गया कि ट्रेन के आने का समय 09.10 बजे ही है। करीब 20 मिनट की देरी से आई है। पता नहीं कितनी देर रूकेगी। इस आपाधापी में कोविड-19 नियमों की धज्जियां उड़ती नजर आईं।
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बाजार में भी हो रही लापरवाही
कोरोना को को लेकर केवल रेलवे स्टेशनों पर ही नहीं बल्कि बाजारों में भी काफी लापरवाही बरती जा रही है। चट्टी चौराहों से लेकर मुख्य बाजार तक लोग बेफिक्र होकर बिना मास्क के भ्रमण कर रहे हैं।बाइक चालक हों या साइकिल सवार महज पांच से 10 फीसदी लोग ही मास्क लगाए नजर आते हैं। राबर्ट्सगंज नगर में शनिवार को चहल-पहल के बीच लोग कोविड 19 के नियम का पालन करते नजर नहीं आए।
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यात्रियों की प्रतिक्रिया--
महाराष्ट्र में कोरोना का खतरा बढ़ा है। ऐसे में वहां कंपनियों द्वारा कर्मियों को घर भेजा जा रहा है। मैं पीडीडीयू नगर तक ट्रेन से आया, वहां से बस से चोपन आया और यहां से शक्तिपुंज एक्सप्रेस में सवार होकर गढ़वा अपने घर जाऊंगा। रास्ते में कहीं भी थर्मल स्कैनिंग नहीं हुई है।
- श्यामलाल
टिकट लेकर मैं प्लेटफार्म नंबर दो पर आ गया, लेकिन कहीं कोई जांच नहीं हुई है। कोई मास्क के लिए भी नहीं पूछा। मैं स्वत: मास्क लगा लिया हूं।
- नन्हकू
रेलवे स्टेशन पर चाहे टिकट काउंटर हो या ट्रेन में कहीं भी थर्मल स्कैनर का इंतजाम नहीं है। कहीं भी जांच के लिए न तो रोका गया और न ही टोका गया। जब जांच होगी तभी तो लोग कराएंगे।
- शहाबुद्दीन
मैं जबलपुर से आ रहा हूं। वहां स्टेशन पर केवल झोले को सैनिटाइज किया गया, बाकी यात्रियों को नहीं। उसके बाद कहीं भी जांच की कोई व्यवस्था नहीं। कोई बीच में न तो रोका और न ही टोका।
- रवि
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वर्जन-
स्टेशन पर थर्मल स्कैनर की कोई व्यवस्था नहीं है। यात्रियों को कहा जाता है कि वे मास्क लगाकर ही यात्रा करें।
- आशीष श्रीवासतव, वाणिज्य यातायात निरीक्षक