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महिलाओं व बुजुर्गों की सीनाजनी के साथ ताजिया दफन
Updated Sun, 01 Oct 2017 11:43 PM IST
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सोनभद्र । हजरत इमाम हुसैन की शहादत की याद में रविवार को अकीदत एवं एहतराम के साथ मोहर्रम का जुलूस निकाला गया। जुलूस में हजारों अकीदतमंदों ने शिरकत की। मातम करते हुए या हुसैन जिंदाबाद के नारे लगाए। देर शाम नम आंखों से ताजियों को सुपुर्द ए खाक किया गया। वहीं राबर्ट्सगंज में मोहर्रम का जुलूस सोमवार को निकाला जाएगा।
वो कैसे तेरे कातिल, जो ना समझे तेरी मंजिल, मुहम्मद का है तू दिल, ये ना सोचा ये ना जाना, गम-ए-हुसैन में डूबो देने वाली ये नोहाख्वानी, महिलाओं एवं बुजुर्गो की सीनाजनी और जंजीरों के मातम से जगह-जगह खून के धब्बे दसवीं मुहर्रम के मौके पर हर जगह जगह ऐसा ही आलम था। हजरत इमाम हुसैन व उनके 72 साथियों की शहादत की याद में निकाला जाने वाला जुलूस पूरी अकीदत व एहतराम के साथ करबला में ताजिया दफन कर खत्म हुआ। चोपन : मोहर्रम का मातमी पर्व गमगीन माहौल में मनाया गया। नगर में दोपहर में अवकाश नगर से झंडा जुलूस गौरव नगर होते हुए लल्लन कुरैशी सदर के यहां प्रीत नगर होते हुए पुन: मदरसे पर पहुंचकर पूर्व में रखे हुए ताजिए को लेकर कर्बला में दफन कर दिया। झंडा जूलूस को लेकर नगर में जगह-जगह पेयजल की व्यवस्था की गई थी। इस दौरान नव युवकों ने एक से बढ़कर एक कारनामे दिखाये। जुलूस के दौरान चप्पे-चप्पे पर पुलिस तैनात रही।
रामगढ़: नई बाजार में हुसैनी कमेटी की ओर से मोहर्रम मनाया गया। यहां ताजिया निकाली गई, सीनाजनी की गई और युवाओं ने कई तरह के करतब दिखाए। शाम को ताजिया कर्बला में दफन की गई। इस मौके पर हिफाजत अली, अयुब अहमद, ईदु अहमद, रियाज, इजहार, अलीम, फिरोज, शाहिद, अकबर, तौकिर, ईबादत मौजूद रहे।
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वैनी: नगवां ब्लॉक के बीजवार, वैनी, दूबेपुर, रायपुर और पडऱी गांव से मोहर्रम पर रविवार को ताजिया जुलूस निकला। युवाओं ने विभिन्न तरह के करतब दिखाए। सुरक्षा के कड़े इंतजाम रहे। इस दौरान हैदर अली, अबु लैस, निजामुद्दीन, करीमउल्ला, अजहर मौजूद रहे। अनपरा, शक्तिनगर, बीना, बीजपुर में निकले जुलूस के हर अंजुमन के अलम के साथ नोहाख्वानी करने वाले थे। इस दौरान मातम मनाया गया। मुस्लिम युवकों ने खतरनाक करतब दिखा कर लोगों को हैरत में डाल दिया। अनपरा से निकली ताजिया डिबुलगंज स्थित करबला में देर शाम दफन की गईं।
बीजपुर: जरहां, बीजपुर, खम्हरिया, राजो, लीलाडेवी, पोथीपाथर आदि स्थानों पर ताजिया का जुलूस निकाला गया। बीजपुर बाजार से दो ताजिया निकाली गई। मेन चौराहे पर ताजियादारों ने लाठेी, तलवार, ढाल से हैरत अंगेज कारनामें दिखाए। यहां से सभी ताजियों को स्थानीय करबला में दफन किया गया। इस मौके पर गयासुद्दीन, मीर हसन, सलीम खान, नन्हकू खान, अलाउद्दीन आदि इंतेजाम में लगे रहे।
ओबरा: नगर में रविवार को मोहर्रम पर ताजियों के साथ मातमी जुलूस निकाला गया। ताजिया चोपन रोड, चूड़ी गली, कुरैश नगर, मिल्लत नगर, कर्बला के समीप से होते हुए अंबेडकर चौराहे पर एकत्रित होकर क्लब दो से गांधी मैदान होते हुए वीआईपी रोड से कर्बला पहुंचा। जुलूस के दौरान परंपरानुसार बच्चों और युवकों की टोलियों ने विभिन्न प्रकार के करतब दिखाए। युवकों ने तलवार, लाठीबाजी के करतब दिखाए। शहर में जुलूस के रास्ते बाजार में साज-सज्जा रही। जुलूस के दौरान अन्य समाज के लोगों ने विभिन्न स्थानों पर स्वल्पाहार व शरबत का वितरण किया। इस दौरान मो. हबीब, पीर मोहम्मद, अली हसन, मो. अकरम, मुस्ताक अहमद, मुनीर अहमद, मो. शमशेर खां, वसीम खां, खुर्शीद आलम, शब्बीर अली, मुस्तफा रजा सिद्दीकी, सलीम कुरैशी, मैनुद्दीन मौजूद रहे।
घोरावल: नगर, बिसरेखी, उंचडीह, जुड़िया से ताजिया निकाली गई, जिन्हें जुड़िया के करबला के मैदान में दफनाया गया। इसके अलावा बर कन्हरा, डोरिहार, रमपुरवा में भी ताजिय़ा निकली। इनामुल हक अंसारी, सखावत अली, मुहम्मद नईम, मुहम्मद अशरफ, अल्ला भेजू, मुनीम, असलम, शहबान, रमजान मौजूद रहे।
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वो कैसे तेरे कातिल, जो ना समझे तेरी मंजिल, मुहम्मद का है तू दिल, ये ना सोचा ये ना जाना, गम-ए-हुसैन में डूबो देने वाली ये नोहाख्वानी, महिलाओं एवं बुजुर्गो की सीनाजनी और जंजीरों के मातम से जगह-जगह खून के धब्बे दसवीं मुहर्रम के मौके पर हर जगह जगह ऐसा ही आलम था। हजरत इमाम हुसैन व उनके 72 साथियों की शहादत की याद में निकाला जाने वाला जुलूस पूरी अकीदत व एहतराम के साथ करबला में ताजिया दफन कर खत्म हुआ। चोपन : मोहर्रम का मातमी पर्व गमगीन माहौल में मनाया गया। नगर में दोपहर में अवकाश नगर से झंडा जुलूस गौरव नगर होते हुए लल्लन कुरैशी सदर के यहां प्रीत नगर होते हुए पुन: मदरसे पर पहुंचकर पूर्व में रखे हुए ताजिए को लेकर कर्बला में दफन कर दिया। झंडा जूलूस को लेकर नगर में जगह-जगह पेयजल की व्यवस्था की गई थी। इस दौरान नव युवकों ने एक से बढ़कर एक कारनामे दिखाये। जुलूस के दौरान चप्पे-चप्पे पर पुलिस तैनात रही।
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रामगढ़: नई बाजार में हुसैनी कमेटी की ओर से मोहर्रम मनाया गया। यहां ताजिया निकाली गई, सीनाजनी की गई और युवाओं ने कई तरह के करतब दिखाए। शाम को ताजिया कर्बला में दफन की गई। इस मौके पर हिफाजत अली, अयुब अहमद, ईदु अहमद, रियाज, इजहार, अलीम, फिरोज, शाहिद, अकबर, तौकिर, ईबादत मौजूद रहे।
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वैनी: नगवां ब्लॉक के बीजवार, वैनी, दूबेपुर, रायपुर और पडऱी गांव से मोहर्रम पर रविवार को ताजिया जुलूस निकला। युवाओं ने विभिन्न तरह के करतब दिखाए। सुरक्षा के कड़े इंतजाम रहे। इस दौरान हैदर अली, अबु लैस, निजामुद्दीन, करीमउल्ला, अजहर मौजूद रहे। अनपरा, शक्तिनगर, बीना, बीजपुर में निकले जुलूस के हर अंजुमन के अलम के साथ नोहाख्वानी करने वाले थे। इस दौरान मातम मनाया गया। मुस्लिम युवकों ने खतरनाक करतब दिखा कर लोगों को हैरत में डाल दिया। अनपरा से निकली ताजिया डिबुलगंज स्थित करबला में देर शाम दफन की गईं।
बीजपुर: जरहां, बीजपुर, खम्हरिया, राजो, लीलाडेवी, पोथीपाथर आदि स्थानों पर ताजिया का जुलूस निकाला गया। बीजपुर बाजार से दो ताजिया निकाली गई। मेन चौराहे पर ताजियादारों ने लाठेी, तलवार, ढाल से हैरत अंगेज कारनामें दिखाए। यहां से सभी ताजियों को स्थानीय करबला में दफन किया गया। इस मौके पर गयासुद्दीन, मीर हसन, सलीम खान, नन्हकू खान, अलाउद्दीन आदि इंतेजाम में लगे रहे।
ओबरा: नगर में रविवार को मोहर्रम पर ताजियों के साथ मातमी जुलूस निकाला गया। ताजिया चोपन रोड, चूड़ी गली, कुरैश नगर, मिल्लत नगर, कर्बला के समीप से होते हुए अंबेडकर चौराहे पर एकत्रित होकर क्लब दो से गांधी मैदान होते हुए वीआईपी रोड से कर्बला पहुंचा। जुलूस के दौरान परंपरानुसार बच्चों और युवकों की टोलियों ने विभिन्न प्रकार के करतब दिखाए। युवकों ने तलवार, लाठीबाजी के करतब दिखाए। शहर में जुलूस के रास्ते बाजार में साज-सज्जा रही। जुलूस के दौरान अन्य समाज के लोगों ने विभिन्न स्थानों पर स्वल्पाहार व शरबत का वितरण किया। इस दौरान मो. हबीब, पीर मोहम्मद, अली हसन, मो. अकरम, मुस्ताक अहमद, मुनीर अहमद, मो. शमशेर खां, वसीम खां, खुर्शीद आलम, शब्बीर अली, मुस्तफा रजा सिद्दीकी, सलीम कुरैशी, मैनुद्दीन मौजूद रहे।
घोरावल: नगर, बिसरेखी, उंचडीह, जुड़िया से ताजिया निकाली गई, जिन्हें जुड़िया के करबला के मैदान में दफनाया गया। इसके अलावा बर कन्हरा, डोरिहार, रमपुरवा में भी ताजिय़ा निकली। इनामुल हक अंसारी, सखावत अली, मुहम्मद नईम, मुहम्मद अशरफ, अल्ला भेजू, मुनीम, असलम, शहबान, रमजान मौजूद रहे।