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मनमाने फीस वसूलने पर डीएम से करें शिकायत
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सोनभद्र। एक अप्रैल से नया सत्र शुरू हो गया है। कई पब्लिक स्कूलों में प्रवेश को लेकर लंबी लाइन लग रही हैं। इन विद्यालयों में पंजीयन से लेकर फीस वसूली में मनमानी वृद्धि हर साल होती है। पिछले साल स्कूल संचालकों की मनमानी रोकने के लिए प्रदेश सरकार ने अध्यादेश लागू किया था। अगर इसकी शर्तों से ज्यादा फीस वृद्धि की गई तो पहले स्कूल प्रशासन से शिकायत करें। वहां 15 पखवारे भर के भीतर में सुनवाई नहीं होती है तो शिकायतकर्ता डीएम की अध्यक्षता में बनी समिति से लिखित में शिकायत दर्ज करा सकते हैं।
शासन ने विद्यालय में शुल्क संग्रह की प्रक्रिया खुली, पारदर्शी एवं उत्तरदायी करने का निर्देश दिया है। किसी छात्र को पुस्तकें, जूते, मोजे, यूनिफार्म आदि किसी विशिष्ट दुकान से क्रय करने के लिए बाध्य नहीं किया जाएगा। लेकिन राबट्र्सगंज, घोरावल और दुद्धी तहसील क्षेत्र में संचालित मान्यता प्राप्त एवं वित्तविहिन करीब 142 विद्यालयों में से गिने-चुने स्कूलों को छोड़ दें तो अधिकांश विद्यालयों में मनमाने ढंग से फीस वसूल की जा रही है। इतना ही नहीं 40 से अधिक स्कूलों के प्रबंधक खुद के पास से और उतने ही अपने सेटिंग करने वाले दुकानों से बच्चों को पुस्तकें, जूते, मोजे, यूनिफार्म आदि क्रय करने के लिए बाध्य कर रहे हैं। मजबूरी में अभिभावक महंगे दर पर यूनिफार्म, पठन-पाठ्य सामग्री क्रय करने के लिए मजबूर है। शासनादेश को दरकिनार कर अधिकांश स्कूलों में पंजीयन से लेकर फीस में वृद्धि की जा रही है। हालांकि इस पर अगर किसी अभिभावक को आपत्ति होती है तो वह विद्यालय प्रशासन से शिकायत कर सकता है। यहां पर 15 दिनों के भीतर सुनवाई न होने पर लोग डीएम की अध्यक्षता में बनी समिति से लिखित में शिकायत दर्ज करा सकते हैं। समिति के जांच में आरोप सही मिलने पर प्रबंधन के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। जिला विद्यालय निरीक्षक फूलचंद्र यादव ने कहा कि स्कूल संचालकों को शासनादेश के तहत पंजीयन शुल्क एवं फीस लेने के लिए निर्देशित किया गया है।
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शासन ने विद्यालय में शुल्क संग्रह की प्रक्रिया खुली, पारदर्शी एवं उत्तरदायी करने का निर्देश दिया है। किसी छात्र को पुस्तकें, जूते, मोजे, यूनिफार्म आदि किसी विशिष्ट दुकान से क्रय करने के लिए बाध्य नहीं किया जाएगा। लेकिन राबट्र्सगंज, घोरावल और दुद्धी तहसील क्षेत्र में संचालित मान्यता प्राप्त एवं वित्तविहिन करीब 142 विद्यालयों में से गिने-चुने स्कूलों को छोड़ दें तो अधिकांश विद्यालयों में मनमाने ढंग से फीस वसूल की जा रही है। इतना ही नहीं 40 से अधिक स्कूलों के प्रबंधक खुद के पास से और उतने ही अपने सेटिंग करने वाले दुकानों से बच्चों को पुस्तकें, जूते, मोजे, यूनिफार्म आदि क्रय करने के लिए बाध्य कर रहे हैं। मजबूरी में अभिभावक महंगे दर पर यूनिफार्म, पठन-पाठ्य सामग्री क्रय करने के लिए मजबूर है। शासनादेश को दरकिनार कर अधिकांश स्कूलों में पंजीयन से लेकर फीस में वृद्धि की जा रही है। हालांकि इस पर अगर किसी अभिभावक को आपत्ति होती है तो वह विद्यालय प्रशासन से शिकायत कर सकता है। यहां पर 15 दिनों के भीतर सुनवाई न होने पर लोग डीएम की अध्यक्षता में बनी समिति से लिखित में शिकायत दर्ज करा सकते हैं। समिति के जांच में आरोप सही मिलने पर प्रबंधन के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। जिला विद्यालय निरीक्षक फूलचंद्र यादव ने कहा कि स्कूल संचालकों को शासनादेश के तहत पंजीयन शुल्क एवं फीस लेने के लिए निर्देशित किया गया है।
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