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वनाधिकार पर प्रशासन का आदेश अवैधानिक

Tue, 12 Mar 2019 11:39 PM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Tue, 12 Mar 2019 11:39 PM IST
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वनाधिकार पर प्रशासन का आदेश अवैधानिक
सोनभद्र। जिला समाज कल्याण अधिकारी द्वारा अस्वीकृत दावों के विरुद्ध आपत्ति को उनके कार्यालय में जमा करने का आदेश अवैधानिक है और यह महज सुप्रीम कोर्ट के इस संबंध में आए आदेश के लिए प्रशासन की खानापूर्ति है। यह आरोप मंगलवार को स्वराज अभियान की राज्य कार्यसमिति के सदस्य दिनकर कपूर ने लगाया। उन्होंने डीएम से इस आदेश को रद्द करने और विधि के अनुरूप तहसीलों में जमा हजारों दावों का परीक्षण करा वनाधिकार कानून के तहत जमीन पर अधिकार देने की मांग की।
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मंगलवार को राबर्ट्सगंज में प्रेस वार्ता के दौरान उन्होंने कहा कि आमतौर पर पूरे प्रदेश में और विशेषकर आदिवासी बहुल्य सोनभद्र, मिर्जापुर और चंदौली में वनाधिकार कानून को सरकार व प्रशासन ने विफल कर दिया। विधि के विरुद्ध जमा दावों का प्रशासन द्वारा निस्तारण किया गया और आज तक दावेदारों को न तो सुनवाई का अवसर दिया गया और न ही दावों के संबंध में सूचित ही किया गया। प्रशासन की इस कार्रवाई के विरुद्ध आदिवासी वनवासी महासभा की जनहित याचिका पर इलाहाबाद उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश ने सभी जमा दावों पर समयबद्ध पुनर्विचार करने का सरकार को आदेश दिया था। जिसके बाद दुद्धी से लेकर हर तहसील में हजारों की संख्या में दावेदारों ने अपनी अपील दाखिल की है। इन अपीलों का विधि के अनुरूप परीक्षण करने और वनाधिकार कानून के तहत पुश्तैनी जमीन पर अधिकार देने की जगह जिला प्रशासन महज खानापूर्ति कर रहा है। उन्होंने कहा कि जिला प्रशासन के इस अवैधानिक आदेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में आदिवासी वनवासी महासभा की तरफ से आवाज उठाई जाएगी।
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