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Sitapur News: रामलीला में नारद मोह और राजा प्रतापभानु प्रसंग का मंचन
Tue, 13 Oct 2026 12:49 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सीतापुर
संवाद न्यूज एजेंसी, सीतापुर
Updated Tue, 13 Oct 2026 12:49 AM IST
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पिसावां में रामलीला का मंचन करते स्थानीय कलाकार ।
पिसावां। कस्बे के बाबू सिंह इंटर कॉलेज के समीप रविवार शाम जय मड़ैया बाबा रामलीला सेवा समिति के कलाकारों ने नारद मोह लीला और राजा प्रतापभानु के प्रसंगों का मंचन किया। कलाकारों ने शानदार अभिनय के माध्यम से दर्शकों को रामायण के महत्वपूर्ण प्रसंगों से रूबरू कराया।
नारद मोह लीला में दिखाया गया कि देवर्षि नारद को अपनी तपस्या और ब्रह्मचर्य पर अभिमान हो जाता है। भगवान शिव के समझाने के बावजूद वह अपना अभिमान भगवान विष्णु के सामने प्रकट करते हैं। नारद का अहंकार दूर करने के लिए भगवान विष्णु माया रचते हैं। रास्ते में राजकुमारी विश्वमोहिनी का स्वयंवर देखकर नारद मोहित हो जाते हैं और भगवान विष्णु से उनके समान सुंदर रूप मांगते हैं। भगवान विष्णु उन्हें वानर रूप प्रदान कर देते हैं। स्वयंवर में राजकुमारी भगवान विष्णु के गले में वरमाला डाल देती हैं। अपना वानर रूप देखकर नारद क्रोधित हो जाते हैं और भगवान विष्णु को पत्नी वियोग का श्राप देते हैं। बाद में माया का प्रभाव समाप्त होने पर उन्हें अपनी भूल का एहसास होता है और वह भगवान से क्षमा मांगते हैं।
इसके बाद राजा प्रतापभानु के प्रसंग का मंचन किया गया। इसमें कपटी साधु के षड्यंत्र में फंसकर संतों के भोजन में मांस मिलाए जाने की घटना दिखाई गई। इससे क्रोधित संत राजा को श्राप देते हैं, जिसके कारण अगले जन्म में प्रतापभानु रावण बनते हैं। कलाकारों की प्रस्तुति ने दर्शकों को भावविभोर कर दिया।
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नारद मोह लीला में दिखाया गया कि देवर्षि नारद को अपनी तपस्या और ब्रह्मचर्य पर अभिमान हो जाता है। भगवान शिव के समझाने के बावजूद वह अपना अभिमान भगवान विष्णु के सामने प्रकट करते हैं। नारद का अहंकार दूर करने के लिए भगवान विष्णु माया रचते हैं। रास्ते में राजकुमारी विश्वमोहिनी का स्वयंवर देखकर नारद मोहित हो जाते हैं और भगवान विष्णु से उनके समान सुंदर रूप मांगते हैं। भगवान विष्णु उन्हें वानर रूप प्रदान कर देते हैं। स्वयंवर में राजकुमारी भगवान विष्णु के गले में वरमाला डाल देती हैं। अपना वानर रूप देखकर नारद क्रोधित हो जाते हैं और भगवान विष्णु को पत्नी वियोग का श्राप देते हैं। बाद में माया का प्रभाव समाप्त होने पर उन्हें अपनी भूल का एहसास होता है और वह भगवान से क्षमा मांगते हैं।
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इसके बाद राजा प्रतापभानु के प्रसंग का मंचन किया गया। इसमें कपटी साधु के षड्यंत्र में फंसकर संतों के भोजन में मांस मिलाए जाने की घटना दिखाई गई। इससे क्रोधित संत राजा को श्राप देते हैं, जिसके कारण अगले जन्म में प्रतापभानु रावण बनते हैं। कलाकारों की प्रस्तुति ने दर्शकों को भावविभोर कर दिया।
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