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Sitapur News: नदियों का जलस्तर बढ़ते ही डूबने लगे स्पर
Sat, 01 Jul 2023 09:30 PM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सीतापुर
संवाद न्यूज एजेंसी, सीतापुर
Updated Sat, 01 Jul 2023 09:30 PM IST
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रेउसा/सीतापुर। जिले के गांजरी इलाके को बाढ़ से बचाने के लिए हर साल करोड़ों की योजनाओं पर काम होता है। इसे इत्तेफाक कहें या विडंबना कि यह काम बाढ़ आने से पहले पूरा नहीं हो पाता जिसकी वजह से खर्च की गई रकम पर पानी फिर जाता है। वहीं, हजारों लोगों को बाढ़ से जूझना पड़ता है। इस बार भी कुछ ऐसा ही नजर आ रहा है। अब जब बारिश के चलते नदियों का जलस्तर बढ़ने लगा तो रेउसा इलाके में बाढ़ परियोजना में बनाए गए ज्यादातर स्टड पानी में डूबे नजर आ रहे हैं।
ग्रामीणों की माने तो स्टड निर्माण में मानकों का ख्याल नहीं रखा गया है। हालांकि, सिंचाई विभाग के अफसर बाढ़ परियोजनाओं का काम पूरा करने का दावा कर रहे हैं। बहरहाल, करीब 17 करोड़ की लागत से सरयू के किनारे तीन अलग-अलग जगहों पर बनाए गए स्टड गांवों को कितना सुरक्षित रख पाएंगे यह तो बाढ़ आने पर भी पता चल सकेगा। विकास खंड रेउसा के अंतर्गत सरयू नदी के दाएं किनारे पर बसे पासिनपुरवा, तेलियनपुरवा, जंगल टपरी आदि गांवों को बाढ़ व कटान से बचाने के लिए 6.53 करोड़ की लागत से स्टड निर्माण कराया गया है। इसी तरह लोधपुरवा, रामलालपुरवा, सिसैया बाजार, मौजीपुरवा आदि गांवों की बाढ़ से सुरक्षा के लिए 5.66 करोड़ और चौकीपुरवा, नव्वनपुरवा, अच्छेलालपुरवा तथा दर्जिनरेती को बाढ़ से बचाने के लिए 5.70 करोड़ की लागत से स्टड निर्माण कराया गया है।
ग्रामीण बोले-स्टड निर्माण में की गई रस्म अदायगी
बाढ़ परियोजनाओं का काम पिछले दो दिन से बंद कर दिया गया है। ग्रामीण मुनीम, गोपाल व रामनरेश ने बताया कि बारिश से पहले तक काम चल रहा था। बारिश के बाद सरयू का जलस्तर बढ़ने पर काम बंद कर दिया। यह कहा गया कि काम पूरा हो गया है। मूलचंद, श्रीराम और उमेश की मानें तो स्टड निर्माण में मानकों का ख्याल नहीं रखा गया। बोरियों में बालू व मिट्टी निर्धारित मात्रा से कम भरी गई है। बीच में गैप भी ज्यादा छोड़ा गया है। अनेक स्थानों पर जियो बैग नहीं भरे जा सके हैं। परक्यूपाइन भी कमजोर है। नदी की तेज धारा में परक्यूपाइन बह जाने की बात से इंकार नहीं किया जा सकता है।
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जलस्तर बढ़ने से कई स्टड डूबे
ग्रामीण मौजीलाल, मुंशीलाल, चंपा देवी, श्रीकेशन, रामफल बताते हैं, कि स्टड निर्माण में टोकने पर जवाब मिला कि सरकार से जैसे निर्देश मिले वैसा काम कराया है। बारिश से सरयू का जलस्तर बढ़ने पर बचाव के लिए बनाए गए कई स्टडों पर पानी चढ़ गया है। बाढ़ आने पर लहरों का तेज बहाव यह स्टड कितना रोक पाएंगे इसे लेकर ग्रामीणों में संशय है।
तटवर्ती गांवों को कटान से बचा रहे स्टड
सिंचाई प्रखंड के अधिशासी अभियंता विशाल पोरवाल ने बताया कि सरयू नदी में 1.25 लाख क्यूसेक और शारदा में 23 हजार क्यूसेक पानी है। बारिश के चलते नदियों के जलस्तर में वृद्धि हुई है, पर अभी हालात पूरी तरह से सामान्य हैं। उन्होंने बताया कि रेउसा क्षेत्र की बाढ़ परियोजनाओं का कार्य पूरा कर लिया गया है। कटान ज्यादा तब होती है जब पानी नदी के अंदर होता है। पानी बाहर निकलने पर कटान नहीं होता है। यह तीनों परियोजनाएं इस समय तटीय गांवों को कटान से बचा रही हैं।
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ग्रामीणों की माने तो स्टड निर्माण में मानकों का ख्याल नहीं रखा गया है। हालांकि, सिंचाई विभाग के अफसर बाढ़ परियोजनाओं का काम पूरा करने का दावा कर रहे हैं। बहरहाल, करीब 17 करोड़ की लागत से सरयू के किनारे तीन अलग-अलग जगहों पर बनाए गए स्टड गांवों को कितना सुरक्षित रख पाएंगे यह तो बाढ़ आने पर भी पता चल सकेगा। विकास खंड रेउसा के अंतर्गत सरयू नदी के दाएं किनारे पर बसे पासिनपुरवा, तेलियनपुरवा, जंगल टपरी आदि गांवों को बाढ़ व कटान से बचाने के लिए 6.53 करोड़ की लागत से स्टड निर्माण कराया गया है। इसी तरह लोधपुरवा, रामलालपुरवा, सिसैया बाजार, मौजीपुरवा आदि गांवों की बाढ़ से सुरक्षा के लिए 5.66 करोड़ और चौकीपुरवा, नव्वनपुरवा, अच्छेलालपुरवा तथा दर्जिनरेती को बाढ़ से बचाने के लिए 5.70 करोड़ की लागत से स्टड निर्माण कराया गया है।
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ग्रामीण बोले-स्टड निर्माण में की गई रस्म अदायगी
बाढ़ परियोजनाओं का काम पिछले दो दिन से बंद कर दिया गया है। ग्रामीण मुनीम, गोपाल व रामनरेश ने बताया कि बारिश से पहले तक काम चल रहा था। बारिश के बाद सरयू का जलस्तर बढ़ने पर काम बंद कर दिया। यह कहा गया कि काम पूरा हो गया है। मूलचंद, श्रीराम और उमेश की मानें तो स्टड निर्माण में मानकों का ख्याल नहीं रखा गया। बोरियों में बालू व मिट्टी निर्धारित मात्रा से कम भरी गई है। बीच में गैप भी ज्यादा छोड़ा गया है। अनेक स्थानों पर जियो बैग नहीं भरे जा सके हैं। परक्यूपाइन भी कमजोर है। नदी की तेज धारा में परक्यूपाइन बह जाने की बात से इंकार नहीं किया जा सकता है।
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जलस्तर बढ़ने से कई स्टड डूबे
ग्रामीण मौजीलाल, मुंशीलाल, चंपा देवी, श्रीकेशन, रामफल बताते हैं, कि स्टड निर्माण में टोकने पर जवाब मिला कि सरकार से जैसे निर्देश मिले वैसा काम कराया है। बारिश से सरयू का जलस्तर बढ़ने पर बचाव के लिए बनाए गए कई स्टडों पर पानी चढ़ गया है। बाढ़ आने पर लहरों का तेज बहाव यह स्टड कितना रोक पाएंगे इसे लेकर ग्रामीणों में संशय है।
तटवर्ती गांवों को कटान से बचा रहे स्टड
सिंचाई प्रखंड के अधिशासी अभियंता विशाल पोरवाल ने बताया कि सरयू नदी में 1.25 लाख क्यूसेक और शारदा में 23 हजार क्यूसेक पानी है। बारिश के चलते नदियों के जलस्तर में वृद्धि हुई है, पर अभी हालात पूरी तरह से सामान्य हैं। उन्होंने बताया कि रेउसा क्षेत्र की बाढ़ परियोजनाओं का कार्य पूरा कर लिया गया है। कटान ज्यादा तब होती है जब पानी नदी के अंदर होता है। पानी बाहर निकलने पर कटान नहीं होता है। यह तीनों परियोजनाएं इस समय तटीय गांवों को कटान से बचा रही हैं।