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सरायन नदी पर जल्द बनेगा नया पुल
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कैंचीपुल पर निकलते लोग।- संवाद
- फोटो : SITAPUR
सीतापुर। सरायन नदी पर जल्द नया पुल बनेगा। पुराना पुल कमजोर होने लगा है। अभी आवागमन इसी पुल से हो रहा है लेकिन पुल पर बढ़ते लोड को देखते हुए इसकी जगह दूसरा पुल बनवाने का निर्णय लिया गया है। इसकी कवायद शुरू हो गई है। सेतु निगम ने वन विभाग से जमीन का ब्यौरा मांगा है। इस पुल पर रोजाना एक हजार से अधिक वाहनों का आना-जाना रहता है।
सीतापुर शहर को जोड़ने के लिए एक मात्र कैंची पुल है। इसके जरिए ही शाहजहांपुर की तरफ से शहर के अंदर वाहन आते हैं। इससे इस पुल पर हर समय आवागमन बना रहता है। इस पुल को शहर की लाइफ लाइन कहा जाता है। अगर यह पुल क्षतिग्रस्त हो जाए तो शहर में केवल पुराना सीतापुर का पक्का पुल है।
लेकिन उस पर अधिक लोड पड़ने से वहां पर जाम की स्थिति उत्पन्न हो जाएगी। भारी वाहन शहर के अंदर से होते हुए उस पुल तक नहीं पहुंच सकेंगे। ऐसे में कैंची पुल ही सरायन नदी के दोनों तरफ के लोगों को आने-जाने का साधन है। लेकिन यह पुल दशकों पुराना है। इससे यह पुल कमजोर होने लगा है।
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इस पर लगातार बढ़ते भार को देखते हुए शासन ने यहां पर दूसरा नया पुल बनवाने का निर्णय लिया है। इसके लिए कवायद शुरू हो गई है। सेतु निगम ने वन विभाग से जमीन का ब्यौरा तलब किया है। इस जानकारी के बाद पुल को अंतिम रूप से निर्माण की मंजूरी मिलेगी। इस पुल पर रोजाना एक हजार से अधिक वाहन आवागमन करते हैं।
मछली मंडी के पास बना पुल भी है क्षतिग्रस्त
शहर से गुजरी सरायन नदी पार करके ही पुराने शहर के लोग नए शहर पहुंचते हैं। इसके लिए पक्का पुल और मछली मंडी के निकट बना पुल (फटफटा पुल) से ही अधिकतर लोग गुजरते हैं। फटफटा पुल अधिक कमजोर व क्षतिग्रस्त है। दोनों तरह की दीवारें क्षतिग्रस्त हो गई हैं। इससे यहां गुजरने वाले लोग भयभीत रहते हैं। पुल संकरा होने के कारण इस पर से दो पहिया वाहनों के साथ ही ठेले भी गुजरते हैं। यह दोनों पुल काफी पुराने बने हैं। पक्का पुल के निकट दूसरा नया पुल बन गया है। जबकि फटफटा पुल की रिपेयरिंग तक नहीं की गई है।
वन विभाग से मांगा जमीन का ब्यौरा
प्रभागीय निदेशक सामाजिक वानिकी को पत्र भेजा गया है। सेतु निर्माण क्षेत्र में अगर वन विभाग की भूमि आ रही है तो इसकी जानकारी एक सप्ताह में मांगी गई है। उसके बाद प्रस्ताव बनाकर शासन को भेजा जाएगा।
- केके श्रीवास्तव, परियोजना प्रबंधक, सेतु निगम
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सीतापुर शहर को जोड़ने के लिए एक मात्र कैंची पुल है। इसके जरिए ही शाहजहांपुर की तरफ से शहर के अंदर वाहन आते हैं। इससे इस पुल पर हर समय आवागमन बना रहता है। इस पुल को शहर की लाइफ लाइन कहा जाता है। अगर यह पुल क्षतिग्रस्त हो जाए तो शहर में केवल पुराना सीतापुर का पक्का पुल है।
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लेकिन उस पर अधिक लोड पड़ने से वहां पर जाम की स्थिति उत्पन्न हो जाएगी। भारी वाहन शहर के अंदर से होते हुए उस पुल तक नहीं पहुंच सकेंगे। ऐसे में कैंची पुल ही सरायन नदी के दोनों तरफ के लोगों को आने-जाने का साधन है। लेकिन यह पुल दशकों पुराना है। इससे यह पुल कमजोर होने लगा है।
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इस पर लगातार बढ़ते भार को देखते हुए शासन ने यहां पर दूसरा नया पुल बनवाने का निर्णय लिया है। इसके लिए कवायद शुरू हो गई है। सेतु निगम ने वन विभाग से जमीन का ब्यौरा तलब किया है। इस जानकारी के बाद पुल को अंतिम रूप से निर्माण की मंजूरी मिलेगी। इस पुल पर रोजाना एक हजार से अधिक वाहन आवागमन करते हैं।
मछली मंडी के पास बना पुल भी है क्षतिग्रस्त
शहर से गुजरी सरायन नदी पार करके ही पुराने शहर के लोग नए शहर पहुंचते हैं। इसके लिए पक्का पुल और मछली मंडी के निकट बना पुल (फटफटा पुल) से ही अधिकतर लोग गुजरते हैं। फटफटा पुल अधिक कमजोर व क्षतिग्रस्त है। दोनों तरह की दीवारें क्षतिग्रस्त हो गई हैं। इससे यहां गुजरने वाले लोग भयभीत रहते हैं। पुल संकरा होने के कारण इस पर से दो पहिया वाहनों के साथ ही ठेले भी गुजरते हैं। यह दोनों पुल काफी पुराने बने हैं। पक्का पुल के निकट दूसरा नया पुल बन गया है। जबकि फटफटा पुल की रिपेयरिंग तक नहीं की गई है।
वन विभाग से मांगा जमीन का ब्यौरा
प्रभागीय निदेशक सामाजिक वानिकी को पत्र भेजा गया है। सेतु निर्माण क्षेत्र में अगर वन विभाग की भूमि आ रही है तो इसकी जानकारी एक सप्ताह में मांगी गई है। उसके बाद प्रस्ताव बनाकर शासन को भेजा जाएगा।
- केके श्रीवास्तव, परियोजना प्रबंधक, सेतु निगम