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चार साल से सूखी पड़ी रस्योरा नहर
अमर उजाला ब्यूरो/सीतापुर
Updated Mon, 11 Jan 2016 11:38 PM IST
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रामकोट क्षेत्र में गुजरी रस्योरा नहर शोपीस बनकर रह गई है। प्रदेश सरकार ने घोषणा की है कि नहरों से किसानों को मुफ्त सिंचाई की सुविधा मिलेगी, मगर इस नहर में चार वर्ष से पानी ही नहीं आया है। इन दिनों नहर पानी से लबालब होनी चाहिए थी, मगर हालत ये है कि नहर से धूल उड़ रही है।
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झाड़ियों व घास ने नहर को ढक रखा है। परेशान किसानों ने अब नहर से आस छोड़कर बोरिंगों का सहारा लेना शुरू कर दिया है। नहर किनारे होने के बावजूद किसान बोरिंग करा रहे हैं। बरसोहिया निवासी पवन कुमार के पास आठ बीघा खेती है। वह कहते हैं कि चार वर्ष से इस नहर में पानी नहीं आया।
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सिंचाई विभाग के अफसरों से कई बार शिकायत की गई, लेकिन सुनवाई नहीं हुई। मजबूर होकर खेत में बोरिंग करानी पड़ी। अब उसी बोरिंग से सिंचाई कर रहे हैं। इस बोरिंग से आसपास के कई अन्य किसानों को भी पानी उपलब्ध करा रहे हैं।
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मधवापुर निवासी श्याम किशोर के पास पांच बीघा खेती है। श्याम किशोर तीन वर्ष से नहर में पानी आने की राह देखते रहे। इससे उनकी फसल भी प्रभावित होती रही। पहले पास के खेतों की बोरिंग से पानी लेकर फसलों की सिंचाई की। जब ये प्रतीत होने लगा कि अब इस नहर में पानी आएगा ही नहीं तो उन्होंने अपने खेत में बोरिंग करा ली।
अब उस बोरिंग से अपने खेत की सिंचाई तो करते ही हैं, वहीं आसपास के किसानों को भी पानी देते हैं। रस्योरा निवासी शिवसेवक के पास छह बीघा खेती है। वे कहते हैं कि एक तरफ मुख्यमंत्री ने किसानों को नहरों द्वारा मुफ्त पानी उपलब्ध कराने की घोषणा की। दूसरी तरफ हालत ये है कि नहरों में पानी ही नहीं आ रहा है।
शिवसेवक कहते हैं कि, उनके बड़े र्भाई रामप्रकाश ने परेशान होकर पहले ही अपने खेत में बोरिंग करा ली थी। दो वर्ष से उसी बोरिंग के पानी से सिंचाई कर रहे हैं। रस्योरा निवासी रमेश कुमार के पास दस बीघा खेती है। उनका कहना है कि, नहर के सहारे रहेंगे तो किसानी चौपट हो जाएगी।
चार वर्ष से इस नहर में पानी नहीं आया है। खेत में अनाज तो पैदा करना ही है, ऐसे में नहर से आस छोड़कर खेत में ही बोरिंग करा ली है। ये बोरिंग आसपास के किसानों के खेतों की सिंचाई के भी काम आ रही है।