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Sitapur News: रामादल धर्म यात्रा को तैयार, होगी पुष्प वर्षा

Wed, 18 Feb 2026 12:30 AM IST
लखनऊ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, सीतापुर
संवाद न्यूज एजेंसी, सीतापुर Updated Wed, 18 Feb 2026 12:30 AM IST
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Ready for Ramadal Dharma Yatra, there will be flower shower
नैमिषारण्य (सीतापुर)। मोक्षदायिनी 84 कोसी परिक्रमा का शुभारंभ बुधवार 18 फरवरी से होगा। परिक्रमार्थियों के स्वागत को लेकर नैमिषारण्य को आकर्षक ढंग से सजाया गया है। इसमें हिस्सेदारी के लिए देश-विदेश से बड़ी संख्या संत-महंत व श्रद्धालु मंगलवार से नैमिषारण्य पहुंचने लगे हैं। परिक्रमा की पूर्व संध्या पर नैमिष में हर तरफ साधु-संतों के जत्थों के बीच जय श्रीराम के जयघोष व भजन-कीर्तन की स्वर लहरियों सुनाई दे रही हैं।
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रामादल धर्मयात्रा के लिए पूरी तरह तैयार है। बुधवार की सुबह चार बजे डंका बजते ही धर्मयात्रा का शुभारंभ पुष्प वर्षा के साथ होगा। परिक्रमा अपने पहले पड़ाव कोरौना के लिए निकलेगी। इसको लेकर पुलिस व प्रशासन ने सुरक्षा की भी चाकचौबंद तैयारियां की है। नैमिष से 11 पड़ाव वाली 84 कोसी परिक्रमा की शुरुआत डंके की परंपरागत ध्वनि के साथ होगी। 15 दिनों तक करीब 252 किमी. की परिक्रमा में बड़ी संख्या संत-महंत व श्रद्धालु शामिल होंगे।
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परिक्रमार्थियों के स्वागत के लिए नैमिष धाम सजकर तैयार है। नैमिषारण्य में साधु-संतों पर पुष्प वर्षा की जाएगी। भक्ति की यह धर्म यात्रा नैमिष तीर्थ स्थित ललिता देवी चौराहे से शुरू होगी। इस दौरान मार्ग में परशुराम कूप, कुंदेरा ग्राम में द्वारिका कुंड का दर्शन करते हुए यात्रा आगे बढ़ेगी। पहले दिन रामादल प्रथम पड़ाव कोरौना पहुंचकर डेरा डालेगा।
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परिक्रमा में दिखेगी भक्ति एवं वैराग्य की झलक
परिक्रमा में भक्ति, ऐर्श्वय एवं वैराग्य की झलक दिखेगी। कई संत-महंत और परिक्रमार्थी भजन-कीर्तन करते हुए पैदल यात्रा करते हैं तो कई लग्जरी गाड़ियों, हाथी-घोड़ों, मोटरसाइकिल और पालकियों पर धर्मयात्रा करते नजर आते हैं। कोई संत आधे कपड़ों में तो कोई नागा बाबा वैराग्य को दर्शाता हुआ धर्मपथ पर चलता है।

महर्षि दधीचि ने सतयुग में पहली बार की थी परिक्रमा
सतयुग में महर्षि दधीचि ने पहली बार 84 कोसी परिक्रमा की थी। महर्षि दधीचि ने अस्थि दान से पहले सभी तीर्थों व देवों का दर्शन एवं परिक्रमा करने की शर्त रखी थी। देवराज इंद्र ने सभी तीर्थों, देवताओं को नैमिषारण्य तीर्थ क्षेत्र के अंतर्गत 84 कोसी परिधि में आने के लिए आमंत्रित किया था। जगकल्याण के लिए सभी तीर्थ, देवताओं ने नैमिषारण्य क्षेत्र की 84 कोसी परिधि में आकर अपना स्थान ग्रहण कर लिया।
दधीचि की शर्त पूरी करने के लिए पांच तीर्थों को मिलाकर पंच प्रयाग तीर्थ बनाया गया जो आज भी ललिता देवी मंदिर के पास विराजमान है। महर्षि दधीचि ने नैमिषारण्य तीर्थ में स्नान व गणेशजी का पूजन कर 84 कोसी परिक्रमा प्रारंभ की। इस 15 दिवसीय परिक्रमा में सभी तीर्थों, देवताओ का दर्शन करने के बाद दधीचि ने अपने शरीर पर दही व नमक लगाकर गायों से चटवाकर अपनी अस्थियो का दान किया। उनकी अस्थियों से वज्र का निर्माण कर इंद्र ने व्रतासुर का वध किया। मान्यता है कि आज भी 84 कोसी परिक्रमा के दौरान परिक्रमार्थियों को उन सभी तीर्थों व देवताओं के दर्शन प्राप्त होते हैं और उतना ही पुण्य मिलता है जितना उन तीर्थों में जाकर दर्शन से मिलता है।
गणपति को लड्डुओं का भोग लगाकर निकलेगा रामादल

सनातन परंपरा के अनुसार इस पावन परिक्रमा में परिक्रमार्थी सबसे पहले आदि गंगा गोमती व चक्रतीर्थ में स्नान करते हैं। इसके बाद चक्रतीर्थ प्रांगण में स्थित श्रीगणेश भगवान को लड्डुओं का भोग लगाकर मां ललिता देवी का आशीर्वाद लेते हुए पहला आश्रम महंत के परंपरागत डंके की ध्वनि के साथ प्रथम पड़ाव कोरौना के लिए यात्रा प्रस्थान करेगी।
छठी बार मिल रहा अवसर
छठी बार यह परिक्रमा करने का अवसर मिला है। मन प्रसन्न है, इस परिक्रमा का आनंद अनकहा है। एक बार फिर से पावन परिक्रमा कर देवो और तीर्थ स्थलों के दर्शन करेंगे।


संतवती मुतडेजा हरियाणा



मन प्रफुल्लित व उत्साहित
नेपाल में नैमिष तीर्थ की 84 कोसी परिक्रमा को लेकर लोगों में काफी आस्था और उत्सुकता रहती है। यह मेरी पहली परिक्रमा है। मन प्रफुल्लित व उत्साहित है। पुण्य लाभ पाने की कामना है।
- चेतराम दास, धनगढ़ी नेपाल
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