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Sitapur News: केशव ग्रीन सिटी के बिल्डर समेत सात पर एफआईआर
Sun, 18 Oct 2026 12:29 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सीतापुर
संवाद न्यूज एजेंसी, सीतापुर
Updated Sun, 18 Oct 2026 12:29 AM IST
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सीतापुर। पिरई नदी में आई बाढ़ के बाद जलमग्न हुई केशव ग्रीन सिटी कॉलोनी के मामले में प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया है। डीएम के आदेश पर कॉलोनी के बिल्डर मुकेश अग्रवाल समेत सात लोगों के खिलाफ धोखाधड़ी, षड्यंत्र कर जालसाजी करने और सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने के आरोप में एफआईआर दर्ज की गई है। आरोप है कि निचली जमीन पर कॉलोनी बसाई गई और कॉमर्शियल नक्शे के आधार पर स्वीकृत निर्माण की जगह आवासीय मकान बना दिए गए। मामले में तत्कालीन अधिकारियों की भूमिका भी जांच के दायरे में आने की बात सामने आई है।
पिरई नदी में आई बाढ़ के कारण केशव ग्रीन सिटी कॉलोनी में पानी भर गया था। इससे सैकड़ों परिवार प्रभावित हुए और कई परिवारों के सामने रहने का संकट खड़ा हो गया। जलभराव से परेशान लोगों ने 29 सितंबर को एनएच-30 जाम कर प्रदर्शन किया था। इसके बाद जिलाधिकारी ने मामले की गोपनीय जांच कराई। सूत्रों के अनुसार जांच कमेटी की 21 पन्नों की रिपोर्ट में वर्ष 2015 में लो लैंड यानी निचली जमीन पर कॉलोनी बसाए जाने का उल्लेख किया गया है।
सीओ सिटी विनय यादव ने बताया कि जेई की तहरीर के आधार पर प्राथमिकी दर्ज की है। प्रशासन की गोपनीय जांच रिपोर्ट को विवेचना में शामिल किया जाएगा। जांच के दौरान सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई होगी। वहीं, सिटी मजिस्ट्रेट मीनाक्षी पांडेय ने बताया कि एडीएम न्यायिक खालिद अंजुम की अध्यक्षता में जिलाधिकारी द्वारा गठित तीन सदस्यीय टीम ने जांच रिपोर्ट सौंपी थी। उसी रिपोर्ट के आधार पर कार्रवाई की गई है।
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पत्नी, पिता, भाई और बेटे समेत सात नामजद
जेई मार्कण्डेय कुमार मिश्रा की तहरीर के आधार पर दर्ज मुकदमे में मुकेश अग्रवाल, उनकी पत्नी श्वेता अग्रवाल, पिता प्रह्लाद अग्रवाल, भाई विकास अग्रवाल, बेटे राहुल अग्रवाल और रोली श्रीवास्तव समेत सात लोगों को नामजद किया गया है। रोली श्रीवास्तव, पूर्व में रजिस्ट्री कार्यालय में तैनात रहे बाबू अतुल श्रीवास्तव की पत्नी हैं।
कॉमर्शियल नक्शे पर आवासीय निर्माण का आरोप
शिकायत के अनुसार कॉलोनी में प्लॉटिंग के दौरान जमीन की स्थिति और अभिलेखों में कथित हेरफेर किया गया। आरोप है कि कॉमर्शियल नक्शे के आधार पर स्वीकृत निर्माण के बावजूद वहां आवासीय मकान बनाए गए। जांच रिपोर्ट में कुछ तत्कालीन अधिकारियों की कथित मिलीभगत और तत्कालीन सब रजिस्ट्रार की भूमिका का भी उल्लेख होने की बात सामने आई है। हालांकि, प्रशासन ने अभी तक रिपोर्ट में दर्ज सभी तथ्यों और जिम्मेदार अधिकारियों के संबंध में विस्तृत जानकारी सार्वजनिक नहीं की है।
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पिरई नदी में आई बाढ़ के कारण केशव ग्रीन सिटी कॉलोनी में पानी भर गया था। इससे सैकड़ों परिवार प्रभावित हुए और कई परिवारों के सामने रहने का संकट खड़ा हो गया। जलभराव से परेशान लोगों ने 29 सितंबर को एनएच-30 जाम कर प्रदर्शन किया था। इसके बाद जिलाधिकारी ने मामले की गोपनीय जांच कराई। सूत्रों के अनुसार जांच कमेटी की 21 पन्नों की रिपोर्ट में वर्ष 2015 में लो लैंड यानी निचली जमीन पर कॉलोनी बसाए जाने का उल्लेख किया गया है।
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सीओ सिटी विनय यादव ने बताया कि जेई की तहरीर के आधार पर प्राथमिकी दर्ज की है। प्रशासन की गोपनीय जांच रिपोर्ट को विवेचना में शामिल किया जाएगा। जांच के दौरान सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई होगी। वहीं, सिटी मजिस्ट्रेट मीनाक्षी पांडेय ने बताया कि एडीएम न्यायिक खालिद अंजुम की अध्यक्षता में जिलाधिकारी द्वारा गठित तीन सदस्यीय टीम ने जांच रिपोर्ट सौंपी थी। उसी रिपोर्ट के आधार पर कार्रवाई की गई है।
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पत्नी, पिता, भाई और बेटे समेत सात नामजद
जेई मार्कण्डेय कुमार मिश्रा की तहरीर के आधार पर दर्ज मुकदमे में मुकेश अग्रवाल, उनकी पत्नी श्वेता अग्रवाल, पिता प्रह्लाद अग्रवाल, भाई विकास अग्रवाल, बेटे राहुल अग्रवाल और रोली श्रीवास्तव समेत सात लोगों को नामजद किया गया है। रोली श्रीवास्तव, पूर्व में रजिस्ट्री कार्यालय में तैनात रहे बाबू अतुल श्रीवास्तव की पत्नी हैं।
कॉमर्शियल नक्शे पर आवासीय निर्माण का आरोप
शिकायत के अनुसार कॉलोनी में प्लॉटिंग के दौरान जमीन की स्थिति और अभिलेखों में कथित हेरफेर किया गया। आरोप है कि कॉमर्शियल नक्शे के आधार पर स्वीकृत निर्माण के बावजूद वहां आवासीय मकान बनाए गए। जांच रिपोर्ट में कुछ तत्कालीन अधिकारियों की कथित मिलीभगत और तत्कालीन सब रजिस्ट्रार की भूमिका का भी उल्लेख होने की बात सामने आई है। हालांकि, प्रशासन ने अभी तक रिपोर्ट में दर्ज सभी तथ्यों और जिम्मेदार अधिकारियों के संबंध में विस्तृत जानकारी सार्वजनिक नहीं की है।