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Sitapur News: अज्जेपुर झील की बदहाली देख डीएम खफा
Fri, 30 Jun 2023 11:42 PM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सीतापुर
संवाद न्यूज एजेंसी, सीतापुर
Updated Fri, 30 Jun 2023 11:42 PM IST
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तंबौर/सीतापुर। ब्लॉक रेउसा क्षेत्र की अज्जेपुर झील का डीएम व एसपी ने गुरुवार को निरीक्षण किया। यहां पूर्व में बनाए गए टावर पर पहुंचकर वहां से झील का विहंगम दृश्य देख डीएम व एसपी रोमांचित नजर आए। हालांकि देखरेख के अभाव में बदहाल हो रही झील को लेकर डीएम खफा दिखाई दिए।
रेउसा में करीब 90.33 हेक्टेयर में फैली अज्जेपुर झील के संरक्षण को लेकर अफसर संजीदा दिखे। डीएम अनुज सिंह ने कहा कि झील के सौंदर्यीकरण को लेकर प्रस्ताव शासन भेजा गया है। शासन से अगर चार करोड़ के प्रस्ताव को मंजूरी मिली तो इसका कायाकल्प कराया जाएगा। झील की बदहाली से बिफरे डीएम ने बीडीओ रेउसा को मोबाइल पर ही फटकार लगाते हुए व्यवस्था दुरुस्त कराने के निर्देश दिए।
डीएम ने बताया कि यहां 10 लाख रुपये की लागत से बैठक हॉल, वॉच टावर और टाट का निर्माण चल रहा है। डीएम ने सभी कार्य मानक के अनुरूप कराने के निर्देश दिए। इसके अलावा डीएम ने झील को ईको टूरिज्म की तर्ज पर विकसित कराने पर जोर दिया। इसमें झील तक डामरीकृत सड़क, पक्षियों के बैठने के लिए लकड़ी, स्टील और मिट्टी के स्टैंड बनवाने के निर्देश भी दिए हैं। इस मौके पर पुलिस अधीक्षक घुले सुशील चंद्रभान भी मौजूद रहे।
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अज्जेपुर झील की विशेषताएं
अज्जेपुर झील की पहचान लाल कमल का फूल और रोहू मछली से है। यहां की रोहू की मछली की मांग गैर प्रांतों तक है। स्थानीय ग्रामीणों के अनुसार कोलकाता के मछुआरे यहां रोहू मछली लेने आ चुके हैं। इस झील में कभी प्रवासी पक्षियों का कलरव गूंजता था। लेकिन बदहाली का शिकार होती चली गई झील में प्रवासी परिंदों ने भी आना छोड़ दिया।
15 साल पहले कराया गया था कायाकल्प
वर्ष 2007-08 में तत्कालीन जिलाधिकारी संजय कुमार ने इस झील का कायाकल्प कराया था। संपूर्ण झील की सफाई के साथ वाच टावर व प्रवासी पक्षियों के बैठने के लिए टीले व झुरमुट तैयार किये गए थे। इसका परिणाम यह रहा था कि कई वर्षों बाद झील में लाल कमल खिले थे। इतना ही नहीं तब प्रवासी पक्षियों ने भी झील में डेरा डाला था।
शासन से मिले मंजूरी तो संवर जाएगी झील-
वर्ष 2022 में अज्जेपुर झील के सौंदर्यीकरण को लेकर जिले से चार करोड़ के प्रस्ताव शासन भेजे गए हैं। अगर प्रस्ताव को मंजूरी मिली तो 90.33 हेक्टेयर में फैली झील के चारों ओर पीपल, पाकड़ के छायादार वृक्षों के साथ पक्के घाट, झील तक डामर सड़क, टावर का विस्तार तथा पक्षियों के बैठने व रुकने का मनमोहक वातावरण तैयार किया जाएगा।
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रेउसा में करीब 90.33 हेक्टेयर में फैली अज्जेपुर झील के संरक्षण को लेकर अफसर संजीदा दिखे। डीएम अनुज सिंह ने कहा कि झील के सौंदर्यीकरण को लेकर प्रस्ताव शासन भेजा गया है। शासन से अगर चार करोड़ के प्रस्ताव को मंजूरी मिली तो इसका कायाकल्प कराया जाएगा। झील की बदहाली से बिफरे डीएम ने बीडीओ रेउसा को मोबाइल पर ही फटकार लगाते हुए व्यवस्था दुरुस्त कराने के निर्देश दिए।
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डीएम ने बताया कि यहां 10 लाख रुपये की लागत से बैठक हॉल, वॉच टावर और टाट का निर्माण चल रहा है। डीएम ने सभी कार्य मानक के अनुरूप कराने के निर्देश दिए। इसके अलावा डीएम ने झील को ईको टूरिज्म की तर्ज पर विकसित कराने पर जोर दिया। इसमें झील तक डामरीकृत सड़क, पक्षियों के बैठने के लिए लकड़ी, स्टील और मिट्टी के स्टैंड बनवाने के निर्देश भी दिए हैं। इस मौके पर पुलिस अधीक्षक घुले सुशील चंद्रभान भी मौजूद रहे।
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अज्जेपुर झील की विशेषताएं
अज्जेपुर झील की पहचान लाल कमल का फूल और रोहू मछली से है। यहां की रोहू की मछली की मांग गैर प्रांतों तक है। स्थानीय ग्रामीणों के अनुसार कोलकाता के मछुआरे यहां रोहू मछली लेने आ चुके हैं। इस झील में कभी प्रवासी पक्षियों का कलरव गूंजता था। लेकिन बदहाली का शिकार होती चली गई झील में प्रवासी परिंदों ने भी आना छोड़ दिया।
15 साल पहले कराया गया था कायाकल्प
वर्ष 2007-08 में तत्कालीन जिलाधिकारी संजय कुमार ने इस झील का कायाकल्प कराया था। संपूर्ण झील की सफाई के साथ वाच टावर व प्रवासी पक्षियों के बैठने के लिए टीले व झुरमुट तैयार किये गए थे। इसका परिणाम यह रहा था कि कई वर्षों बाद झील में लाल कमल खिले थे। इतना ही नहीं तब प्रवासी पक्षियों ने भी झील में डेरा डाला था।
शासन से मिले मंजूरी तो संवर जाएगी झील-
वर्ष 2022 में अज्जेपुर झील के सौंदर्यीकरण को लेकर जिले से चार करोड़ के प्रस्ताव शासन भेजे गए हैं। अगर प्रस्ताव को मंजूरी मिली तो 90.33 हेक्टेयर में फैली झील के चारों ओर पीपल, पाकड़ के छायादार वृक्षों के साथ पक्के घाट, झील तक डामर सड़क, टावर का विस्तार तथा पक्षियों के बैठने व रुकने का मनमोहक वातावरण तैयार किया जाएगा।