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निजी वाहनों में भूसे की तरह भर रहे बच्चे

Wed, 06 Jul 2022 01:09 AM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Wed, 06 Jul 2022 01:09 AM IST
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Children filling private vehicles like straw
मोहल्ला सिविल लाइन में एक निजी वाहन में बैठते स्कूली बच्चे। - संवाद - फोटो : SITAPUR
सीतापुर। स्कूल खुलते ही मासूमों की जिंदगी के साथ खिलवाड़ शुरू हो गया है। स्कूली बच्चे प्राइवेट वाहनों से ढोए जा रहे हैं। सात सीट वाले वाहन में 15 से 20 बच्चों को भूसे की तरह ठूंसकर ले जाया जा रहा है। कई वाहन अनफिट होने के बावजूद सड़कों पर दौड़ रहे है। इन वाहनों पर कार्रवाई न होने से बच्चों की जिंदगी को खतरे में डाला जा रहा है।
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लगातार चेतावनी देने के बाद भी फिटनेस न कराने के कारण परिवहन विभाग ने 233 स्कूली वाहनों के पंजीयन को निरस्त कर दिया था। विभाग ने चेतावनी दी थी कि अब अगर ऐसे वाहन चलते पाए गए तो स्कूल प्रबंधन पर केस दर्ज करने की कार्रवाई की जाएगी। इसके बाद भी स्कूल प्रबंधक मनमानी कर रहे हैं।
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विद्यालय प्रबंधक ने नया विकल्प तलाशते हुए निजी वाहनों से बच्चों को लाने और ले जाने का सिलसिला शुरू कर दिया है। इन वाहनों में सुरक्षा के कोई मानक नहीं है। न आग बुझाने के यंत्र हैं और न ही मेडिकल किट, खिड़कियों पर भी किसी तरह का कोई अवरोध इन वाहनों पर नहीं है।
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अमर उजाला टीम ने शहर में चल रहे इन वाहनों की रियलटी परखी। इन वाहनों के ऊपर बैग रखे हुए थे। तेज धूप में बच्चे पसीने से तरबतर होने के बावजूद सटकर बैठे थे। इस विकल्प से स्कूल प्रबंधकों को काफी फायदा होता दिख रहा है। न तो मानकों का पालन करना है और न ही फिटनेस कराने का झंझट। प्रबंधक अभिभावकों से मोटी रकम वसूल करते हैं।
फिर मासूमों के साथ खिलवाड़ करते है। जब कभी ऐसे वाहनों से कोई हादसा हो जाए तो वह यह कहकर बच सकते हैं कि वाहन उनके विद्यालय के नाम पर पंजीकृत नहीं है। यह सब सड़कों पर रोजाना हो रहा है फिर भी जिम्मेदार अफसर अनजान बने हुए हैं।
अभिवावक भी रखें ध्यान
अभिभावकों को यह ध्यान रखना चाहिए कि उनका बच्चा किस वाहन से आ-जा रहा है। ड्राइवर के पास लाइसेंस है या नहीं। वाहन का रंग पीला है या नहीं? उसमें सुरक्षा के इंतजाम हैं कि नहीं? अगर अभिभावक पैसे दे रहे हैं तो उनकी भी जिम्मेदारी बनती है कि वह इस बात की पुष्टि करें कि उनके बच्चे के जीवन के साथ खिलवाड़ न हो रहा हो।

सुप्रीम कोर्ट के ये हैं निर्देश
स्कूली वाहनों में एलपीजी गैस का उपयोग न हो।
स्कूली वाहन ओवरलोड न हो।
स्कूली वाहनों का रंग पीला हो, ताकि दूर से पता चले कि ये स्कूली वाहन हैं।
स्कूली वाहनों के पीछे स्कूल का नाम व नंबर लिखा होना चाहिए।
होगी सख्त कार्रवाई
निजी वाहन स्वामी को यह अधिकार नहीं है कि वह स्कूली बच्चों को लेकर जाएं। अगर वह स्कूली बच्चों को लेकर जाना चाहते हैं तो उनका वाहन व्यावसायिक की श्रेणी में होना जरूरी है। इसके बाद स्कूली वाहन की सारी गाइलाइन का पालन करना जरूरी है। निजी वाहन अगर स्कूली बच्चों को ले जाते पाए जाएंगे तो उन पर कार्रवाई की जाएगी।
- माला बाजपेई, एआरटीओ प्रशासन
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