{"_id":"5cf56491bdec22077b459a6f","slug":"15595859337-sitapur-news171","type":"story","status":"publish","title_hn":"सोमवती अमावस्या पर श्रद्धालुओं ने लगाई डुबकी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
सोमवती अमावस्या पर श्रद्धालुओं ने लगाई डुबकी
विज्ञापन
नैमिषारण्य (सीतापुर)। जेठ माह की वट सावित्री अमावस्या के दिन सोमवती अमावस्या के संयोग पर नैमिषारण्य में श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ा।
सोमवार को चक्रतीर्थ समेत गोमती नदी के तट पर श्रद्धालुओं ने स्नान किया। इस मौके पर भक्तों ने अन्न और खरबूजा समेत विभिन्न फल चढ़ाए।
ललिता देवी मंदिर समेत अन्य मंदिर व मठों में जाकर पूजन अर्चन किया। पुरोहितों के मुताबिक करीब दो लाख श्रद्धालुओं के डुबकी लगाई।
वैसे तो हर अमावस्या पर नैमिषारण्य में श्रद्धालुओं का हुजूम उमड़ता है। पर सोमवार को सोमवती अमावस्या व वट सावित्री पूजन पड़ने से यह दिन बेहद अद्भुत था।
इसे लेकर रविवार शाम से ही श्रद्धालुओं ने रेल व सड़क मार्गों से नैमिषारण्य पहुंचने लगे थे। रात को वहां का नजारा देखने लायक था।
सोमवार अलसुबह चार बजे से ही चक्रतीर्थ व गोमती नदी के तट पर श्रद्धालुओं के स्नान करने का दौर शुरू हो गया था। यह सिलसिला देर शाम तक चलता रहा।
इस दौरान श्रद्धालुओं ने ब्राह्मणों एवं कन्याओं को दान देकर पुण्य लाभ अर्जित किया। श्रद्धालुओं ने तीर्थ के हनुमान गढ़ी, सूत गद्दी मंदिर, कालीपीठ, देवपुरी मंदिर, साईं धाम, व्यास गद्दी, त्रिशक्ति धाम समेत विभिन्न मंदिरों में माथा टेका।
श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखकर अमावस्या मेले में दूर दराज से आए दुकानदारों के चेहरे भी प्रसन्न नजर आ रहे थे। मेले में मुख्य रूप से कालीपीठ मंदिर व चौक, बाला जी मंदिर के पास, शिव मंदिर तुरंत नाथ के पास शर्बत बांटा गया। ललिता देवी मंदिर के पास शीतल जल व चक्रतीर्थ पर शर्बत वितरित किया गया।
मिट्टी के घड़ा व पंखा किया दान
श्रद्धालुओं ने पुरानी परंपरा निभाते हुए घट पर पुरोहितों को मिट्टी के घड़े, हाथ से बने पंखे तथा चीनी का दान किया। ऐसी मान्यता है कि जेठ माह में इन वस्तुओं का दान करने से पूर्वजों को शीतलता प्राप्त होती है।
विज्ञापन
विज्ञापन
सोमवार को चक्रतीर्थ समेत गोमती नदी के तट पर श्रद्धालुओं ने स्नान किया। इस मौके पर भक्तों ने अन्न और खरबूजा समेत विभिन्न फल चढ़ाए।
ललिता देवी मंदिर समेत अन्य मंदिर व मठों में जाकर पूजन अर्चन किया। पुरोहितों के मुताबिक करीब दो लाख श्रद्धालुओं के डुबकी लगाई।
वैसे तो हर अमावस्या पर नैमिषारण्य में श्रद्धालुओं का हुजूम उमड़ता है। पर सोमवार को सोमवती अमावस्या व वट सावित्री पूजन पड़ने से यह दिन बेहद अद्भुत था।
इसे लेकर रविवार शाम से ही श्रद्धालुओं ने रेल व सड़क मार्गों से नैमिषारण्य पहुंचने लगे थे। रात को वहां का नजारा देखने लायक था।
सोमवार अलसुबह चार बजे से ही चक्रतीर्थ व गोमती नदी के तट पर श्रद्धालुओं के स्नान करने का दौर शुरू हो गया था। यह सिलसिला देर शाम तक चलता रहा।
इस दौरान श्रद्धालुओं ने ब्राह्मणों एवं कन्याओं को दान देकर पुण्य लाभ अर्जित किया। श्रद्धालुओं ने तीर्थ के हनुमान गढ़ी, सूत गद्दी मंदिर, कालीपीठ, देवपुरी मंदिर, साईं धाम, व्यास गद्दी, त्रिशक्ति धाम समेत विभिन्न मंदिरों में माथा टेका।
श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखकर अमावस्या मेले में दूर दराज से आए दुकानदारों के चेहरे भी प्रसन्न नजर आ रहे थे। मेले में मुख्य रूप से कालीपीठ मंदिर व चौक, बाला जी मंदिर के पास, शिव मंदिर तुरंत नाथ के पास शर्बत बांटा गया। ललिता देवी मंदिर के पास शीतल जल व चक्रतीर्थ पर शर्बत वितरित किया गया।
विज्ञापन
मिट्टी के घड़ा व पंखा किया दान
श्रद्धालुओं ने पुरानी परंपरा निभाते हुए घट पर पुरोहितों को मिट्टी के घड़े, हाथ से बने पंखे तथा चीनी का दान किया। ऐसी मान्यता है कि जेठ माह में इन वस्तुओं का दान करने से पूर्वजों को शीतलता प्राप्त होती है।
विज्ञापन