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सत्य को छुपाया नहीं जा सकता : निश्चलानंद सरस्वती
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संबोधित करते शंकराचार्य निश्चलानंद और उपस्थित श्रद्धालु।
- फोटो : SIDDHARTHNAGAR
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सत्य को छुपाया नहीं जा सकता : निश्चलानंद सरस्वती
सिद्धार्थनगर। जगन्नाथ पुरी के गोवर्धन मठ पुरी के पीठाधीश्वर स्वामी शंकराचार्य निश्चलानंद सरस्वती ने कहा कि सनातन परंपरा में सभी को फल प्राप्ति होती है, किंतु शास्त्र सम्मत विधियां अनिवार्य हैं। उन्होंने कहा कि सत्य को छुपाया नहीं जा सकता। असत्य का साथ देने वाले एक दिन स्वयं पहचाने जाएंगे।
वह अपने प्रवास के दूसरे दिन रविवार को सनातनी धर्म के अनुयायियों की जिज्ञासाओं का समाधान करते कर रहे थे। वह नगर के चिकित्सक डॉ. चंद्रेश उपाध्याय के वहां आए थे। उन्होंने कहा कि शास्त्रों की ओर से हर कार्य के लिए अलग-अलग लोगों को आरक्षित किया गया है। सभी आपस में बंधु समान हैं। शास्त्र सम्मत नियमों का पालन कर के प्रत्येक व्यक्ति फल प्राप्ति कर सकता है।
उन्होंने कहा कि आधुनिकता में अपनी वैदिक परंपरा को न भूलें। शास्त्रों का अध्ययन करें। तभी जान पाएंगे कि किसी भी व्यक्ति विशेष के लिए सनातन नियम नहीं हैं, बल्कि इनमें विश्व कल्याण की भावना है। एक प्रश्न के उत्तर में उन्होंने कहा कि धर्म का राजनीतीकरण पूर्णतया अनुचित है।
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‘सौभाग्य है शंकराचार्य का आगमन’
स्वामी निश्चलानंद सरस्वती वैदिक गणित के विश्व में ख्यातिप्राप्त विद्वान हैं। वैदिक गणित सहित विभिन्न विषयों पर उनकी 200 से अधिक पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं। विश्व की मानी हुई संस्थाओं का मार्गदर्शन उन्होंने समय-समय पर किया है और इनमें से कई संस्थाओं में उनके व्याख्यान हुए हैं। सिद्धार्थनगर के बाद उनका व्याख्यान भैरहवां, नेपाल में होना है।
कार्यक्रम के आयोजक और यजमान डॉ. चंद्रेश उपाध्याय ने कहा कि यह हमारा और जिले के सभी नागरिकों का सौभाग्य है कि शंकराचार्य स्वामी निश्चलानंद के चरण हमारे जनपद में पड़े। दो दिनों के इस कार्यक्रम में जिले और अन्य जनपदों के भी भक्तों ने इस कार्यक्रम में सहभागिता की। विधायक चौधरी अमर सिंह, युवक कांग्रेस जिलाध्यक्ष डॉ. अरविंद शुक्ल, कैलाश पंक्षी सहित काफी संख्या में लोग मौजूद थे।
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सिद्धार्थनगर। जगन्नाथ पुरी के गोवर्धन मठ पुरी के पीठाधीश्वर स्वामी शंकराचार्य निश्चलानंद सरस्वती ने कहा कि सनातन परंपरा में सभी को फल प्राप्ति होती है, किंतु शास्त्र सम्मत विधियां अनिवार्य हैं। उन्होंने कहा कि सत्य को छुपाया नहीं जा सकता। असत्य का साथ देने वाले एक दिन स्वयं पहचाने जाएंगे।
वह अपने प्रवास के दूसरे दिन रविवार को सनातनी धर्म के अनुयायियों की जिज्ञासाओं का समाधान करते कर रहे थे। वह नगर के चिकित्सक डॉ. चंद्रेश उपाध्याय के वहां आए थे। उन्होंने कहा कि शास्त्रों की ओर से हर कार्य के लिए अलग-अलग लोगों को आरक्षित किया गया है। सभी आपस में बंधु समान हैं। शास्त्र सम्मत नियमों का पालन कर के प्रत्येक व्यक्ति फल प्राप्ति कर सकता है।
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उन्होंने कहा कि आधुनिकता में अपनी वैदिक परंपरा को न भूलें। शास्त्रों का अध्ययन करें। तभी जान पाएंगे कि किसी भी व्यक्ति विशेष के लिए सनातन नियम नहीं हैं, बल्कि इनमें विश्व कल्याण की भावना है। एक प्रश्न के उत्तर में उन्होंने कहा कि धर्म का राजनीतीकरण पूर्णतया अनुचित है।
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‘सौभाग्य है शंकराचार्य का आगमन’
स्वामी निश्चलानंद सरस्वती वैदिक गणित के विश्व में ख्यातिप्राप्त विद्वान हैं। वैदिक गणित सहित विभिन्न विषयों पर उनकी 200 से अधिक पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं। विश्व की मानी हुई संस्थाओं का मार्गदर्शन उन्होंने समय-समय पर किया है और इनमें से कई संस्थाओं में उनके व्याख्यान हुए हैं। सिद्धार्थनगर के बाद उनका व्याख्यान भैरहवां, नेपाल में होना है।
कार्यक्रम के आयोजक और यजमान डॉ. चंद्रेश उपाध्याय ने कहा कि यह हमारा और जिले के सभी नागरिकों का सौभाग्य है कि शंकराचार्य स्वामी निश्चलानंद के चरण हमारे जनपद में पड़े। दो दिनों के इस कार्यक्रम में जिले और अन्य जनपदों के भी भक्तों ने इस कार्यक्रम में सहभागिता की। विधायक चौधरी अमर सिंह, युवक कांग्रेस जिलाध्यक्ष डॉ. अरविंद शुक्ल, कैलाश पंक्षी सहित काफी संख्या में लोग मौजूद थे।