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Siddharthnagar News: दर्द हो रहा है आज, तो अल्ट्रासाउंड होगा 12 दिन बाद
Wed, 01 Mar 2023 12:27 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
Updated Wed, 01 Mar 2023 12:27 AM IST
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माधव प्रसाद त्रिपाठी मेडिकल कॉलेज में अल्ट्रासाउंड जांच के लिए खड़े मरीज।
सिद्धार्थनगर। माधव प्रसाद त्रिपाठी मेडिकल कॉलेज में शुक्रवार को मधुबेनिया की किरन की को पेट दर्द के बाद अल्ट्रासाउंड जांच नहीं हो सकी। उसने बताया कि स्त्री व प्रसूति रोग विभाग में डॉक्टर को दिखाया तो डॉक्टर ने जांच कराकर रिपोर्ट लेकर आने की सलाह दी। जब वह अल्ट्रासाउंड का रजिस्ट्रेशन कराने पहुंची तो 14 मार्च को जांच की तिथि मिली है। यह तो मात्र एक उदाहरण है। इस प्रकार हर दिन 60 से 70 मरीज सरकारी अस्पताल से मायूस लौट रहे हैं।
मेडिकल कॉलेज से संबद्ध संयुक्त जिला अस्पताल के अल्ट्रासाउंड कक्ष में प्रतिदिन 35 मरीजों का ही नंबर लगाया जा रह है ताकि रिपोर्ट स्पष्ट प्राप्त हो और रेडियोलॉजिस्ट की सेहत को भी नुकसान न पहुंचे। हर दिन अस्पताल में 100 से अधिक मरीजों को अल्ट्रासाउंड जांच की सलाह दी जा रही है। ऐसी स्थिति में 60 से 70 मरीजों को निजी जांच सेंटर में जांच कराने की मजबूरी है। जोगिया क्षेत्र से आई सादिका ने बताया कि निजी सेंटर में अल्ट्रासाउंड कराने में उन्हें 650 रुपये शुल्क जमा करने पड़े। ओपीडी में प्रतिदिन करीब 1200 मरीजों का पंजीयन हो रहा है।
स्त्री एवं प्रसूति रोग विभाग में हर दिन 100 से 130 मरीज पहुंचते हैं, जिनमें 35 से 45 महिलाओं को अल्ट्रासाउंड जांच लिखी जाती है। इनके अलावा मेडिसिन ओपीडी में 20, जनरल सर्जरी में करीब 20, शिशु रोग विभाग में 10 और इतनी ही संख्या में ईएनटी में अल्ट्रासाउंड जांच लिखी जाती है।
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इस कारण कम हो रही जांच
जिला अस्पताल के अल्ट्रासाउंड मशीन का प्रोब खराब हो गया है। शरीर के अंदर के अंगों को देखने के लिए अधिक समय और कई बार नजर गड़ाकर देखने के बाद स्थिति स्पष्ट हो पाती है। प्रोब बदलने की कोशिश अधूरी रह गई, जबकि नई मशीन भी नहीं खरीदी जा सकी।
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वर्जन--
अल्ट्रासाउंड की रिपोर्ट स्पष्ट निकले, इसलिए जांच की संख्या 35 निर्धारित की गई है। अल्ट्रासाउंड मशीन खरीदने के लिए बजट की मांग की गई है। बजट प्राप्त होते ही नई मशीन खरीदी जाएगी। -डॉ. एके झा, प्रभारी प्राचार्य, मेडिकल कॉलेज
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मेडिकल कॉलेज से संबद्ध संयुक्त जिला अस्पताल के अल्ट्रासाउंड कक्ष में प्रतिदिन 35 मरीजों का ही नंबर लगाया जा रह है ताकि रिपोर्ट स्पष्ट प्राप्त हो और रेडियोलॉजिस्ट की सेहत को भी नुकसान न पहुंचे। हर दिन अस्पताल में 100 से अधिक मरीजों को अल्ट्रासाउंड जांच की सलाह दी जा रही है। ऐसी स्थिति में 60 से 70 मरीजों को निजी जांच सेंटर में जांच कराने की मजबूरी है। जोगिया क्षेत्र से आई सादिका ने बताया कि निजी सेंटर में अल्ट्रासाउंड कराने में उन्हें 650 रुपये शुल्क जमा करने पड़े। ओपीडी में प्रतिदिन करीब 1200 मरीजों का पंजीयन हो रहा है।
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स्त्री एवं प्रसूति रोग विभाग में हर दिन 100 से 130 मरीज पहुंचते हैं, जिनमें 35 से 45 महिलाओं को अल्ट्रासाउंड जांच लिखी जाती है। इनके अलावा मेडिसिन ओपीडी में 20, जनरल सर्जरी में करीब 20, शिशु रोग विभाग में 10 और इतनी ही संख्या में ईएनटी में अल्ट्रासाउंड जांच लिखी जाती है।
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इस कारण कम हो रही जांच
जिला अस्पताल के अल्ट्रासाउंड मशीन का प्रोब खराब हो गया है। शरीर के अंदर के अंगों को देखने के लिए अधिक समय और कई बार नजर गड़ाकर देखने के बाद स्थिति स्पष्ट हो पाती है। प्रोब बदलने की कोशिश अधूरी रह गई, जबकि नई मशीन भी नहीं खरीदी जा सकी।
वर्जन
अल्ट्रासाउंड की रिपोर्ट स्पष्ट निकले, इसलिए जांच की संख्या 35 निर्धारित की गई है। अल्ट्रासाउंड मशीन खरीदने के लिए बजट की मांग की गई है। बजट प्राप्त होते ही नई मशीन खरीदी जाएगी। -डॉ. एके झा, प्रभारी प्राचार्य, मेडिकल कॉलेज