{"_id":"62cb125129e5d84aad0e5b14","slug":"the-gap-of-bansi-dumariaganj-dam-will-be-filled-four-regulators-will-be-formed-siddharthnagar-news-gkp44325318","type":"story","status":"publish","title_hn":"भरे जाएंगे बांसी-डुमरियागंज बांध के गैप, बनेंगे चार रेगुलेटर","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
भरे जाएंगे बांसी-डुमरियागंज बांध के गैप, बनेंगे चार रेगुलेटर
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
भरे जाएंगे बांसी-डुमरियागंज बांध के गैप, बनेंगे चार रेगुलेटर
सिद्धार्थनगर। निर्माण के समय से ही भूमि विवाद के कारण बांसी-डुमरियागंज बांध में पड़े गैप के भरने के 20 करोड़ रुपये के प्रस्ताव की स्वीकृति शासन से मिल गई है। इस धनराशि से बांध के 5.5 किमी लंबे छह गैप को भरने के लिए किसानों को मुआवजा देने के साथ ही चार रेगुलेटर का निर्माण भी किया जाएगा। सिंचाई निर्माण खंड के इस प्रस्ताव को स्वीकृत करते हुए शासन से 10 लाख रुपये आवंटित कर दिए गए हैं।
बरसात में राप्ती की उफान से आसपास के गांवों को बाढ़ की चपेट में आने से बचाने के लिए नदी के बाएं किनारे सिंचाई निर्माण खंड की तरफ से 30 वर्ष पूर्व बांध का निर्माण हुआ था। 39.500 किमी लंबे बांसी-डुमरियागंज बांध के बीच छह स्थानों पर किसानों ने भूमि का मुआवजा दिए जाने एवं रेगुलेटर के निर्माण की मांग करते हुए बांध निर्माण रोक दिया था। भूमि विवाद और सिंचाई विभाग की इस परियोजना की लागत में बढ़ोतरी होने से शासन से स्वीकृति नहीं मिलने के कारण बांध के गैप नहीं भरे जा सके।
बाढ़ के समय बांध में गैप होने के कारण पिछले 30 वर्ष से आसपास के कई गांव की फसल एवं रास्ते जलमग्न हो जाते थे। उससे किसानों को आर्थिक क्षति होने के साथ ही आवागमन में भी दिक्कत का सामना करना पड़ता था। सिंचाई निर्माण खंड की तरफ से भेजे गए प्रस्ताव के स्वीकृत होने के बाद किसानों को बांध निर्माण में अधिग्रहीत भूमि का मुआवजा देकर गैप को भरा जाएगा। सिंचाई निर्माण खंड के अधिशासी अभियंता आरके सिंह का कहना है कि परियोजना स्वीकृति हो गई है, जल्द ही किसानों को मुआवजे की धनराशि का भुगतान करते हुए बांध के गैप भरने और रेगुलेटर निर्माण का काम पूरा किया जाएगा।
विज्ञापन
रेगुलेटर निर्माण से समस्या से मिलेगी निजात
बांध निर्माण रोकने के दौरान स्थानीय किसानों का कहना था कि बांध नहीं बनने से पहले अगर बाढ़ नहीं आती थी तो बारिश का पानी नदी में चला जाता था। बांध में रेगुलेटर नहीं बनेगा तो बरसात के समय जलभराव होने के कारण आसपास के कई गांवों के किसानों की फसल नष्ट हो जाएगी। रेगुलेटर के निर्माण से बारिश का पानी अधिक होने पर नदी की तरफ निकल जाएगा, जबकि बाढ़ का पानी अधिक होने पर गांव एवं फसल सुरक्षित रहेंगी। सिंचाई विभाग बारिश के पानी की निकासी के लिए चार जरूरी स्थानों पर रेगुलेटर निर्माण कराएगा।
भरे गए फत्तेपुर-खजुरडाड़ बांध के गैप
सिंचाई निर्माण खंड ने 10 किमी लंबे फत्तेपुर-खजुरडाड़-अजगरा बांध के कई वर्ष पुराने गैप को 1.71 करोड़ रुपये की लागत से भर दिया है। यहां भी भूमि विवाद के कारण बांध में गैप छूटा हुआ था, जिसे किसानों के मुआवजे की धनराशि देकर समाप्त किया गया और बांध का गैप भरा गया। सिंचाई निर्माण खंड के अधिशासी अभियंता आरके सिंह का कहना है कि अन्य बांधों के गैप भरने संबंधी भेजे गए प्रस्ताव के शासन से स्वीकृत मिलने के बाद जल्द ही कार्य करा दिए जाएंगे, जिससे स्थानीय लोगों को बाढ़ से राहत मिलेगी।
विज्ञापन
सिद्धार्थनगर। निर्माण के समय से ही भूमि विवाद के कारण बांसी-डुमरियागंज बांध में पड़े गैप के भरने के 20 करोड़ रुपये के प्रस्ताव की स्वीकृति शासन से मिल गई है। इस धनराशि से बांध के 5.5 किमी लंबे छह गैप को भरने के लिए किसानों को मुआवजा देने के साथ ही चार रेगुलेटर का निर्माण भी किया जाएगा। सिंचाई निर्माण खंड के इस प्रस्ताव को स्वीकृत करते हुए शासन से 10 लाख रुपये आवंटित कर दिए गए हैं।
बरसात में राप्ती की उफान से आसपास के गांवों को बाढ़ की चपेट में आने से बचाने के लिए नदी के बाएं किनारे सिंचाई निर्माण खंड की तरफ से 30 वर्ष पूर्व बांध का निर्माण हुआ था। 39.500 किमी लंबे बांसी-डुमरियागंज बांध के बीच छह स्थानों पर किसानों ने भूमि का मुआवजा दिए जाने एवं रेगुलेटर के निर्माण की मांग करते हुए बांध निर्माण रोक दिया था। भूमि विवाद और सिंचाई विभाग की इस परियोजना की लागत में बढ़ोतरी होने से शासन से स्वीकृति नहीं मिलने के कारण बांध के गैप नहीं भरे जा सके।
विज्ञापन
बाढ़ के समय बांध में गैप होने के कारण पिछले 30 वर्ष से आसपास के कई गांव की फसल एवं रास्ते जलमग्न हो जाते थे। उससे किसानों को आर्थिक क्षति होने के साथ ही आवागमन में भी दिक्कत का सामना करना पड़ता था। सिंचाई निर्माण खंड की तरफ से भेजे गए प्रस्ताव के स्वीकृत होने के बाद किसानों को बांध निर्माण में अधिग्रहीत भूमि का मुआवजा देकर गैप को भरा जाएगा। सिंचाई निर्माण खंड के अधिशासी अभियंता आरके सिंह का कहना है कि परियोजना स्वीकृति हो गई है, जल्द ही किसानों को मुआवजे की धनराशि का भुगतान करते हुए बांध के गैप भरने और रेगुलेटर निर्माण का काम पूरा किया जाएगा।
विज्ञापन
रेगुलेटर निर्माण से समस्या से मिलेगी निजात
बांध निर्माण रोकने के दौरान स्थानीय किसानों का कहना था कि बांध नहीं बनने से पहले अगर बाढ़ नहीं आती थी तो बारिश का पानी नदी में चला जाता था। बांध में रेगुलेटर नहीं बनेगा तो बरसात के समय जलभराव होने के कारण आसपास के कई गांवों के किसानों की फसल नष्ट हो जाएगी। रेगुलेटर के निर्माण से बारिश का पानी अधिक होने पर नदी की तरफ निकल जाएगा, जबकि बाढ़ का पानी अधिक होने पर गांव एवं फसल सुरक्षित रहेंगी। सिंचाई विभाग बारिश के पानी की निकासी के लिए चार जरूरी स्थानों पर रेगुलेटर निर्माण कराएगा।
भरे गए फत्तेपुर-खजुरडाड़ बांध के गैप
सिंचाई निर्माण खंड ने 10 किमी लंबे फत्तेपुर-खजुरडाड़-अजगरा बांध के कई वर्ष पुराने गैप को 1.71 करोड़ रुपये की लागत से भर दिया है। यहां भी भूमि विवाद के कारण बांध में गैप छूटा हुआ था, जिसे किसानों के मुआवजे की धनराशि देकर समाप्त किया गया और बांध का गैप भरा गया। सिंचाई निर्माण खंड के अधिशासी अभियंता आरके सिंह का कहना है कि अन्य बांधों के गैप भरने संबंधी भेजे गए प्रस्ताव के शासन से स्वीकृत मिलने के बाद जल्द ही कार्य करा दिए जाएंगे, जिससे स्थानीय लोगों को बाढ़ से राहत मिलेगी।