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Siddharthnagar News: 56 करोड़ से बनेगा एसटीपी, स्वच्छ होंगे प्राकृतिक जलस्रोत
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संवाद न्यूज एजेंसी
सिद्धार्थनगर। शहर में 56 करोड़ की लागत से 7.5 एमएलडी क्षमता के एसटीपी निर्माण की नगर विकास विभाग से स्वीकृति मिल गई है।
साथ ही नगर पालिका की तरफ से जमुआर नाले के पास छह हजार वर्ग मीटर भूमि उपलब्ध कराई गई है। इसका सर्वे भी पूरा हो गया है। अब स्टीमेट के सापेक्ष धन आवंटन के बाद कार्यदायी संस्था जल निगम शहरी की तरफ से सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) निर्माण कार्य शुरू हो जाएगा।
इसके निर्माण से जमुआर नाले समेत शहर के पोखरों में गिरने वाले नाले-नालियों के गंदे पानी से छुटकारा मिल जाएगा। इससे इन प्राकृतिक जलस्रोतों के शुद्ध पानी का लोग उपयोग कर सकेंगे। हालांकि सर्वे के बाद नगर विकास विभाग को भेजी गई रिपोर्ट के आधार पर इससे अधिक क्षमता के एसटीपी के निर्माण की स्वीकृति मिलने की संभावना बढ़ गई है।
शहर के बीच से निकलने वाले प्राकृतिक जमुआर नाले का पानी वर्तमान में शहर के कई मोहल्ले में स्थित लोगों के घर एवं दुकान से निकलने वाले गंदे पानी के कारण दूषित हो चुका है। वहीं शहर में स्थित 60 से अधिक पोखरे भी सीवेज के कारण गंदगी से पटे पड़े हैं, जिससे इन प्राकृतिक जलस्रोतों का पानी उपयोग नहीं किया जा सकता है।
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जल निगम शहरी की तरफ से नगर पालिका सिद्धार्थनगर में 7.5 एमएलडी (मिलियन लीटर पर डे) क्षमता की एसटीपी स्थापित करने के लिए नमामि गंगे और नगर विकास विभाग को कार्ययोजना भेजी गई थी। इसके बाद नगर विकास विभाग की तरफ से इसके निर्माण की स्वीकृति मिल गई है।
इसके तहत शहर के प्रत्येक मोहल्ले में सर्वे में शहर के नालों से निकलने वाले सीवेज की भी रिपोर्ट भेजी गयी थी। इसके बाद शहर में अब अधिक एलएमडी क्षमता के एसटीपी निर्माण की स्वीकृति मिलने की संभावना बढ़ गयी है। शहर निवासी केदार जायसवाल और पूर्व सभासद अमर प्रसाद बताते है कि 15 वर्ष पूर्व तक जमुआर नाले और पोखरों के पानी उपयोगी हुआ करता था।
स्थानीय लोग व बच्चे इन जलस्रोतों में स्वयं स्नान तक करते थे, जो अब गंदगी से पटे होने से अनुपयोगी हो चुके है।
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सिद्धार्थनगर। शहर में 56 करोड़ की लागत से 7.5 एमएलडी क्षमता के एसटीपी निर्माण की नगर विकास विभाग से स्वीकृति मिल गई है।
साथ ही नगर पालिका की तरफ से जमुआर नाले के पास छह हजार वर्ग मीटर भूमि उपलब्ध कराई गई है। इसका सर्वे भी पूरा हो गया है। अब स्टीमेट के सापेक्ष धन आवंटन के बाद कार्यदायी संस्था जल निगम शहरी की तरफ से सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) निर्माण कार्य शुरू हो जाएगा।
इसके निर्माण से जमुआर नाले समेत शहर के पोखरों में गिरने वाले नाले-नालियों के गंदे पानी से छुटकारा मिल जाएगा। इससे इन प्राकृतिक जलस्रोतों के शुद्ध पानी का लोग उपयोग कर सकेंगे। हालांकि सर्वे के बाद नगर विकास विभाग को भेजी गई रिपोर्ट के आधार पर इससे अधिक क्षमता के एसटीपी के निर्माण की स्वीकृति मिलने की संभावना बढ़ गई है।
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शहर के बीच से निकलने वाले प्राकृतिक जमुआर नाले का पानी वर्तमान में शहर के कई मोहल्ले में स्थित लोगों के घर एवं दुकान से निकलने वाले गंदे पानी के कारण दूषित हो चुका है। वहीं शहर में स्थित 60 से अधिक पोखरे भी सीवेज के कारण गंदगी से पटे पड़े हैं, जिससे इन प्राकृतिक जलस्रोतों का पानी उपयोग नहीं किया जा सकता है।
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जल निगम शहरी की तरफ से नगर पालिका सिद्धार्थनगर में 7.5 एमएलडी (मिलियन लीटर पर डे) क्षमता की एसटीपी स्थापित करने के लिए नमामि गंगे और नगर विकास विभाग को कार्ययोजना भेजी गई थी। इसके बाद नगर विकास विभाग की तरफ से इसके निर्माण की स्वीकृति मिल गई है।
इसके तहत शहर के प्रत्येक मोहल्ले में सर्वे में शहर के नालों से निकलने वाले सीवेज की भी रिपोर्ट भेजी गयी थी। इसके बाद शहर में अब अधिक एलएमडी क्षमता के एसटीपी निर्माण की स्वीकृति मिलने की संभावना बढ़ गयी है। शहर निवासी केदार जायसवाल और पूर्व सभासद अमर प्रसाद बताते है कि 15 वर्ष पूर्व तक जमुआर नाले और पोखरों के पानी उपयोगी हुआ करता था।
स्थानीय लोग व बच्चे इन जलस्रोतों में स्वयं स्नान तक करते थे, जो अब गंदगी से पटे होने से अनुपयोगी हो चुके है।