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जातिगत गणना से होता है समाज का विभाजन : पंकज चौधरी
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रेस्ट हाउस में पत्रकारों से बात करते केंद्रीय वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी।
- फोटो : SIDDHARTHNAGAR
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जातिगत गणना से होता है समाज का विभाजन : पंकज चौधरी
सिद्धार्थनगर। केंद्रीय वित्त राज्यमंत्री पंकज चौधरी ने कहा कि जाति आधारित गणना से समाज का विभाजन होता है। हालांकि इस पर विचार चल रहा है। राजनीतिक दलों की मांग भी है। इस मामले में पार्टी का शीर्ष नेतृत्व निर्णय करना है। आजादी के पहले 1931 में जाति आधारित गणना की व्यवस्था समाप्त कर दी गई थी।
जन आशीर्वाद यात्रा में आए केंद्रीय मंत्री बुधवार को पीडब्ल्यूडी के रेस्ट हाउस में पत्रकारों से बातचीत कर रहे थे। संसद में पास हुए आरक्षण बिल के बारे में उन्होंने दोहराया कि भाजपा की पिछड़ी जातियों की हितैषी है। उन्होंने कहा कि आरक्षण बिल से पिछड़ों का आरक्षण कम नहीं होगा। क्रीमीलेयर सीमा के अनुसार आर्थिक रूप से आरक्षित वर्ग के आर्थिक रूप से सक्षम परिवारों को आरक्षण से वंचित करने का नियम है, जबकि जरूरतमंद अन्य जातियों को आरक्षण का मदद मिलना आसान होगा।
उन्होंने कहा कि 1953 में काका कालेकर कमेटी बनी और 1955 में रिपोर्ट सौंपी गई। 1961 में कांग्रेस सरकार ने इसे खारिज कर दिया। 1979 में मंडल कमीशन का गठन किया गया, 1989 में भाजपा समर्थित जनता पार्टी की सरकार ने इसे लागू किया। मंडल कमीशन ने बावजूद पिछड़ा वर्ग आयोग को संवैधानिक दर्जा नहीं था। वर्ष 2018 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार में इसे संवैधानिक दर्जा प्राप्त हुआ। 127वें संविधान संशोधन में चिकित्सा शिक्षा व अन्य शासकीय क्षेत्र में आरक्षण को लागू किया गया। भाजपा ने आर्थिक रूप से पिछड़े परिवारों के बच्चों को आरक्षण का लाभ दिलाया। उन्होंने कहा कि समाज की असमानता दूर होने पर आर्थिक आधार पर आरक्षण की व्यवस्था लागू की जा सकती है।
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सिद्धार्थनगर। केंद्रीय वित्त राज्यमंत्री पंकज चौधरी ने कहा कि जाति आधारित गणना से समाज का विभाजन होता है। हालांकि इस पर विचार चल रहा है। राजनीतिक दलों की मांग भी है। इस मामले में पार्टी का शीर्ष नेतृत्व निर्णय करना है। आजादी के पहले 1931 में जाति आधारित गणना की व्यवस्था समाप्त कर दी गई थी।
जन आशीर्वाद यात्रा में आए केंद्रीय मंत्री बुधवार को पीडब्ल्यूडी के रेस्ट हाउस में पत्रकारों से बातचीत कर रहे थे। संसद में पास हुए आरक्षण बिल के बारे में उन्होंने दोहराया कि भाजपा की पिछड़ी जातियों की हितैषी है। उन्होंने कहा कि आरक्षण बिल से पिछड़ों का आरक्षण कम नहीं होगा। क्रीमीलेयर सीमा के अनुसार आर्थिक रूप से आरक्षित वर्ग के आर्थिक रूप से सक्षम परिवारों को आरक्षण से वंचित करने का नियम है, जबकि जरूरतमंद अन्य जातियों को आरक्षण का मदद मिलना आसान होगा।
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उन्होंने कहा कि 1953 में काका कालेकर कमेटी बनी और 1955 में रिपोर्ट सौंपी गई। 1961 में कांग्रेस सरकार ने इसे खारिज कर दिया। 1979 में मंडल कमीशन का गठन किया गया, 1989 में भाजपा समर्थित जनता पार्टी की सरकार ने इसे लागू किया। मंडल कमीशन ने बावजूद पिछड़ा वर्ग आयोग को संवैधानिक दर्जा नहीं था। वर्ष 2018 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार में इसे संवैधानिक दर्जा प्राप्त हुआ। 127वें संविधान संशोधन में चिकित्सा शिक्षा व अन्य शासकीय क्षेत्र में आरक्षण को लागू किया गया। भाजपा ने आर्थिक रूप से पिछड़े परिवारों के बच्चों को आरक्षण का लाभ दिलाया। उन्होंने कहा कि समाज की असमानता दूर होने पर आर्थिक आधार पर आरक्षण की व्यवस्था लागू की जा सकती है।
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