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UP: नेपाल सीमा तक फैला था नकली शराब का नेटवर्क, 32 हजार फर्जी ढक्कन, 12 हजार बारकोड के साथ गिरोह का भंडाफोड़

Thu, 06 Aug 2026 03:49 PM IST
Rohit Singh संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर Published by: Rohit Singh Updated Thu, 06 Aug 2026 03:49 PM IST
सार

 एसपी डॉ अभिषेक महाजन ने प्रेसवार्ता में बताया कि प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि यह नेटवर्क सिद्धार्थनगर ही नहीं, आसपास के जिलों और नेपाल सीमा से सटे क्षेत्रों तक फैला हुआ था।
पुलिस के अनुसार, बुधवार को इटवा रोड स्थित रतन सेन सिंह इंटर कॉलेज के पास चेकिंग के दौरान मुखबिर की सूचना पर कार्रवाई की गई।

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Siddharthnagar police busted a spurious liquor network extending up to the Nepal border.
पुलिस ने नकली शराब नेटवर्क का खुलासा किया - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी

विस्तार

जिले में नकली अंग्रेजी शराब के कारोबार पर पुलिस और आबकारी विभाग ने बड़ी कार्रवाई करते हुए एक संगठित गिरोह का भंडाफोड़ किया है। बाँसी पुलिस, एसओजी, सर्विलांस सेल और आबकारी विभाग की संयुक्त टीम ने दो आरोपियों को गिरफ्तार कर उनके कब्जे से 32,472 नकली ढक्कन, 12,740 फर्जी बारकोड (सील रैपर), विभिन्न कंपनियों की 16 बोतल मिश्रित अंग्रेजी शराब, शराब तैयार करने में प्रयुक्त उपकरण और अन्य सामान बरामद किया है। 
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एसपी डॉ अभिषेक महाजन ने प्रेसवार्ता में बताया कि प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि यह नेटवर्क सिद्धार्थनगर ही नहीं, आसपास के जिलों और नेपाल सीमा से सटे क्षेत्रों तक फैला हुआ था। पुलिस के अनुसार, बुधवार को इटवा रोड स्थित रतन सेन सिंह इंटर कॉलेज के पास चेकिंग के दौरान मुखबिर की सूचना पर कार्रवाई की गई।
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इस दौरान बलराम जायसवाल और हरदोई निवासी प्रदीप कुमार को गिरफ्तार किया गया। प्रदीप शराब की दुकान पर सेल्समैन के रूप में कार्यरत था। गिरफ्तार बलराम जायसवाल की निशानदेही पर पुलिस ने कोइलहवा स्थित सुभाष नगर में किराये के मकान की तलाशी ली।
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यहां विभिन्न ब्रांडों के नकली ढक्कन, बारकोड, शराब की पैकिंग में प्रयुक्त सामग्री, इलेक्ट्रॉनिक वेट मशीन, ढक्कन खोलने के उपकरण और अन्य सामान बरामद हुआ। इसके अलावा संबंधित दुकान से आईबी, आइकॉनिक और आरएस ब्रांड की 16 बोतल संदिग्ध मिश्रित अंग्रेजी शराब भी बरामद की गई।

नेपाल सीमा तक होती थी सप्लाई
पूछताछ में बलराम जायसवाल ने पुलिस को बताया कि उसने कोइलहवा में किराये का मकान लेकर नकली ढक्कन और बारकोड का भंडारण कर रखा था। यह सामग्री वह गुरुप्रसाद प्रजापति नामक व्यक्ति से ट्रांसपोर्ट के माध्यम से मंगाता था। इसके बाद इन्हें सिद्धार्थनगर, आसपास के जिलों और नेपाल सीमा से सटी शराब की दुकानों पर कार्यरत कुछ लोगों को बेच देता था।

आरोपी के अनुसार, खाली शराब की बोतलों में दोबारा शराब भरकर उन पर नकली ढक्कन और फर्जी बारकोड लगाकर असली ब्रांड के नाम पर बाजार में बेचा जाता था। इस तरीके से गिरोह लंबे समय से अवैध कमाई कर रहा था।

लाखों के राजस्व नुकसान की आशंका टली
पुलिस का कहना है कि समय रहते कार्रवाई होने से बड़ी मात्रा में नकली और संभावित जहरीली शराब बाजार में पहुंचने से रोक दी गई। साथ ही सरकार को होने वाले लाखों रुपये के राजस्व नुकसान को भी बचाया गया है। मामले में गिरोह के अन्य सदस्यों की तलाश की जा रही है और विवेचना के दौरान नए नाम सामने आने पर कार्रवाई की जाएगी।

दुकान सील, लाइसेंस निरस्तीकरण की प्रक्रिया
आबकारी विभाग ने कार्रवाई के बाद संबंधित शराब की दुकान को सील कर दिया है। विभाग ने दुकान का लाइसेंस निरस्त करने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी है। पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ थाना बाँसी में बीएनएस की विभिन्न धाराओं तथा आबकारी अधिनियम की धाराओं 60 और 64 के तहत मुकदमा दर्ज कर न्यायालय भेज दिया है।

पहले भी दर्ज है केस 
मुख्य आरोपी बलराम जायसवाल के खिलाफ वर्ष 2020 में भी धोखाधड़ी, जालसाजी और आबकारी अधिनियम के तहत केस दर्ज हो चुका है। पुलिस अब उसके नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों और नकली सामग्री की आपूर्ति करने वाले व्यक्तियों की भूमिका की भी जांच कर रही है।

टीम को मिला पुरस्कार
 इस कार्रवाई का नेतृत्व प्रभारी निरीक्षक मृत्युंजय पाठक, एसओजी प्रभारी उपनिरीक्षक चन्द्रकान्त पाण्डेय, सर्विलांस प्रभारी हरेन्द्र चौहान तथा आबकारी विभाग के अधिकारियों ने किया। उत्कृष्ट कार्रवाई पर वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक ने संयुक्त टीम को 20 हजार रुपये के नकद पुरस्कार से सम्मानित करने की घोषणा की।

 बरामदगी एक नजर में
 - 32,472 नकली ढक्कन (आईबी, ओल्ड मॉन्क, आरएस, आइकॉनिक, बीपी, मैकडॉवेल्स आदि ब्रांड)
 - 12,740 नकली बारकोड (सील रैपर)

 - 16 बोतल संदिग्ध/मिश्रित अंग्रेजी शराब
 - इलेक्ट्रॉनिक वेट मशीन

 - ढक्कन खोलने के दो उपकरण (सुजा)
 - एक अवैध चाकू
 - टीवीएस रेडियन मोटरसाइकिल
 
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