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Siddharthnagar News: हवा में रह गई डीजे पर काबू की चेतावनी, त्योहारों में गूंजता रहा तेज शोर

Thu, 22 Oct 2026 11:14 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर Updated Thu, 22 Oct 2026 11:14 PM IST
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Siddharthnagar News: Warning to regulate DJ sound systems goes unheeded; loud noise continues to blare during festivals
- त्योहारों से पहले डीजे संचालकों को नियमों का पालन करने की दी गई थी हिदायत
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- बढ़नी में नवजात की मौत के मामले में पिता ने जताई थी आशंका, मौत की वजह जांच के बाद होगी स्पष्ट
सिद्धार्थनगर। डीजे की तेज आवाज पर नियंत्रण के लिए त्योहारों से पहले दी गई चेतावनी बेअसर नजर आई। दुर्गापूजा और दशहरा से पहले पुलिस ने शांति समिति की बैठकों में डीजे संचालकों को निर्धारित ध्वनि सीमा और समय संबंधी नियमों का पालन करने की हिदायत दी थी। इसके बावजूद त्योहारों के दौरान तेज आवाज में डीजे बजने की शिकायतें सामने आईं। ऐसे में नियमों का पालन कराने के लिए निगरानी और उल्लंघन करने वालों पर कार्रवाई को लेकर सवाल उठ रहे हैं।
29 सितंबर को बांसी और एक अक्तूबर को भवानीगंज समेत जिले के विभिन्न थानों और जिला मुख्यालय पर हुई शांति समिति की बैठकों में डीजे संचालकों को न्यायालय के आदेशों और निर्धारित मानकों का पालन करने के निर्देश दिए गए थे। दुर्गा मूर्ति विसर्जन के दौरान भी तेज आवाज से बचने और शांति व्यवस्था बनाए रखने पर जोर दिया गया था। इसके बावजूद तेज ध्वनि को लेकर चिंता बनी रही। ऐसे में सवाल उठता है कि निर्देशों के बाद भी नियमों के उल्लंघन को रोकने के लिए प्रभावी निगरानी क्यों नहीं हो सकी।
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बढ़नी नगर पंचायत के वार्ड नंबर नौ में दो दिन के नवजात की मौत के मामले ने भी तेज आवाज के असर को लेकर चिंता बढ़ा दी। बच्चे के पिता जावेद मनिहार ने घर के पास डीजे बजने के दौरान हुई घटना को लेकर आशंका जताई थी और पोस्टमार्टम कराने की मांग की थी। इसके बाद पुलिस ने शव का पोस्टमार्टम कराया। हालांकि, डीजे की आवाज और नवजात की मौत के बीच संबंध की पुष्टि नहीं हुई है। पोस्टमार्टम से भी मौत की वजह स्पष्ट नहीं हो सकी। अब विसरा जांच रिपोर्ट के आधार पर मौत के कारणों का पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है।
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ध्वनि सीमा से लेकर समय तक के नियम
ध्वनि प्रदूषण (विनियमन एवं नियंत्रण) नियम, 2000 के तहत परिवेशी ध्वनि की निर्धारित सीमा क्षेत्र के अनुसार अलग-अलग है। सामान्य क्षेत्र में दिन के समय यह सीमा 55 और रात में 45 डेसीबल है। वाणिज्यिक, औद्योगिक और शांत क्षेत्रों के लिए अलग मानक निर्धारित हैं। सामान्यतः रात 10 बजे से सुबह छह बजे तक लाउडस्पीकर और ध्वनि विस्तारक यंत्रों के इस्तेमाल पर रोक रहती है। हालांकि, नियमों में निर्धारित शर्तों के तहत सीमित अपवाद का प्रावधान है। त्योहारों और सार्वजनिक आयोजनों में भी लागू नियमों का पालन जरूरी है। तेज आवाज पर नियंत्रण के लिए निर्देशों के साथ प्रभावी निगरानी और नियम तोड़ने वालों के खिलाफ कार्रवाई भी जरूरी है।

तेज आवाज से सेहत को हो सकते हैं ये नुकसान
मेडिकल कॉलेज के ईएनटी विशेषज्ञ डॉ. जितेंद्र कुमार चौधरी के अनुसार, तेज आवाज का असर लोगों की सेहत पर पड़ सकता है।
दिल की धड़कन और रक्तचाप पर असर : तेज शोर से तनाव बढ़ सकता है और रक्तचाप प्रभावित हो सकता है।
नींद में बाधा : रात में तेज आवाज से नींद टूट सकती है। इससे थकान और चिड़चिड़ापन बढ़ सकता है।
सुनने की क्षमता को खतरा : बहुत तेज आवाज के संपर्क में रहने से कानों को नुकसान पहुंच सकता है और सुनने की क्षमता कम हो सकती है।
बच्चों की पढ़ाई प्रभावित : लगातार शोर से एकाग्रता और पढ़ने-लिखने में परेशानी हो सकती है।
बुजुर्गों और मरीजों को परेशानी : तेज ध्वनि से बेचैनी, तनाव और आराम में बाधा हो सकती है।
सिरदर्द और मानसिक तनाव : लगातार शोर के कारण सिरदर्द, चिड़चिड़ापन और तनाव बढ़ सकता है।

85 डेसीबल से अधिक शोर कानों के लिए नुकसानदेह
लंबे समय तक 85 डेसीबल या इससे अधिक की आवाज के संपर्क में रहने से सुनने की क्षमता प्रभावित होने का खतरा बढ़ सकता है। डीजे के स्पीकर के पास ध्वनि का स्तर काफी अधिक हो सकता है। आवाज जितनी तेज होगी और जितनी देर तक उसके संपर्क में रहेंगे, नुकसान का जोखिम उतना बढ़ेगा। तेज आवाज के बाद कानों में घंटी या सीटी बजना, कम सुनाई देना अथवा कान बंद महसूस होना चेतावनी के संकेत हो सकते हैं। ऐसी परेशानी होने पर तेज आवाज से दूर रहें। लक्षण बने रहने पर ईएनटी विशेषज्ञ से जांच कराएं। अचानक सुनाई देना कम हो जाए, खासकर एक कान से, तो तत्काल चिकित्सकीय सहायता लें। डीजे के स्पीकर से दूरी बनाए रखना, तेज आवाज के संपर्क में बिताया समय कम करना और जरूरत पड़ने पर ईयरप्लग का इस्तेमाल करना बचाव में मददगार हो सकता है।

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त्योहारों और अन्य आयोजनों में डीजे निर्धारित मानकों और समय सीमा के अनुसार ही बजाया जाना चाहिए। तेज आवाज से लोगों को परेशानी न हो, इसके लिए पुलिस को आवश्यक निर्देश दिए जाते हैं। नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ शिकायत और जांच के आधार पर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
- प्रशांत कुमार प्रसाद, एएसपी
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