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Siddharthnagar News: प्लास्टर तक सीमित ट्राॅमा सेंटर होगा सशक्त, बजट से जगी इलाज की उम्मीद
Mon, 02 Feb 2026 12:16 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
Updated Mon, 02 Feb 2026 12:16 AM IST
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- मेडिकल कॉलेज में निर्मित ट्राॅमा सेंटर में फिलहाल सिर्फ प्लास्टर की सुविधा
- बजट प्रावधान से गंभीर मरीजों के इलाज की बढ़ी उम्मीद
सिद्धार्थनगर। माधव प्रसाद त्रिपाठी मेडिकल कॉलेज में संचालित ट्रामा सेंटर अभी तक सीमित संसाधनों के कारण केवल प्लास्टर जैसी प्राथमिक सुविधाओं तक ही सिमटा हुआ है। गंभीर रूप से घायल मरीजों को मजबूरी में गोरखपुर के बीआरडी मेडिकल कॉलेज रेफर करना पड़ता है। अब बजट में प्रावधान किए जाने और ट्रामा सेंटर की क्षमता बढ़ाए जाने की घोषणा के बाद बेहतर यहां सुविधाएं बढ़ने से बेहतर इलाज की उम्मीद जगी है।
मेडिकल कॉलेज की इमरजेंसी में प्रतिदिन 70 से 100 मरीज पहुंचते हैं, जिनमें 15 से 20 मरीज सड़क दुर्घटना या अन्य हादसों से संबंधित होते हैं। संसाधनों के अभाव में गंभीर मरीजों को रेफर करना पड़ता है। कई बार सर्जरी या उन्नत इलाज की जरूरत के दौरान मरीज रास्ते में ही गंभीर स्थिति में पहुंच जाते हैं। अब तक ट्रामा सेंटर में सेवाएं प्लास्टर तक सीमित थीं, लेकिन बजट मिलने के बाद यहां इमरजेंसी सेवाओं के साथ अन्य चिकित्सकीय सुविधाओं का विस्तार किया जाएगा। इससे गंभीर दुर्घटना पीड़ितों को जिले में ही इलाज मिल सकेगा और उन्हें बाहर रेफर होने की परेशानी से राहत मिलेगी। मेडिकल कॉलेज में उपलब्ध ऑर्थोपेडिक और जनरल सर्जन ट्राॅमा सेंटर में तत्काल सेवाएं देंगे, जिससे मरीजों की जान बचाने में मदद मिलेगी।
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ट्राॅमा सेंटर में मिलेंगी ये सुविधाएं
ट्राॅमा सेंटर में गंभीर दुर्घटनाओं, चोटों और जानलेवा स्थितियों के लिए 24 घंटे विशेषज्ञ आपातकालीन सेवाएं उपलब्ध होंगी। इसमें ट्रॉमा सर्जन, न्यूरोसर्जन, आईसीयू, ऑपरेशन थिएटर, ब्लड बैंक और उन्नत डायग्नोस्टिक लैब की व्यवस्था रहेगी। इसके साथ ही जीवनरक्षक दवाओं की 24 घंटे उपलब्धता, एम्बुलेंस व ट्रांसपोर्ट की सुविधा से गंभीर मरीजों को लाने और शिफ्ट करने की बेहतर व्यवस्था होगी।
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शामली एक्सप्रेस से बढ़ेगी ट्राॅमा सेंटर की भूमिका
जिले से होकर गुजरने वाली शामली एक्सप्रेस के संचालन से मेडिकल कॉलेज के ट्राॅमा सेंटर की भूमिका और बढ़ जाएगी। हाईवे पर होने वाली दुर्घटनाओं में घायलों को त्वरित चिकित्सा सुविधा मिल सकेगी। इसके अलावा सीमा से सटे होने के कारण नेपाली नागरिकों को भी इस ट्राॅमा सेंटर से राहत मिलेगी, जो जीवन रक्षा की दृष्टि से बेहद अहम साबित होगा।
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- बजट प्रावधान से गंभीर मरीजों के इलाज की बढ़ी उम्मीद
सिद्धार्थनगर। माधव प्रसाद त्रिपाठी मेडिकल कॉलेज में संचालित ट्रामा सेंटर अभी तक सीमित संसाधनों के कारण केवल प्लास्टर जैसी प्राथमिक सुविधाओं तक ही सिमटा हुआ है। गंभीर रूप से घायल मरीजों को मजबूरी में गोरखपुर के बीआरडी मेडिकल कॉलेज रेफर करना पड़ता है। अब बजट में प्रावधान किए जाने और ट्रामा सेंटर की क्षमता बढ़ाए जाने की घोषणा के बाद बेहतर यहां सुविधाएं बढ़ने से बेहतर इलाज की उम्मीद जगी है।
मेडिकल कॉलेज की इमरजेंसी में प्रतिदिन 70 से 100 मरीज पहुंचते हैं, जिनमें 15 से 20 मरीज सड़क दुर्घटना या अन्य हादसों से संबंधित होते हैं। संसाधनों के अभाव में गंभीर मरीजों को रेफर करना पड़ता है। कई बार सर्जरी या उन्नत इलाज की जरूरत के दौरान मरीज रास्ते में ही गंभीर स्थिति में पहुंच जाते हैं। अब तक ट्रामा सेंटर में सेवाएं प्लास्टर तक सीमित थीं, लेकिन बजट मिलने के बाद यहां इमरजेंसी सेवाओं के साथ अन्य चिकित्सकीय सुविधाओं का विस्तार किया जाएगा। इससे गंभीर दुर्घटना पीड़ितों को जिले में ही इलाज मिल सकेगा और उन्हें बाहर रेफर होने की परेशानी से राहत मिलेगी। मेडिकल कॉलेज में उपलब्ध ऑर्थोपेडिक और जनरल सर्जन ट्राॅमा सेंटर में तत्काल सेवाएं देंगे, जिससे मरीजों की जान बचाने में मदद मिलेगी।
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ट्राॅमा सेंटर में मिलेंगी ये सुविधाएं
ट्राॅमा सेंटर में गंभीर दुर्घटनाओं, चोटों और जानलेवा स्थितियों के लिए 24 घंटे विशेषज्ञ आपातकालीन सेवाएं उपलब्ध होंगी। इसमें ट्रॉमा सर्जन, न्यूरोसर्जन, आईसीयू, ऑपरेशन थिएटर, ब्लड बैंक और उन्नत डायग्नोस्टिक लैब की व्यवस्था रहेगी। इसके साथ ही जीवनरक्षक दवाओं की 24 घंटे उपलब्धता, एम्बुलेंस व ट्रांसपोर्ट की सुविधा से गंभीर मरीजों को लाने और शिफ्ट करने की बेहतर व्यवस्था होगी।
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शामली एक्सप्रेस से बढ़ेगी ट्राॅमा सेंटर की भूमिका
जिले से होकर गुजरने वाली शामली एक्सप्रेस के संचालन से मेडिकल कॉलेज के ट्राॅमा सेंटर की भूमिका और बढ़ जाएगी। हाईवे पर होने वाली दुर्घटनाओं में घायलों को त्वरित चिकित्सा सुविधा मिल सकेगी। इसके अलावा सीमा से सटे होने के कारण नेपाली नागरिकों को भी इस ट्राॅमा सेंटर से राहत मिलेगी, जो जीवन रक्षा की दृष्टि से बेहद अहम साबित होगा।