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Siddharthnagar News: साहित्य के पात्रों और व्यवहार को समझने में मनोविज्ञान की अहम भूमिका

Sun, 18 Oct 2026 12:28 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर Updated Sun, 18 Oct 2026 12:28 AM IST
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Siddharthnagar News: The crucial role of psychology in understanding literary characters and their behavior
रतन सेन डिग्री कॉलेज में ‘साइकोएनालिसिस इन लिटरेचर’ विषय पर एक दिवसीय संगोष्ठी आयोजित
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इड, ईगो और सुपर ईगो के सिद्धांतों के साथ फ्रायड व कार्ल जुंग के विचारों पर हुई चर्चा
बांसी। रतन सेन डिग्री कॉलेज में अंग्रेजी विभाग की ओर से ‘साइकोएनालिसिस इन लिटरेचर’ विषय पर एक दिवसीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया। इसमें महाविद्यालय के विभिन्न विभागों के छात्र-छात्राओं ने हिस्सा लिया। संगोष्ठी में साहित्य और मनोविज्ञान के बीच संबंधों पर चर्चा करते हुए बताया गया कि मनुष्य के विचार, भावनाएं और व्यवहार साहित्यिक रचनाओं तथा उनके पात्रों को समझने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
विषय विशेषज्ञ के रूप में महाविद्यालय के मनोविज्ञान विभाग के असिस्टेंट प्रोफेसर रितेश कुमार शुक्ला ने व्याख्यान दिया। उन्होंने बताया कि व्यक्ति का मस्तिष्क विभिन्न परिस्थितियों, अनुभवों और मानसिक प्रक्रियाओं से प्रभावित होता है। मनुष्य के व्यवहार को समझने के लिए मनोवैज्ञानिक सिद्धांतों की जानकारी आवश्यक है। उन्होंने मनोविश्लेषण के जनक सिग्मंड फ्रायड के इड, ईगो और सुपर ईगो के सिद्धांतों को विस्तार से समझाया। साथ ही बताया कि ये तीनों अवधारणाएं व्यक्ति की इच्छाओं, वास्तविकता की समझ और नैतिक मान्यताओं के बीच संबंध को समझने में मदद करती हैं। उन्होंने कार्ल जुंग और आधुनिक मनोवैज्ञानिकों के विचारों की भी जानकारी दी।
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संगोष्ठी के समन्वयक अंग्रेजी विभाग के देवेंद्र प्रसाद यादव ने कहा कि आधुनिक मनोविज्ञान की विभिन्न धाराएं साहित्य के अध्ययन को नया दृष्टिकोण प्रदान करती हैं। किसी साहित्यिक रचना में लेखक की सोच, पात्रों की मनोदशा, उनके निर्णय और व्यवहार को समझने के लिए मनोवैज्ञानिक सिद्धांतों की जानकारी जरूरी है। साहित्य में पात्रों के व्यवहार का अध्ययन केवल घटनाओं के आधार पर नहीं, बल्कि उनकी मानसिक स्थिति और परिस्थितियों के संदर्भ में भी किया जाना चाहिए।
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समाजशास्त्र विभाग के सहायक प्रोफेसर दयाशंकर ने विद्यार्थियों को समाजशास्त्रीय दृष्टिकोण से विषय को समझाया। उन्होंने साहित्य और समाज के आपसी संबंधों को समझने पर जोर दिया। संगोष्ठी के दौरान विद्यार्थियों को विभिन्न विचारधाराओं के माध्यम से साहित्यिक पात्रों और मानवीय व्यवहार का विश्लेषण करने की जानकारी मिली।

कार्यक्रम में बीएड विभाग के सहायक आचार्य डॉ. हंसराज कुशवाहा और मनोज कुमार सोनकर भी मौजूद रहे। कार्यक्रम के अंत में सह समन्वयक डॉ. हंसराज कुशवाहा ने अतिथियों, शिक्षकों और विद्यार्थियों के प्रति आभार व्यक्त किया। इस अवसर पर महाविद्यालय के विभिन्न विभागों के बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।
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