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Siddharthnagar News: राम-लक्ष्मण ने किया ताड़का का वध, अहिल्या का हुआ उद्धार
Fri, 16 Oct 2026 11:25 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
Updated Fri, 16 Oct 2026 11:25 PM IST
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डुमरियागंज। तहसील क्षेत्र के बनगवां नानकार गांव में नवयुवक दुर्गा पूजा समिति की ओर से आयोजित संगीतमयी श्रीराम कथा में शुक्रवार की रात चारों भाइयों के नामकरण, गंगा अवतरण, ताड़का वध, विश्वामित्र के यज्ञ की रक्षा और अहिल्या उद्धार के प्रसंग सुनाए गए। कथावाचक ने कथा के माध्यम से धर्म की रक्षा, गुरु की आज्ञा और भगवान की कृपा का महत्व बताया।
कथा में बताया गया कि भगवान श्रीराम, भरत, लक्ष्मण और शत्रुघ्न के जन्म के बाद गुरु वशिष्ठ ने चारों भाइयों का नामकरण किया। इसके बाद ऋषि विश्वामित्र राजा दशरथ से श्रीराम और लक्ष्मण को अपने यज्ञ की रक्षा के लिए साथ ले गए। रास्ते में भगवान श्रीराम ने ताड़का का वध कर ऋषियों को उसके आतंक से मुक्ति दिलाई। दोनों भाइयों की सहायता से विश्वामित्र का यज्ञ निर्विघ्न संपन्न हुआ।
कथावाचक ने गंगा अवतरण का प्रसंग सुनाते हुए राजा भगीरथ की कठोर तपस्या और पूर्वजों के उद्धार के लिए किए गए प्रयासों का वर्णन किया। भगवान शिव ने गंगा की तीव्र धारा को अपनी जटाओं में धारण कर उसके वेग को नियंत्रित किया। इसके बाद अहिल्या उद्धार का प्रसंग आया। भगवान श्रीराम के आश्रम पहुंचने पर अहिल्या को शाप से मुक्ति मिली। इन प्रसंगों के माध्यम से श्रद्धालुओं को तपस्या, कर्तव्य और धर्म के मार्ग पर चलने की प्रेरणा दी गई।
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कथा के दौरान श्रद्धालु भक्तिभाव से प्रसंग सुनते रहे। इस दौरान वीरेंद्र दूबे, सतीश दुबे, जय प्रकाश दूबे, कल्लू यादव, इंदल यादव, महेंद्र पांडेय सहित अन्य श्रद्धालु मौजूद रहे।
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कथा में बताया गया कि भगवान श्रीराम, भरत, लक्ष्मण और शत्रुघ्न के जन्म के बाद गुरु वशिष्ठ ने चारों भाइयों का नामकरण किया। इसके बाद ऋषि विश्वामित्र राजा दशरथ से श्रीराम और लक्ष्मण को अपने यज्ञ की रक्षा के लिए साथ ले गए। रास्ते में भगवान श्रीराम ने ताड़का का वध कर ऋषियों को उसके आतंक से मुक्ति दिलाई। दोनों भाइयों की सहायता से विश्वामित्र का यज्ञ निर्विघ्न संपन्न हुआ।
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कथावाचक ने गंगा अवतरण का प्रसंग सुनाते हुए राजा भगीरथ की कठोर तपस्या और पूर्वजों के उद्धार के लिए किए गए प्रयासों का वर्णन किया। भगवान शिव ने गंगा की तीव्र धारा को अपनी जटाओं में धारण कर उसके वेग को नियंत्रित किया। इसके बाद अहिल्या उद्धार का प्रसंग आया। भगवान श्रीराम के आश्रम पहुंचने पर अहिल्या को शाप से मुक्ति मिली। इन प्रसंगों के माध्यम से श्रद्धालुओं को तपस्या, कर्तव्य और धर्म के मार्ग पर चलने की प्रेरणा दी गई।
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कथा के दौरान श्रद्धालु भक्तिभाव से प्रसंग सुनते रहे। इस दौरान वीरेंद्र दूबे, सतीश दुबे, जय प्रकाश दूबे, कल्लू यादव, इंदल यादव, महेंद्र पांडेय सहित अन्य श्रद्धालु मौजूद रहे।