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Siddharthnagar News: मेडिकल काॅलेज में कैसे हो दिल का इलाज, हृदय रोग विशेषज्ञ ही नहीं

Thu, 15 Oct 2026 12:12 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर Updated Thu, 15 Oct 2026 12:12 AM IST
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Siddharthnagar News: How can heart treatment be provided at the medical college? There isn't even a cardiologist
मेडिकल कॉलेज के इमरजेंसी वार्ड में भर्ती मरीज। संवाद
सिद्धार्थनगर। दिल की बीमारी के मामले बढ़ रहे हैं लेकिन जिले के माधव प्रसाद त्रिपाठी मेडिकल कॉलेज में हृदय रोग विशेषज्ञ की तैनाती नहीं है। ऐसे में हार्ट अटैक के लक्षण वाले मरीजों को प्राथमिक उपचार के बाद उच्च चिकित्सा केंद्रों पर रेफर करना पड़ता है। गंभीर मरीजों के लिए समय पर विशेषज्ञ उपचार मिलना चुनौती बना हुआ है।
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मेडिकल कॉलेज की ओपीडी और इमरजेंसी में रोजाना हृदय रोग के लक्षण वाले मरीज पहुंच रहे हैं। ठंड के मौसम में इनकी संख्या और बढ़ने की आशंका है।
करीब 30 लाख की आबादी वाले जिले में हृदय रोगियों के उपचार के लिए विशेषज्ञ सुविधा की कमी परेशानी बढ़ा रही है। मेडिकल कॉलेज में प्राथमिक उपचार की व्यवस्था है लेकिन गंभीर मरीजों को आगे के इलाज के लिए गोरखपुर सहित दूसरे केंद्रों पर जाना पड़ता है। इससे मरीजों और उनके परिजन को समय के साथ आर्थिक दबाव भी झेलना पड़ता है।
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ओपीडी और इमरजेंसी में पहुंच रहे मरीज : मेडिकल कॉलेज के मेडिसिन विभाग की ओपीडी में रोजाना चार से छह मरीज हृदय रोग से जुड़े लक्षणों के साथ पहुंचते हैं। वहीं, इमरजेंसी में भी ऐसे मरीज आते हैं, जिनमें हार्ट अटैक की आशंका होती है। चिकित्सक ईसीजी और अन्य जांच के आधार पर मरीज की स्थिति का आकलन करते हैं।
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प्राथमिक उपचार के बाद आगे के इलाज की सलाह दी जाती है या उच्च केंद्र पर रेफर किया जाता है।
मेडिसिन विभाग के एमडी डॉ. गौरव कुमार दुबे के मुताबिक, ओपीडी में आने वाले मरीजों को लक्षणों के आधार पर दवाएं दी जाती हैं और जरूरत पड़ने पर उच्च चिकित्सा केंद्र में दिखाने की सलाह दी जाती है। इमरजेंसी में गंभीर मरीजों को रेफर करना पड़ता है। ठंड के मौसम में ऐसे मरीजों की संख्या बढ़ सकती है।

विशेषज्ञ न होने से बढ़ती है परेशानी : हार्ट अटैक में समय पर उपचार बेहद महत्वपूर्ण होता है। ऐसे में विशेषज्ञ और जरूरी सुविधाएं उपलब्ध न होने से मरीजों को दूसरे शहरों में ले जाना पड़ता है। हृदय की नसों में ब्लॉकेज होने पर एंजियोप्लास्टी और स्टेंट डालने जैसी प्रक्रिया की जरूरत पड़ सकती है, जिसका निजी अस्पतालों में खर्च भी अधिक होता है। सुविधा उपलब्ध होने से मरीजों को राहत मिल सकती है।
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