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Siddharthnagar News: श्रीराम जन्मोत्सव का प्रसंग सुन भाव विभोर हुए श्रद्धालु
Thu, 05 Nov 2026 11:55 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
Updated Thu, 05 Nov 2026 11:55 PM IST
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पकड़ी बाजार। क्षेत्र के डफरा स्थित हनुमान मंदिर परिसर में हनुमान जयंती के उपलक्ष्य में आयोजित श्रीराम कथा के चौथे दिन बुधवार रात भगवान श्रीराम के जन्मोत्सव का प्रसंग सुनाया गया। कथावाचक पंडित चंद्रशेखर रामायणी के मुखारविंद से कथा सुनकर श्रद्धालु भाव विभोर हो गए।
कथावाचक ने बताया कि अयोध्या के राजा दशरथ की कोई संतान नहीं थी। पुत्र प्राप्ति की कामना लेकर वह गुरु वशिष्ठ के आश्रम पहुंचे और अपनी व्यथा बताई। गुरु वशिष्ठ ने श्रृंगी ऋषि को बुलवाकर पुत्रकामेष्टि यज्ञ कराने का सुझाव दिया।
इसके बाद मनोरमा नदी के तट पर स्थित मखौड़ा में पुत्र प्राप्ति के लिए यज्ञ कराया गया। यज्ञकुंड से अग्निदेव प्रकट हुए और राजा दशरथ को चरु प्रदान किया। राजा दशरथ ने इसे अपनी तीनों रानियों कौशल्या, कैकेयी और सुमित्रा को दिया। इसके फलस्वरूप चैत्र शुक्ल नवमी को अभिजीत मुहूर्त में माता कौशल्या के गर्भ से भगवान श्रीराम का जन्म हुआ।
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भगवान श्रीराम के जन्म का प्रसंग सुनते ही पंडाल में बधाई गीत गूंजने लगे। श्रद्धालुओं ने नाच-गाकर जन्मोत्सव मनाया और ठाकुरजी को पत्र-पुष्प अर्पित किए। अंत में आरती के बाद श्रद्धालुओं में प्रसाद वितरित किया गया।
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कथावाचक ने बताया कि अयोध्या के राजा दशरथ की कोई संतान नहीं थी। पुत्र प्राप्ति की कामना लेकर वह गुरु वशिष्ठ के आश्रम पहुंचे और अपनी व्यथा बताई। गुरु वशिष्ठ ने श्रृंगी ऋषि को बुलवाकर पुत्रकामेष्टि यज्ञ कराने का सुझाव दिया।
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इसके बाद मनोरमा नदी के तट पर स्थित मखौड़ा में पुत्र प्राप्ति के लिए यज्ञ कराया गया। यज्ञकुंड से अग्निदेव प्रकट हुए और राजा दशरथ को चरु प्रदान किया। राजा दशरथ ने इसे अपनी तीनों रानियों कौशल्या, कैकेयी और सुमित्रा को दिया। इसके फलस्वरूप चैत्र शुक्ल नवमी को अभिजीत मुहूर्त में माता कौशल्या के गर्भ से भगवान श्रीराम का जन्म हुआ।
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भगवान श्रीराम के जन्म का प्रसंग सुनते ही पंडाल में बधाई गीत गूंजने लगे। श्रद्धालुओं ने नाच-गाकर जन्मोत्सव मनाया और ठाकुरजी को पत्र-पुष्प अर्पित किए। अंत में आरती के बाद श्रद्धालुओं में प्रसाद वितरित किया गया।