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Siddharthnagar News: नारद मोह की लीला देखकर हर्षित हुए श्रद्धालु
Wed, 14 Oct 2026 11:46 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
Updated Wed, 14 Oct 2026 11:46 PM IST
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डुमरियागंज। तहसील क्षेत्र के बनगवां नानकार गांव में नवयुवक दुर्गा पूजा समिति की ओर से दुर्गा पूजा के अवसर पर आयोजित संगीतमय श्रीराम कथा के तीसरे दिन मंगलवार रात कथावाचक बाबा विजय राघव दास रामायणी ने भगवान श्रीराम के अवतार के प्रमुख कारणों का वर्णन किया।
उन्होंने जय-विजय को मिला शाप, जलंधर प्रसंग और नारद मोह की कथा सुनाकर श्रद्धालुओं को भावविभोर कर दिया। उन्होंने कहा कि भगवान श्रीराम का अवतार केवल रावण वध के लिए ही नहीं, बल्कि भक्तों की रक्षा और धर्म की स्थापना के लिए भी हुआ था।
कथावाचक ने बताया कि भगवान विष्णु के द्वारपाल जय-विजय ने सनकादिक मुनियों को भगवान के दर्शन से रोक दिया था। इससे नाराज मुनियों ने उन्हें पृथ्वी पर जन्म लेने का शाप दिया। भगवान की लीला से जय-विजय ने असुर रूप में जन्म लिया और आगे चलकर रावण तथा कुंभकर्ण बने। धर्म की स्थापना और उनके उद्धार के लिए भगवान विष्णु ने श्रीराम के रूप में अवतार लिया।
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जलंधर प्रसंग सुनाते हुए उन्होंने बताया कि शक्तिशाली असुर जलंधर की शक्ति उसकी पत्नी वृंदा के पतिव्रत धर्म से जुड़ी थी। भगवान विष्णु की लीला से जलंधर का अंत हुआ। वहीं, नारद मोह की कथा के माध्यम से उन्होंने बताया कि तपस्या और भक्ति के प्रभाव से नारद मुनि के मन में अहंकार आ गया था।
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उन्होंने जय-विजय को मिला शाप, जलंधर प्रसंग और नारद मोह की कथा सुनाकर श्रद्धालुओं को भावविभोर कर दिया। उन्होंने कहा कि भगवान श्रीराम का अवतार केवल रावण वध के लिए ही नहीं, बल्कि भक्तों की रक्षा और धर्म की स्थापना के लिए भी हुआ था।
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कथावाचक ने बताया कि भगवान विष्णु के द्वारपाल जय-विजय ने सनकादिक मुनियों को भगवान के दर्शन से रोक दिया था। इससे नाराज मुनियों ने उन्हें पृथ्वी पर जन्म लेने का शाप दिया। भगवान की लीला से जय-विजय ने असुर रूप में जन्म लिया और आगे चलकर रावण तथा कुंभकर्ण बने। धर्म की स्थापना और उनके उद्धार के लिए भगवान विष्णु ने श्रीराम के रूप में अवतार लिया।
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जलंधर प्रसंग सुनाते हुए उन्होंने बताया कि शक्तिशाली असुर जलंधर की शक्ति उसकी पत्नी वृंदा के पतिव्रत धर्म से जुड़ी थी। भगवान विष्णु की लीला से जलंधर का अंत हुआ। वहीं, नारद मोह की कथा के माध्यम से उन्होंने बताया कि तपस्या और भक्ति के प्रभाव से नारद मुनि के मन में अहंकार आ गया था।