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Siddharthnagar News: बंदराें का जानलेवा आतंक...सिस्टम मार रहा गुलाटी

Tue, 06 Jan 2026 12:21 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर Updated Tue, 06 Jan 2026 12:21 AM IST
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Siddharthnagar News: Deadly attack by monkeys... Gulati is killing the system
घोसियारी बाजार में बंदरों के आतंक से परेशान लोग। संवाद
सिद्धार्थनगर। शहर से गांव तक बंदरों ने उत्पात मचा रखा है। लोगों के लिए बड़ी मुसीबत बन चुके यह बंदर अब घर में नुकसान पहुंचा रहे है। इससे सबसे अधिक बुजुर्ग और बच्चों के लिए यह खतरा है। रविवार को बंदर के दौड़ाने पर पथरा थाना क्षेत्र के रमवापुर गांव में एक महिला वृद्ध की मौत हो गई। इसके बाद भी जिम्मेदार इनको पकड़ने के इंतजाम के लिए हाथ खड़े कर दे रहे हैं।
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ग्रामीणों का कहना है कि बंदरों को पकड़े जाने के लिए जो नियम और कायदा बना है, वह बड़ा ही पेचीदा है। यह आम लोगों के लिए भारी पड़ रहा है। वन विभाग और नगर पालिका ग्राम पंचायत को जिम्मेदार ढहराता है जबकि पंचायत विभाग के जिम्मेदार बताते हैं कि इसके लिए उनके पास कोई बजट नहीं है।
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वन विभाग और ग्राम पंचायत एक-दूसरे के पाले में गेंद फेंककर अपना बचाव करते हैं। इसका नतीजा है कि बंदर के धक्के से ग्रामीणों के मुताबिक महिला छत पर पूजा करने के लिए गई थी, तभी यह घटना हुई। वहीं, नगर से गांव तक अब तक कई लोग इनके हमले से जख्मी हो चुके हैं। इसके साथ ही घर में घुसकर सामान नष्ट कर दे रहे हैं।
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वहीं, पशु चिकित्सा से जुड़े जानकारों के मुताबिक ठंड में भोजन न मिलने और रात में शरण के लिए उचित स्थल न मिलने के कारण वह आक्रोशित हो रहे हैं। यही कारण है कि इन दिनों बंदर लोगों को दौड़ा ले रहे हैं और आक्रमण कर दे रहे हैं।
वन विभाग कॉलोनी ही बंदरों के आतंक से परेशान: नगर में जहां वन विभाग का ऑफिस है, वहां पर लाल वाले बंदरों की संख्या अधिक है। बंदरों के आतंक इस प्रकार से है कि लोग छत पर कपड़ा डालने और अनाज लेकर जाने के बाद डंडा लेकर बैठे रहते हैं। जबतक सूख न जाए तो तबतक लोग बैठे रहने को मजबूर हैं। यहां से 200 से अधिक बंदरों की संख्या है। यही हाल शास्त्रीनगर वार्ड में मौजूदा समय में है, जहां 50 से अधिक बंदरों का झुंड है जाे सुबह शाम को पहुंचती है। मोहल्ले के रामनरेश, मुकेश कुमार, रामहित ने बताया कि बंदरों से बहुत परेशान हैं। कई बार वन विभाग से कहा गया, लेकिन वह नगर पालिका से कहने के लिए कहते हैं। बंदरों के डर से बच्चे घर से नहीं निकल पाते हैं। छत पर नहीं जाने दिया जाता है। छत पर बंदर पानी की टंकी का पाइप तोड़ देते हैं। कपड़ फाड़ देते हैं, इसके अलावा कई बार घर में घुसकर नुकसान कर देते हैं, पर कोई ध्यान देने वाला नहीं है। बांसी में बंदरों से परेशान लोग, कई बार हो चुके हैं चोटिल: बांसी। तहसील क्षेत्र के नरही बुजुर्ग गांव के लोग बंदरों के उत्पात से काफी परेशान है। गांव में सैकड़ों की तादाद में बंदर मौजूद है जो अब तक एक दर्जन से अधिक लोगों को काट कर घायल कर चुके हैं। बीते दिनों नरही बुजुर्ग निवासी अंबरीष दुबे के पुत्र निरूपम दूबे उर्फ पिंटू अपने बरामदे में खड़े थे। अचानक कई बंदरों ने हमला कर उन्हें घायल कर दिया। आसपास के लोगों ने पहुंचकर उन्हें बचाया और इलाज के लिए अस्पताल पहुंचाया। इसी तरह बंदरों के झुंड ने अखिलेश दुबे के पुत्र आदित्य को काट कर घायल किया था। बंदरों के उत्पात से भयभीत स्कूली बच्चों बूढ़े व महिलाएं घर से बाहर निकले से डर रहे हैं। गांव के लोगों का कहना है कि बंदरों के हमले से लोग इतने भयभीत है कि अनाज और कपड़ा सुखाने के लिए छत पर नहीं जा रहे हैं।
यही नहीं हाथ से रोटी छीनकर खा ले रहे हैं। गांव निवासी विनोद दूबे, शीला देवी, राम प्रकाश दूबे, शशि प्रकाश दूबे, निरूपम दूबे, शिवम दूबे, अंकित, एडवोकेट ओम प्रकाश दूबे, अशोक दूबे, अखिलेश दूबे, सुरेंद्र नाथ दूबे, सत्यभामा उर्फ गुड़िया, विवेकानंद ने जिम्मेदारों से बंदरों को पकड़ कर जंगल में छोड़ने की मांग की है।

बंदरों से परेशान हैं बाजार के लोग: घोसियारी। बांसी तहसील के घोसियारी बाजार में लोग काफी दिनों से बंदरों के आतंक से परेशान हैं। कई बार इस संबंध में शिकायत भी की गई, लेकिन अब तक किसी ने समस्या पर ध्यान नहीं दिया। दर्जनों लोगों को बंदर घायल कर चुके हैं। करीब तीन साल पहले इनकी संख्या केवल छह थी, लेकिन वर्तमान में 35 के करीब पहुंच चुकी है। घोसियारी के व्यापारी वर्ग और विद्यालय संचालक दो वर्ष से इस समस्या से परेशान हैं। बाजार के विनोद चौरसिया, पिंटू, अभय, राकेश, सुरेश, सुनील का कहना है कि विभाग को जल्द से जल्द इन बंदरों को पकड़वाकर जंगल भिजवाना चाहिए।
रेंजर खेसरहा सुशील कुमार का कहना है कि बंदरों को पकड़वाना वन विभाग का काम नहीं है। इसके लिए नगर पंचायत या नगर पालिका से संपर्क किया जा सकता है।
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