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छात्रवृत्ति के नए नियमों से रूबरू हुए प्राचार्य
ब्यूरो/अमर उजाला सिद्धार्थनगर
Updated Mon, 20 Jun 2016 11:04 PM IST
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सिद्धार्थ विश्वविद्यालय में प्राचार्यो की बैठक को संबोधित करते कुलपति।
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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सिद्धार्थनगर। नए शिक्षण सत्र से दशमोत्तर छात्रवृत्ति व शुल्क प्रतिपूर्ति के नियमों में शासन ने कई बदलाव किए हैं। अब नवीनीकरण श्रेणी के छात्र नव प्रवेशित विद्यार्थियों की तरह आवेदन नहीं कर सकेंगे। एक पाठ्यक्रम को अधूरा छोड़कर दूसरे में दाखिला लेने पर भी छात्रवृत्ति-शुल्क प्रतिपूर्ति की सुविधा से वंचित होना पड़ेगा। सोमवार को सिद्धार्थ यूनिवर्सिटी में हुई 6 जिलों के संबद्ध कॉलेजों के प्राचार्यों की बैठक में नए प्रावधानों के बारे में विस्तार से बताया गया। पूरी सजगता और सतर्कता से आवेदन प्रक्रिया पूरी कराने की हिदायत दी गई। स्पष्ट किया गया कि त्रुटि होने पर अगर विद्यार्थी छात्रवृत्ति से वंचित हुए तो कॉलेज प्रशासन को ही जिम्मेदार माना जाएगा।
कला संकाय परिसर में हुई बैठक में जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी आशुतोष पांडेय ने बताया कि वर्ष 2016-17 से संबद्धता देने वाली संस्थाओं के अधिकारियों के डिजिटल हस्ताक्षर अनिवार्य कर दिए गए हैं। सभी छात्रों के लिए ऑनलाइन आवेदन में आधार नंबर भरना जरूरी होगा।
नवीनीकरण श्रेणी के छात्रों को यूनिवर्सिटी से आवंटित पंजीकरण नंबर भरना होगा। नियमावली की नई व्यवस्था के तहत छात्रवृत्ति-शुल्क प्रतिपूर्ति तभी दी जाएगी, जब छात्र सभी पाठ्यक्रमों की वार्षिक परीक्षा में उत्तीर्ण होगा।
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उन्होंने बताया कि अभिभावकों के आय स्लैब को वेटेज देने की व्यवस्था खत्म कर दी गई है। अब छात्रों की वरीयता सूची पाठ्यक्रम के ग्रुप व वार्षिक परीक्षा के प्राप्तांक के आधार पर ही तय होगी। महाविद्यालयों को अपनी प्रक्रिया 15 जुलाई तक पूरी करनी होगी। इसके बाद वेबसाइट लॉक हो जाएगी। उन्होंने बताया कि आवेदन फार्म की त्रुटियों के कारण जो बच्चे छात्रवृत्ति से वंचित होते हैं, उन्हें नई राहत देते हुए अब तीन दिनों के अंदर उन्हें इस बारे में जानकारी मिल जाएगी। बैंक खाते भी बदले जाएंगे।
कुलपति डॉ.रजनीकांत पांडेय ने कहा कि जिन कॉलेजों ने समय से प्रायोगिक परीक्षा नहीं कराई है, उनके परिणाम रोके गए हैं। कोशिश है कि 30 जून तक उनके परिणाम घोषित कर दिए जाएं। एक जुलाई से नए सत्र की शुरुआत होगी।
उन्होंने विज्ञान वर्ग के कॉलेजों को प्रयोगशालाओं की व्यवस्था सुदृढ़ करने का निर्देश दिया। अनुमोदित छात्र संख्या से अधिक प्रवेश हरगिज न लें, वरना स्वयं जिम्मेदार होंगे। बैठक में कुलसचिव डॉ.बीके पांडेय, परीक्षा नियंत्रक अखिलेश पाल, उप कुलसचिव महेंद्र कुमार सिंह, समाज कल्याण अधिकारी विपिन कुमार यादव, जिला पिछड़ा वर्ग कल्याण अधिकारी संजय तिवारी आदि मौजूद रहे।
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कला संकाय परिसर में हुई बैठक में जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी आशुतोष पांडेय ने बताया कि वर्ष 2016-17 से संबद्धता देने वाली संस्थाओं के अधिकारियों के डिजिटल हस्ताक्षर अनिवार्य कर दिए गए हैं। सभी छात्रों के लिए ऑनलाइन आवेदन में आधार नंबर भरना जरूरी होगा।
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नवीनीकरण श्रेणी के छात्रों को यूनिवर्सिटी से आवंटित पंजीकरण नंबर भरना होगा। नियमावली की नई व्यवस्था के तहत छात्रवृत्ति-शुल्क प्रतिपूर्ति तभी दी जाएगी, जब छात्र सभी पाठ्यक्रमों की वार्षिक परीक्षा में उत्तीर्ण होगा।
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उन्होंने बताया कि अभिभावकों के आय स्लैब को वेटेज देने की व्यवस्था खत्म कर दी गई है। अब छात्रों की वरीयता सूची पाठ्यक्रम के ग्रुप व वार्षिक परीक्षा के प्राप्तांक के आधार पर ही तय होगी। महाविद्यालयों को अपनी प्रक्रिया 15 जुलाई तक पूरी करनी होगी। इसके बाद वेबसाइट लॉक हो जाएगी। उन्होंने बताया कि आवेदन फार्म की त्रुटियों के कारण जो बच्चे छात्रवृत्ति से वंचित होते हैं, उन्हें नई राहत देते हुए अब तीन दिनों के अंदर उन्हें इस बारे में जानकारी मिल जाएगी। बैंक खाते भी बदले जाएंगे।
कुलपति डॉ.रजनीकांत पांडेय ने कहा कि जिन कॉलेजों ने समय से प्रायोगिक परीक्षा नहीं कराई है, उनके परिणाम रोके गए हैं। कोशिश है कि 30 जून तक उनके परिणाम घोषित कर दिए जाएं। एक जुलाई से नए सत्र की शुरुआत होगी।
उन्होंने विज्ञान वर्ग के कॉलेजों को प्रयोगशालाओं की व्यवस्था सुदृढ़ करने का निर्देश दिया। अनुमोदित छात्र संख्या से अधिक प्रवेश हरगिज न लें, वरना स्वयं जिम्मेदार होंगे। बैठक में कुलसचिव डॉ.बीके पांडेय, परीक्षा नियंत्रक अखिलेश पाल, उप कुलसचिव महेंद्र कुमार सिंह, समाज कल्याण अधिकारी विपिन कुमार यादव, जिला पिछड़ा वर्ग कल्याण अधिकारी संजय तिवारी आदि मौजूद रहे।