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फर्जी जाति प्रमाण पत्र से एसआई को दलित उत्पीड़न में फंसाया!
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पुलिस कंट्रोल रूम में तैनात एसआई ने डीएम से लगाई न्याय की गुहार
संवाद न्यूज एजेंसी
सिद्धार्थनगर। फर्जी जाति प्रमाण पत्र से पुलिस कंट्रोल रूम में तैनात एक एसआई पर दलित उत्पीड़न का केस दर्ज कराने का मामला प्रकाश में आया है। पीड़ित की शिकायत पर एसडीएम ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि केस दर्ज कराने वाला पिछड़ी वर्ग से है न कि अनुसूचित जाति से। इसके बाद भी फर्जीवाड़ा करने वालों पर कार्रवाई नहीं हो रही है।
पुलिस कंट्रोल रूम में तैनात एसआई देवेंद्र प्रताप सिंह ने डीएम को दिए शिकायती पत्र में कहा है कि बांसी कस्बा के आर्यनगर मोहल्ला निवासी स्व. मुरली की पुत्री उपमा वर्तमान में सदर थानाक्षेत्र के गांधी नगर मोहल्ला में रहती है। उसके द्वारा 24 अप्रैल 2019 को उन्हें फर्जी तरीके से एससी-एसटी एक्ट में फंसाया गया है। इन लोगों का जाति कहार है जो पिछड़ी जाति में आते हैं। एसआई की शिकायत पर एसडीएम बांसी ने सीओ को 30 मई 2019 को भेजे रिपोर्ट में कहा है कि तहसीलदार के जांच रिपोर्ट में वह पिछड़ी जाति की है न कि एससी है। एसआई ने मामले में केस दर्ज कराने वालों का जाति प्रमाण पत्र निरस्त करते हुए उन पर धोखाधड़ी व जालसाजी का केस दर्ज कराने की मांग डीएम से की है।
तीन वर्ष पहले निरस्त करने की भेजी गई थी रिपोर्ट
सिद्धार्थनगर। बांसी कस्बा निवासी विजय बहादुर श्रीवास्तव ने डीएम से बांसी के आर्यनगर मोहल्ला निवासी स्व. मुरली पर वर्ष 2013 में फर्जी तरीके से जाति प्रमाण पत्र बनवाकर उस पर दलित उत्पीड़न का केस दर्ज कराने के साथ ही परिवार के कई सदस्यों को नौकरी का लाभ लेने का आरोप लगाया था। उनकी शिकायत पर जनपद स्तरीय जाति सत्यापन समिति ने तीन जून 2016 को अपनी जांच रिपोर्ट में स्व. मुरली व उनके परिवार के सदस्यों का जाति प्रमाण पत्र फर्जी बताते हुए उसको निरस्त करने की संस्तुति करने के साथ ही उन पर केस दर्ज कराए जाने का भी अनुमोदन किया था। विजय बहादुर श्रीवास्तव ने डीएम से संबंधित का जाति प्रमाण पत्र निरस्त करने के साथ ही उन पर केस दर्ज कराने की मांग की है।
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संवाद न्यूज एजेंसी
सिद्धार्थनगर। फर्जी जाति प्रमाण पत्र से पुलिस कंट्रोल रूम में तैनात एक एसआई पर दलित उत्पीड़न का केस दर्ज कराने का मामला प्रकाश में आया है। पीड़ित की शिकायत पर एसडीएम ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि केस दर्ज कराने वाला पिछड़ी वर्ग से है न कि अनुसूचित जाति से। इसके बाद भी फर्जीवाड़ा करने वालों पर कार्रवाई नहीं हो रही है।
पुलिस कंट्रोल रूम में तैनात एसआई देवेंद्र प्रताप सिंह ने डीएम को दिए शिकायती पत्र में कहा है कि बांसी कस्बा के आर्यनगर मोहल्ला निवासी स्व. मुरली की पुत्री उपमा वर्तमान में सदर थानाक्षेत्र के गांधी नगर मोहल्ला में रहती है। उसके द्वारा 24 अप्रैल 2019 को उन्हें फर्जी तरीके से एससी-एसटी एक्ट में फंसाया गया है। इन लोगों का जाति कहार है जो पिछड़ी जाति में आते हैं। एसआई की शिकायत पर एसडीएम बांसी ने सीओ को 30 मई 2019 को भेजे रिपोर्ट में कहा है कि तहसीलदार के जांच रिपोर्ट में वह पिछड़ी जाति की है न कि एससी है। एसआई ने मामले में केस दर्ज कराने वालों का जाति प्रमाण पत्र निरस्त करते हुए उन पर धोखाधड़ी व जालसाजी का केस दर्ज कराने की मांग डीएम से की है।
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तीन वर्ष पहले निरस्त करने की भेजी गई थी रिपोर्ट
सिद्धार्थनगर। बांसी कस्बा निवासी विजय बहादुर श्रीवास्तव ने डीएम से बांसी के आर्यनगर मोहल्ला निवासी स्व. मुरली पर वर्ष 2013 में फर्जी तरीके से जाति प्रमाण पत्र बनवाकर उस पर दलित उत्पीड़न का केस दर्ज कराने के साथ ही परिवार के कई सदस्यों को नौकरी का लाभ लेने का आरोप लगाया था। उनकी शिकायत पर जनपद स्तरीय जाति सत्यापन समिति ने तीन जून 2016 को अपनी जांच रिपोर्ट में स्व. मुरली व उनके परिवार के सदस्यों का जाति प्रमाण पत्र फर्जी बताते हुए उसको निरस्त करने की संस्तुति करने के साथ ही उन पर केस दर्ज कराए जाने का भी अनुमोदन किया था। विजय बहादुर श्रीवास्तव ने डीएम से संबंधित का जाति प्रमाण पत्र निरस्त करने के साथ ही उन पर केस दर्ज कराने की मांग की है।
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