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Siddharthnagar News: दो हजार करोड़ के प्रोजेक्ट अटके, पेयजल के लिए कर रहे जेब ढीली
Mon, 18 Dec 2023 02:09 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
Updated Mon, 18 Dec 2023 02:09 AM IST
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सिद्धार्थनगर। शहर एवं ग्रामीण क्षेत्र में पेयजल आपूर्ति के लिए बनाए जा रहे 775 वाटर हेड अधूरे हैं। इनमें 339 परियोजनाओं को एक वर्ष पहले ही पूरा करना था, लेकिन अब सभी परियोजनाओं को मार्च 2024 तक संचालित करने का लक्ष्य रखा गया है, जबकि अधिकतर परियोजनाओं पर काम नहीं शुरू हो पाया है। इस कारण जिले के एक लाख से अधिक परिवार आठ लाख रुपये सिर्फ पीने के पानी पर खर्च कर रहे हैं।
दो हजार करोड़ रुपये लागत की इन पाइप पेयजल परियोजनाओं के तीन साल से अधूरे होने से शुद्ध पानी के लिए लोगों की जेब ढीली हो रही है। हाल यह है कि इन अधूरी परियोजनाओं के चलते शहरी व ग्रामीण क्षेत्र के जिले के एक लाख परिवार प्रति माह आठ करोड़ रुपये से अधिक का पानी खरीद कर पी रहे हैं। शहरी क्षेत्र की डेढ़ लाख आबादी में करीब 60 प्रतिशत परिवारों को आरओ वॉटर खरीदना पड़ रहा है, जबकि जिले की अन्य 10 नगर निकायों में भी पानी का धंधा खूब फलफूल रहा है। शहर के वन विभाग की कॉलोनी के रवि प्रताप ने बताया कि उनके परिवार में छह सदस्य हैं, वे हर माह 900 रुपये पानी का बिल भर रहे हैं, जबकि उनके पड़ोसी अखिलेश ने बताया कि पानी का बिल अखर रहा था तो उन्होंने घर में किश्त पर आरओ मशीन खरीदी है। शहर में 14 आरओ वॉटर प्लांट से घरों में पानी पहुंचाया जा रहा है।
ऐसी है स्थिति
जल जीवन मिशन के जिले के 2067 गांवों को पेयजल से संतृप्त करने के लिए पूर्व में संचालित वाटर सप्लाई के अतिरिक्त 762 नई परियोजनाएं बननी थीं। इसके तहत वर्ष 2019-20 में 176 परियोजना पर कार्य शुरू हुआ। जिनमें अभी तक सभी परियोजनाएं अधूरी हैं। कार्यदाई कंपनी ने इनमें 70 परियोजनाओं पर बोरिंग कराकर पाइप से लोगों के घर पानी सप्लाई कर रही है। जबकि वाटरहेड टैंक निर्माण के साथ ही पाइप बिछाने के काम भी कई जगह अधूरे पड़े है। इसके बाद 163 एवं 423 परियोजनाओं पर कार्य शुरू होना था, इनमें कई पर काम ही नहीं शुरू हो सका है। कहीं टैंक बनाकर छोड़ दिया गया तो कहीं पाइप और टोटी लगाना भूल गए। इनमें कुछ परियोजनाओं के लिए मिली भूमि निचले हिस्से में होने के कारण निर्माण कार्य में देरी हो रही है। वहीं नौ परियोजनाओं के लिए भूमि नहीं मिलने से भी वाॅटर हेड टैंक का निर्माण अधर में पड़ा हुआ है।
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हर परियोजना पर खर्च होने हैं दो से चार करोड़
प्रत्येक वाॅटर हेड टैंक पाइप पेयजल परियोजना के निर्माण पर दो से चार करोड़ रुपये लागत है। इनमें तीन से अधिक गांव के टोले शामिल होने पर परियोजना की लागत बढ़ जाती है। इसके तहत एक लाख लीटर क्षमता की टंकी बनानी है। साथ ही बाउंड्रीवाल, पंपघर बोरिंग व संबंधित गांवों के प्रत्येक घर तक वाटर सप्लाई पाइप बिछाए जाने है। इनमें तीन गांवों से अधिक क्षेत्र में वाटर सप्लाई देने के लिए पाइप बिछाए जाने पर लागत बढ़ जाएगी।
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ठेकेदार कंपनी ने दूसरे ठेकेदारों को बांटे काम, हो रही देरी
जल निगम के एक इंजीनियर ने बताया कि जिले में पाइप पेयजल परियोजना पर काम कर रहे कंपनियों ने स्थानीय ठेकेदारों को काम बांट रखे हैं। इनमें एक कंपनी के पास 176 परियोजना है। दूसरी कंपनी के पास 163 और तीसरी कंपनी के पास 423 परियोजनाएं हैं। इन कंपनियों ने स्थानीय ठेकेदारों को भी काम बांटा है, जिनके पास तकनीकी दक्षता वाले श्रमिकों की कमी के कारण काम में देरी हो रही है। एक ही कंपनी के पास कई परियोजनाएं होने के कारण वह एक जगह अधूरा काम छोड़कर दूसरे जगह काम करने में जुट जाती हैं, तो कार्य अधूरे ही रह जा रहे हैं। वहीं कुछ स्थानीय ठेकेदारों के काम बीच में छोड़ देने से भी काम प्रभावित हो रहा है। इन कंपनियों को सभी परियोजनाओं के निर्माण के 10 वर्ष बाद तक उसके रखरखाव की जिम्मेदारी होगी।
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जमीन पर बिछा दिया पाइप, नहीं हुई वाटर सप्लाई
इटवा। ग्राम भनवापुर में दो वर्ष पूर्व बने वाटरहेड टैंक से चौखड़ा गांव तक के लोगों को पानी मिलना था। इसके तहत भूमिगत पाइप डालने थे, लेकिन कई जगहों पर वाटर सप्लाई पाइप जमीन पर बिछाकर छोड़ दिया गया है। यहां तक कि भनवापुर व चौखड़ा के बीच में स्थित राजकीय महाविद्यालय के पास जमीन पर बिछी पाइप काटकर लोग उठा ले गए है। परंतु गांवों में छह माह पूर्व इंटरलाकिंग सड़कों को खोदकर जलापूर्ति के लिये पाइप डाल दिया गया है। चौखड़ा गांव के सुनील मोदनवाल कहते हैं कि केवल बजट खर्च करने तक यह योजना सिमटकर रह गई है। शुद्ध पानी के लिए हम लोग तरस रहे है। वही खुनियांव ब्लॉक के ग्राम लोहटा में पानी टंकी निर्माण कार्य अभी प्रारंभ ही नहीं हुआ है।
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अधूरी परियोजना की हैंडओवर, वाटर सप्लाई ठप
भनवापुर। क्षेत्र के पेंड़ारी मुस्तहकम गांव में दो करोड़ 25 लाख की लागत से जल निगम ने पानी की टंकी का निर्माण कराया। इस टंकी के माध्यम से पेंड़ारी मुस्तहकम व धनोहरा गांवों के करीब 300 घरों को पेयजल उपलब्ध कराने की योजना के तहत पाइप लाइन भी बिछा दी गई। एक दिन संचालित कर ग्राम पंचायत को हैंडओवर भी कर दिया गया। पेंड़ारी मुस्तहकम गांव निवासी गरीबुल्लाह ने कहा कि दो साल से पानी की टंकी बनी है। अभी तक शुरुआत में सिर्फ एक दिन घर की टोटी में पानी आया था उसके बाद से अभी तक पानी नहीं मिला। जिस कारण मजबूरी में घर के नल का पानी पी रहे हैं।
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तीन साल पहले बनकर तैयार, नहीं शुरू हुई सप्लाई
भनवापुर के ग्राम पंचायत सिरसिया में 2020 पानी की टंकी बनकर तैयार है। इससे सिरसिया, सिसवा व पचउथ लतीफपुर के करीब 200 घरों को पानी उपलब्ध कराया जाना है। पाइप लाइन बिछाने के कुछ दिन बाद नवंबर 2022 में दो दिन पानी आया था उसके बाद पानी सप्लाई बंद हो गई। गांव के शिव कुमार श्रीवास्तव ने बताया कि अभी टंकी का निर्माण कार्य अधूरा है, जिस कारण वाटर सप्लाई नहीं मिल पा रही है। जलनिगम के अवर अभियंता अतुल कुमार अंजान ने कहा कि पानी की आपूर्ति की गई थी। पाइप लाइन में लीकेज की समस्या आ रही थी जिसके कारण पानी की सप्लाई बंद कर दिया गया है।
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हाथी दांत साबित हो रहा वाटरहेड टैंक, नहीं मिला शुद्ध पानी
तुलसियापुर। बढ़नी ब्लॉक के अहिरौला में लोगों को पेयजल उपलब्ध कराने के लिए बनी पानी की टंकी निष्प्रयोज्य साबित हो रही है। यहां के लोगों का कहना है कि निर्माण के बाद से तो कभी भी एक महीने लगातार पानी उन्हें नहीं मिल पाया। लोगों का कहना है कि गांव में बने पानी की टंकी से कभी भी पानी पीने को नहीं मिला। जब टंकी बन रहा था तो लगा कि अब शुद्ध पानी नसीब होगा परंतु यह केवल हाथी के दांत की तरह दिखावा साबित हो रहे है। अहिरौला निवासी प्रेमचंद का कहना है कि निर्माण के बाद से ही इसका कोई उपयोग नहीं रहा, लोग निजी हैंडपंप का दूषित पेयजल प्रयोग करने को मजबूर है।
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10 वर्ष से अधूरा वाॅटर हेड टैंक, नहीं हुआ संचालित
बर्डपुर। बर्डपुर नंबर 10 में 10 वर्ष पूर्व बनी पानी की टंकी से अभी तक पेयजल की आपूर्ति शुरू नहीं हो सकी है। इस ग्राम पंचायत के देवरा चौधरी टोले के पूर्वी छोर पर अधूरे पानी की टंकी के संचालन का अब तक किया गया प्रयास असफल रहा। दो बार पाइप निकालकर नई पाइप लाइन बिछाई गई थी, फिर भी सफलता नहीं मिल सकी। यही कारण है कि इस टंकी के निर्माण के बाद किसी भी ग्राम वासी को एक बूंद पानी अभी तक नसीब नहीं हो सका, जबकि लाखों रुपये खर्च हो गए। सेमरी निवासी हरिशंकर चौधरी कहते हैं कि पानी की टंकी के निर्माण के बाद भी सप्लाई नहीं होने से लोग पेयजल के लिए तरस रहे हैं।
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लोगों को पेयजल मुहैया कराने की योजना के तहत वाटरहेड टैंक पाइप पेजयल परियोजना से संतृप्त करने को निर्माण कार्य चल रहा है। इन्हें जल्द पूर्ण कराकर लोगों को पेयजल उपलब्ध कराया जाएगा।
-मदनराम पाल, अधिशासी अभियंता जलनिगम
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दो हजार करोड़ रुपये लागत की इन पाइप पेयजल परियोजनाओं के तीन साल से अधूरे होने से शुद्ध पानी के लिए लोगों की जेब ढीली हो रही है। हाल यह है कि इन अधूरी परियोजनाओं के चलते शहरी व ग्रामीण क्षेत्र के जिले के एक लाख परिवार प्रति माह आठ करोड़ रुपये से अधिक का पानी खरीद कर पी रहे हैं। शहरी क्षेत्र की डेढ़ लाख आबादी में करीब 60 प्रतिशत परिवारों को आरओ वॉटर खरीदना पड़ रहा है, जबकि जिले की अन्य 10 नगर निकायों में भी पानी का धंधा खूब फलफूल रहा है। शहर के वन विभाग की कॉलोनी के रवि प्रताप ने बताया कि उनके परिवार में छह सदस्य हैं, वे हर माह 900 रुपये पानी का बिल भर रहे हैं, जबकि उनके पड़ोसी अखिलेश ने बताया कि पानी का बिल अखर रहा था तो उन्होंने घर में किश्त पर आरओ मशीन खरीदी है। शहर में 14 आरओ वॉटर प्लांट से घरों में पानी पहुंचाया जा रहा है।
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जल जीवन मिशन के जिले के 2067 गांवों को पेयजल से संतृप्त करने के लिए पूर्व में संचालित वाटर सप्लाई के अतिरिक्त 762 नई परियोजनाएं बननी थीं। इसके तहत वर्ष 2019-20 में 176 परियोजना पर कार्य शुरू हुआ। जिनमें अभी तक सभी परियोजनाएं अधूरी हैं। कार्यदाई कंपनी ने इनमें 70 परियोजनाओं पर बोरिंग कराकर पाइप से लोगों के घर पानी सप्लाई कर रही है। जबकि वाटरहेड टैंक निर्माण के साथ ही पाइप बिछाने के काम भी कई जगह अधूरे पड़े है। इसके बाद 163 एवं 423 परियोजनाओं पर कार्य शुरू होना था, इनमें कई पर काम ही नहीं शुरू हो सका है। कहीं टैंक बनाकर छोड़ दिया गया तो कहीं पाइप और टोटी लगाना भूल गए। इनमें कुछ परियोजनाओं के लिए मिली भूमि निचले हिस्से में होने के कारण निर्माण कार्य में देरी हो रही है। वहीं नौ परियोजनाओं के लिए भूमि नहीं मिलने से भी वाॅटर हेड टैंक का निर्माण अधर में पड़ा हुआ है।
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हर परियोजना पर खर्च होने हैं दो से चार करोड़
प्रत्येक वाॅटर हेड टैंक पाइप पेयजल परियोजना के निर्माण पर दो से चार करोड़ रुपये लागत है। इनमें तीन से अधिक गांव के टोले शामिल होने पर परियोजना की लागत बढ़ जाती है। इसके तहत एक लाख लीटर क्षमता की टंकी बनानी है। साथ ही बाउंड्रीवाल, पंपघर बोरिंग व संबंधित गांवों के प्रत्येक घर तक वाटर सप्लाई पाइप बिछाए जाने है। इनमें तीन गांवों से अधिक क्षेत्र में वाटर सप्लाई देने के लिए पाइप बिछाए जाने पर लागत बढ़ जाएगी।
ठेकेदार कंपनी ने दूसरे ठेकेदारों को बांटे काम, हो रही देरी
जल निगम के एक इंजीनियर ने बताया कि जिले में पाइप पेयजल परियोजना पर काम कर रहे कंपनियों ने स्थानीय ठेकेदारों को काम बांट रखे हैं। इनमें एक कंपनी के पास 176 परियोजना है। दूसरी कंपनी के पास 163 और तीसरी कंपनी के पास 423 परियोजनाएं हैं। इन कंपनियों ने स्थानीय ठेकेदारों को भी काम बांटा है, जिनके पास तकनीकी दक्षता वाले श्रमिकों की कमी के कारण काम में देरी हो रही है। एक ही कंपनी के पास कई परियोजनाएं होने के कारण वह एक जगह अधूरा काम छोड़कर दूसरे जगह काम करने में जुट जाती हैं, तो कार्य अधूरे ही रह जा रहे हैं। वहीं कुछ स्थानीय ठेकेदारों के काम बीच में छोड़ देने से भी काम प्रभावित हो रहा है। इन कंपनियों को सभी परियोजनाओं के निर्माण के 10 वर्ष बाद तक उसके रखरखाव की जिम्मेदारी होगी।
जमीन पर बिछा दिया पाइप, नहीं हुई वाटर सप्लाई
इटवा। ग्राम भनवापुर में दो वर्ष पूर्व बने वाटरहेड टैंक से चौखड़ा गांव तक के लोगों को पानी मिलना था। इसके तहत भूमिगत पाइप डालने थे, लेकिन कई जगहों पर वाटर सप्लाई पाइप जमीन पर बिछाकर छोड़ दिया गया है। यहां तक कि भनवापुर व चौखड़ा के बीच में स्थित राजकीय महाविद्यालय के पास जमीन पर बिछी पाइप काटकर लोग उठा ले गए है। परंतु गांवों में छह माह पूर्व इंटरलाकिंग सड़कों को खोदकर जलापूर्ति के लिये पाइप डाल दिया गया है। चौखड़ा गांव के सुनील मोदनवाल कहते हैं कि केवल बजट खर्च करने तक यह योजना सिमटकर रह गई है। शुद्ध पानी के लिए हम लोग तरस रहे है। वही खुनियांव ब्लॉक के ग्राम लोहटा में पानी टंकी निर्माण कार्य अभी प्रारंभ ही नहीं हुआ है।
अधूरी परियोजना की हैंडओवर, वाटर सप्लाई ठप
भनवापुर। क्षेत्र के पेंड़ारी मुस्तहकम गांव में दो करोड़ 25 लाख की लागत से जल निगम ने पानी की टंकी का निर्माण कराया। इस टंकी के माध्यम से पेंड़ारी मुस्तहकम व धनोहरा गांवों के करीब 300 घरों को पेयजल उपलब्ध कराने की योजना के तहत पाइप लाइन भी बिछा दी गई। एक दिन संचालित कर ग्राम पंचायत को हैंडओवर भी कर दिया गया। पेंड़ारी मुस्तहकम गांव निवासी गरीबुल्लाह ने कहा कि दो साल से पानी की टंकी बनी है। अभी तक शुरुआत में सिर्फ एक दिन घर की टोटी में पानी आया था उसके बाद से अभी तक पानी नहीं मिला। जिस कारण मजबूरी में घर के नल का पानी पी रहे हैं।
तीन साल पहले बनकर तैयार, नहीं शुरू हुई सप्लाई
भनवापुर के ग्राम पंचायत सिरसिया में 2020 पानी की टंकी बनकर तैयार है। इससे सिरसिया, सिसवा व पचउथ लतीफपुर के करीब 200 घरों को पानी उपलब्ध कराया जाना है। पाइप लाइन बिछाने के कुछ दिन बाद नवंबर 2022 में दो दिन पानी आया था उसके बाद पानी सप्लाई बंद हो गई। गांव के शिव कुमार श्रीवास्तव ने बताया कि अभी टंकी का निर्माण कार्य अधूरा है, जिस कारण वाटर सप्लाई नहीं मिल पा रही है। जलनिगम के अवर अभियंता अतुल कुमार अंजान ने कहा कि पानी की आपूर्ति की गई थी। पाइप लाइन में लीकेज की समस्या आ रही थी जिसके कारण पानी की सप्लाई बंद कर दिया गया है।
हाथी दांत साबित हो रहा वाटरहेड टैंक, नहीं मिला शुद्ध पानी
तुलसियापुर। बढ़नी ब्लॉक के अहिरौला में लोगों को पेयजल उपलब्ध कराने के लिए बनी पानी की टंकी निष्प्रयोज्य साबित हो रही है। यहां के लोगों का कहना है कि निर्माण के बाद से तो कभी भी एक महीने लगातार पानी उन्हें नहीं मिल पाया। लोगों का कहना है कि गांव में बने पानी की टंकी से कभी भी पानी पीने को नहीं मिला। जब टंकी बन रहा था तो लगा कि अब शुद्ध पानी नसीब होगा परंतु यह केवल हाथी के दांत की तरह दिखावा साबित हो रहे है। अहिरौला निवासी प्रेमचंद का कहना है कि निर्माण के बाद से ही इसका कोई उपयोग नहीं रहा, लोग निजी हैंडपंप का दूषित पेयजल प्रयोग करने को मजबूर है।
10 वर्ष से अधूरा वाॅटर हेड टैंक, नहीं हुआ संचालित
बर्डपुर। बर्डपुर नंबर 10 में 10 वर्ष पूर्व बनी पानी की टंकी से अभी तक पेयजल की आपूर्ति शुरू नहीं हो सकी है। इस ग्राम पंचायत के देवरा चौधरी टोले के पूर्वी छोर पर अधूरे पानी की टंकी के संचालन का अब तक किया गया प्रयास असफल रहा। दो बार पाइप निकालकर नई पाइप लाइन बिछाई गई थी, फिर भी सफलता नहीं मिल सकी। यही कारण है कि इस टंकी के निर्माण के बाद किसी भी ग्राम वासी को एक बूंद पानी अभी तक नसीब नहीं हो सका, जबकि लाखों रुपये खर्च हो गए। सेमरी निवासी हरिशंकर चौधरी कहते हैं कि पानी की टंकी के निर्माण के बाद भी सप्लाई नहीं होने से लोग पेयजल के लिए तरस रहे हैं।
लोगों को पेयजल मुहैया कराने की योजना के तहत वाटरहेड टैंक पाइप पेजयल परियोजना से संतृप्त करने को निर्माण कार्य चल रहा है। इन्हें जल्द पूर्ण कराकर लोगों को पेयजल उपलब्ध कराया जाएगा।
-मदनराम पाल, अधिशासी अभियंता जलनिगम