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Siddharthnagar News: एक हजार रुपये क्विंटल मुनाफा...नेपाल भेज रहे चावल
Sat, 24 Aug 2024 03:44 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
Updated Sat, 24 Aug 2024 03:44 AM IST
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सिद्धार्थनगर। नेपाल में चावल की मांग और भाव बढ़ने के बाद तस्करों ने बॉर्डर पार करना शुरू कर दिया। सीमावर्ती क्षेत्र से गांव में घूमकर चावल खरीद रहे हैं और फिर उसे बार्डर पार कर दे हैं। पिछले कई दिनों तक बार्डर पर चावल की तस्करी बढ़ी है। जब एकाएक चावल की तस्करी बढ़ने के बारे में जानकारी ली गई तो पता चला कि नेपाल में भारतीय चावल की डिमांड है। इसमें मोटा चावल पर एक हजार और महीन चावल पर 1500-1800 रुपये मुनाफा है। इसलिए इस समय तस्कर चावल को बार्डर पार पहुंचा रहे हैं। इसमें पूरा रैकेट काम कर रहा है।
नेपाल बार्डर से लगने वाली जिले की 68 किलोमीटर सीमा अब संवेदनशील हो गई। क्योंकि खुले बार्डर पर तस्करों की नजर पड़ गई है। जो मांग और सीजन के हिसाब से दोनों देशों से सामान इस पार से उस पार करने का कार्य करते हैं। चांदी से लेकर मादक पदार्थ और उर्वरक से लेकर अनाज और कास्टमेटिक के सामान की तस्करी होती है। मौजूदा समय में चावल की तस्करी बार्डर पर बढ़ी है। तस्करी पिछले एक माह से तेज हो गई है। तस्करी के पीछे की वजह के बारे में जब जानकारी लेने की कोशिश की गई तो नेपाल के लोगों ने बताया कि इस समय देश में स्थानीय चावल की कमी है। इसलिए मोटा चावल की कीमत जुलाई माह के तुलना में एक हजार रुपये प्रति क्विंटल बढ़ा है। जबकि, महीन चावल की कीमत 1500-1800 रुपये बोरी बढ़ा है।
एकाएक कीमत बढ़ने के बाद नेपाल अढ़ती भारतीयों के संपर्क में आ गए और चावल की मांग करने लगे। इसके बाद भारतीय तस्कर चावल उठाकर नेपाल में भेजने लगे हैं। इसलिए एकाएक तस्करी बढ़ गई है। तस्करी किसी प्रकार होती है, इसके बारे में जानकारी लेने की कोशिश की गई तो बार्डर से जुड़े एक व्यक्ति ने एक फोटो और वीडियो मुहैया कराया, जिसमें बाइक पर दिन में ही दो-दो बाेरी करके चावल लेकर जाते हुए देखे जा सकते हैं। नाम नहीं छापने की शर्त पर बार्डर से लगे सिपाही गांव निवासी एक व्यक्ति ने कहा कि पूरे दिन चावल उठाकर एक स्थान पर रखते हैं। इसके बाद बार्डर पार कर देते हैं। कुछ लोग बाइक और साइकिल से ही समय देखकर उस पार पहुंच जाते हैं।
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यह केवल लोटन कोतवाली क्षेत्र के बार्डर की स्थिति नहीं है। मोहाना क्षेत्र के ककरहवा सहित कई इलाका है, जहां से तस्करी हो रही है। सुरक्षा एजेंसियों के सख्ती के बीच सीमा पार चावल कैसे जा रहा है, यह बड़ा सवाल है। अगर तस्करी का यहीं हाल रहा तो यहां भी किल्लत होगी। क्योंकि एक दिन में 100 क्विंटल से अधिक जा रहा है। इस संबंध में एसपी प्राची सिंह ने बताया कि सीमावर्ती थानों की पुलिस को अलर्ट किया गया है, जो नियमित चेकिंग करती है। लगातार कार्रवाई भी कर रही है।
इस प्रकार काम करता है नेटवर्क
बार्डर से जुड़े एक व्यक्ति ने बताया कि चावल की तस्करी में पूरा नेटवर्क काम करता है। इसमें एक व्यक्ति गांव- गांव घूमकर चावल पता करता है। तय करता है और खरीद करता है। खरीदार कोई दूसरा होता है। जो सौदा होने के बाद दाम देकर खरीदते हैं। इसके बाद सीमा पर तय एक स्थान पर रखते हैं, जहां से रात में या फिर मौका देखकर दिन में ही बार्डर पार कर देते हैं। डिलिवरी देने के बाद नेपाल के व्यक्ति की जिम्मेदार होती है। इस पूरे चैनल में चार स्तर पर काम होता है। काम और मुनाफा के हिसाब से हिस्सा तय होता है।
केवल मधेश में होता है चावल का उत्पादन
सीमा से लगभग 35 किलोमीटर मधेश इलाका है जो भारतीय जमीन की तरह से समतल है और धान व गेहूं की खेती हो है। बाकी आगे पहाड़ शुरू हो जाता है, जहां धान और गेहूं की खेती नहीं होती है। जो मधेश का इलाका है, वहां का चावल जबतक बाजार में रहता है, तब तक रेट में कुछ अंतर रहता है। जैसे ही यहां का चावल कम हुआ, डिमांड और मूल्य दोनों बढ़ जाता है। उसकी मांग पूरी करने के लिए तस्कर लगते हैं और क्विंटल के हिसाब से भेजते हैं। सीमा से लगने वाले नेपाल के बाजार में छोटा-छोटा पैकेट करके बेचते हैं। इसमें इनको मुनाफा होता है। पहाड़ के लोग आकर खरीदकर ले जाते हैं।
दोनों देशों का बाजार रेट
नेपाल के कारोबारी राजेश जायसवाल ने बताया कि मोटा चावल भारतीय मुद्रा से 4000 हजार रुपये प्रति क्विंटल बिक रहा है। जबकि महीन जैसा साभा मंसूरी सहित अन्य महीन चावल 5000 से 55000 रुपये प्रति क्विंटल बिक रहा है। जबकि, जुलाई में एक हजार रुपये मोटा और 1500-1800 रुपये प्रति क्विंटल कम था। अब नई फसल आने तक रेट गिरने की उम्मीद नहीं है।
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नेपाल बार्डर से लगने वाली जिले की 68 किलोमीटर सीमा अब संवेदनशील हो गई। क्योंकि खुले बार्डर पर तस्करों की नजर पड़ गई है। जो मांग और सीजन के हिसाब से दोनों देशों से सामान इस पार से उस पार करने का कार्य करते हैं। चांदी से लेकर मादक पदार्थ और उर्वरक से लेकर अनाज और कास्टमेटिक के सामान की तस्करी होती है। मौजूदा समय में चावल की तस्करी बार्डर पर बढ़ी है। तस्करी पिछले एक माह से तेज हो गई है। तस्करी के पीछे की वजह के बारे में जब जानकारी लेने की कोशिश की गई तो नेपाल के लोगों ने बताया कि इस समय देश में स्थानीय चावल की कमी है। इसलिए मोटा चावल की कीमत जुलाई माह के तुलना में एक हजार रुपये प्रति क्विंटल बढ़ा है। जबकि, महीन चावल की कीमत 1500-1800 रुपये बोरी बढ़ा है।
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एकाएक कीमत बढ़ने के बाद नेपाल अढ़ती भारतीयों के संपर्क में आ गए और चावल की मांग करने लगे। इसके बाद भारतीय तस्कर चावल उठाकर नेपाल में भेजने लगे हैं। इसलिए एकाएक तस्करी बढ़ गई है। तस्करी किसी प्रकार होती है, इसके बारे में जानकारी लेने की कोशिश की गई तो बार्डर से जुड़े एक व्यक्ति ने एक फोटो और वीडियो मुहैया कराया, जिसमें बाइक पर दिन में ही दो-दो बाेरी करके चावल लेकर जाते हुए देखे जा सकते हैं। नाम नहीं छापने की शर्त पर बार्डर से लगे सिपाही गांव निवासी एक व्यक्ति ने कहा कि पूरे दिन चावल उठाकर एक स्थान पर रखते हैं। इसके बाद बार्डर पार कर देते हैं। कुछ लोग बाइक और साइकिल से ही समय देखकर उस पार पहुंच जाते हैं।
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यह केवल लोटन कोतवाली क्षेत्र के बार्डर की स्थिति नहीं है। मोहाना क्षेत्र के ककरहवा सहित कई इलाका है, जहां से तस्करी हो रही है। सुरक्षा एजेंसियों के सख्ती के बीच सीमा पार चावल कैसे जा रहा है, यह बड़ा सवाल है। अगर तस्करी का यहीं हाल रहा तो यहां भी किल्लत होगी। क्योंकि एक दिन में 100 क्विंटल से अधिक जा रहा है। इस संबंध में एसपी प्राची सिंह ने बताया कि सीमावर्ती थानों की पुलिस को अलर्ट किया गया है, जो नियमित चेकिंग करती है। लगातार कार्रवाई भी कर रही है।
इस प्रकार काम करता है नेटवर्क
बार्डर से जुड़े एक व्यक्ति ने बताया कि चावल की तस्करी में पूरा नेटवर्क काम करता है। इसमें एक व्यक्ति गांव- गांव घूमकर चावल पता करता है। तय करता है और खरीद करता है। खरीदार कोई दूसरा होता है। जो सौदा होने के बाद दाम देकर खरीदते हैं। इसके बाद सीमा पर तय एक स्थान पर रखते हैं, जहां से रात में या फिर मौका देखकर दिन में ही बार्डर पार कर देते हैं। डिलिवरी देने के बाद नेपाल के व्यक्ति की जिम्मेदार होती है। इस पूरे चैनल में चार स्तर पर काम होता है। काम और मुनाफा के हिसाब से हिस्सा तय होता है।
केवल मधेश में होता है चावल का उत्पादन
सीमा से लगभग 35 किलोमीटर मधेश इलाका है जो भारतीय जमीन की तरह से समतल है और धान व गेहूं की खेती हो है। बाकी आगे पहाड़ शुरू हो जाता है, जहां धान और गेहूं की खेती नहीं होती है। जो मधेश का इलाका है, वहां का चावल जबतक बाजार में रहता है, तब तक रेट में कुछ अंतर रहता है। जैसे ही यहां का चावल कम हुआ, डिमांड और मूल्य दोनों बढ़ जाता है। उसकी मांग पूरी करने के लिए तस्कर लगते हैं और क्विंटल के हिसाब से भेजते हैं। सीमा से लगने वाले नेपाल के बाजार में छोटा-छोटा पैकेट करके बेचते हैं। इसमें इनको मुनाफा होता है। पहाड़ के लोग आकर खरीदकर ले जाते हैं।
दोनों देशों का बाजार रेट
नेपाल के कारोबारी राजेश जायसवाल ने बताया कि मोटा चावल भारतीय मुद्रा से 4000 हजार रुपये प्रति क्विंटल बिक रहा है। जबकि महीन जैसा साभा मंसूरी सहित अन्य महीन चावल 5000 से 55000 रुपये प्रति क्विंटल बिक रहा है। जबकि, जुलाई में एक हजार रुपये मोटा और 1500-1800 रुपये प्रति क्विंटल कम था। अब नई फसल आने तक रेट गिरने की उम्मीद नहीं है।