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हिंदी की समृद्धि बहुत जरूरी
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हिंदी की समृद्धि बहुत जरूरी
‘अमर उजाला’ के ‘हिंदी हैं हम’ अभियान में बोले अधिवक्ता
सरकार को आगे आकर इसे राजभाषा का दर्जा देना होगा
अमर उजाला ब्यूरो
सिद्धार्थनगर। हिंदी देश की वह भाषा है जो लोगों को एकता के सूत्र में पिरोए हुए है, भाईचारा भी इसके जरिये कायम है। यह भाषा तेजी से सरकारी कार्यालयों में प्रयोग की जा रही है। राज्य सरकार को भी इस पर ध्यान देना होगा। ‘अमर उजाला’ के ‘हिंदी हैं हम’ अभियान में अधिवक्ताओं ने भी अपने विचार व्यक्त किए हैं। सभी का मानना है कि हिंदी के आगे बढ़ने से देश की और तरक्की होगी।
स्थानीय दीवानी कचहरी के अधिवक्ता वीरेंद्र प्रसाद पांडेय कहते हैं कि हिंदी भाषा बोलने से हर किसी को गर्व महसूस होता है, क्योंकि इस भाषा का जुड़ाव सीधे हिंदुस्तान से है। हिंदी के लिए सरकारें रोजगार के रास्ते निकाले ताकि लोगों को अधिक से अधिक रोजगार मिल सकें। रोजगार के जरिये ही यह भाषा और आगे बढ़ेगी। अधिवक्ता सत्यप्रकाश श्रीवास्तव का कहना है कि शिक्षण संस्थानों में हिंदी के विद्यार्थियों को विशेष प्रशिक्षण दिया जाना चाहिए। साथ ही सीटों की संख्या में भी बढ़ोतरी होनी चाहिए। अधिक से अधिक विद्यार्थी प्रवेश लेंगे तो हिंदी का प्रयोग और बढ़ेगा। महिला अधिवक्ता सबा सिद्दीकी कहती हैं कि हिंदी मेरे लिए व्यक्तिगत रूप से प्राणवायु की तरह रही है। हिंदी में अपार संभावनाएं हैं और हिंदी के बल पर बड़ी से बड़ी सफलताएं प्राप्त की जा सकती हैं। अधिवक्ता सना सिद्दीकी कहती हैं कि हिंदी के प्रति अंतर्मन में आदर भाव हो, तभी हिंदी सार्थक है। आज हिंदी भारत और विदेश दोनों जगह अपना ध्वज फहरा रही है। हिंदी की अनिवार्यता से हिंदी के प्रति आदर भाव और भी विकसित होगा।
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‘अमर उजाला’ के ‘हिंदी हैं हम’ अभियान में बोले अधिवक्ता
सरकार को आगे आकर इसे राजभाषा का दर्जा देना होगा
अमर उजाला ब्यूरो
सिद्धार्थनगर। हिंदी देश की वह भाषा है जो लोगों को एकता के सूत्र में पिरोए हुए है, भाईचारा भी इसके जरिये कायम है। यह भाषा तेजी से सरकारी कार्यालयों में प्रयोग की जा रही है। राज्य सरकार को भी इस पर ध्यान देना होगा। ‘अमर उजाला’ के ‘हिंदी हैं हम’ अभियान में अधिवक्ताओं ने भी अपने विचार व्यक्त किए हैं। सभी का मानना है कि हिंदी के आगे बढ़ने से देश की और तरक्की होगी।
स्थानीय दीवानी कचहरी के अधिवक्ता वीरेंद्र प्रसाद पांडेय कहते हैं कि हिंदी भाषा बोलने से हर किसी को गर्व महसूस होता है, क्योंकि इस भाषा का जुड़ाव सीधे हिंदुस्तान से है। हिंदी के लिए सरकारें रोजगार के रास्ते निकाले ताकि लोगों को अधिक से अधिक रोजगार मिल सकें। रोजगार के जरिये ही यह भाषा और आगे बढ़ेगी। अधिवक्ता सत्यप्रकाश श्रीवास्तव का कहना है कि शिक्षण संस्थानों में हिंदी के विद्यार्थियों को विशेष प्रशिक्षण दिया जाना चाहिए। साथ ही सीटों की संख्या में भी बढ़ोतरी होनी चाहिए। अधिक से अधिक विद्यार्थी प्रवेश लेंगे तो हिंदी का प्रयोग और बढ़ेगा। महिला अधिवक्ता सबा सिद्दीकी कहती हैं कि हिंदी मेरे लिए व्यक्तिगत रूप से प्राणवायु की तरह रही है। हिंदी में अपार संभावनाएं हैं और हिंदी के बल पर बड़ी से बड़ी सफलताएं प्राप्त की जा सकती हैं। अधिवक्ता सना सिद्दीकी कहती हैं कि हिंदी के प्रति अंतर्मन में आदर भाव हो, तभी हिंदी सार्थक है। आज हिंदी भारत और विदेश दोनों जगह अपना ध्वज फहरा रही है। हिंदी की अनिवार्यता से हिंदी के प्रति आदर भाव और भी विकसित होगा।
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