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दस वर्षों से भवन तैयार, दिल के मरीजों का नहीं हो रहा उपचार

Mon, 28 Jun 2021 10:27 PM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Mon, 28 Jun 2021 10:27 PM IST
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Heart patients are not being treated
दिल के मरीजों का नहीं हो रहा उपचार
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दस वर्षों से भवन तैयार, न डॉक्टर मिले, न ही उपकरण
जिला अस्पताल में हार्ट केयर यूनिट तैयार, दिल के मरीज परेशान
संवाद न्यूज एजेंसी
सिद्धार्थनगर। मेडिकल कॉलेज में समायोजन हो चुके संयुक्त जिला अस्पताल की हार्ट केयर यूनिट 10 साल पहले बनी थी। आज तक यहां न कोई मशीन पहुंची और न कोई डॉक्टर। वर्तमान में यूनिट में ताला लगा हुआ है। इससे जुड़े मरीजों को रेफर करना मजबूरी है। मेडिकल कॉलेज में समायोजन होने के बाद जल्द ही हार्ट केयर यूनिट शुरू होने की उम्मीदें बढ़ गई हैं।
संयुक्त जिला चिकित्सालय परिसर में हृदय रोग से जुड़े मरीजों के समुचित इलाज के लिए लगभग 60 लाख रुपये की लागत से मार्च 2010 में हार्ट केयर यूनिट बनकर तैयार हुई। शासन स्तर से चिकित्सकों, कर्मियों की तैनाती नहीं होने और उपकरणों को उपलब्ध नहीं कराने से भवन में ताला लगा हुआ है। इसके बाद प्रदेश में कई दलों की सरकारें प्रदेश में शासन कर चुकी हैं। पर, किसी ने इस ओर ध्यान नहीं दिया। ऐसे में हृदय संबंधी बीमारी से पीड़ित बड़े शहरों या निजी चिकित्सकों पर निर्भर रहते हैं।
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मेडिकल कॉलेज रेफर किए जाते हैं मरीज
संयुक्त जिला अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड में हार्ट से संबंधित हर सप्ताह औसतन पांच से 10 मरीज बाबा राघवदास मेडिकल कॉलेज गोरखपुर रेफर किए जाते हैं। इमरजेंसी वार्ड में ड्यूटी करने वाले बालरोग विशेषज्ञ डॉ. संजय चौधरी कहते हैं कि ऐसे मरीजों को प्राथमिक उपचार के बाद मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया जाता है।
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अब तक नहीं हुई सुनवाई
हार्ट केयर यूनिट का संचालन करने को लेकर सीएमओ, सीएमएस द्वारा समय-समय पर पत्र व्यवहार किया जाता रहा है। उच्चस्तरीय बैठकों में उच्चाधिकारियों के समक्ष मुद्दा उठता है। निस्तारण का आश्वासन भी मिलता है, पर बीते 10 वर्षों से जिम्मेदारों की अनदेखी जनपदवासियों को भारी पड़ रही है। केंद्र, प्रदेश में भाजपा की सरकार, जनप्रतिनिधि भी उन्हीं के हैं। इस जिले का चयन नीति आयोग ने अति पिछड़े क्षेत्रों में चयन भी किया है, बावजूद कोई पहल नहीं हो पा रही है।

मेडिकल कॉलेज में हार्ट केयर यूनिट की स्थापना को लेकर संसाधनों की उपलब्धता के साथ ही स्वीकृत पदों के सापेक्ष तैनाती के लिए उच्चस्तर पर पत्र लिखा जाएगा। जल्द ही सकारात्मक परिणाम मिलने की उम्मीद है।
- डॉ. सलिल श्रीवास्तव, प्रधानाचार्य, मेडिकल कॉलेज
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