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आधा रह गया जिले में भूगर्भ जल का भंडार

Thu, 13 Apr 2017 10:37 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला सिद्धार्थनगर
ब्यूरो/अमर उजाला सिद्धार्थनगर Updated Thu, 13 Apr 2017 10:37 PM IST
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Groundwater reserves in half the district remained
घोरावल में सूखा दसमिहवां तालाब।
सिद्धार्थनगर। जिले में जल का अथाह भंडार रहा है। ब्रिटिश काल में निर्मित 12 सागर और ताल जल संचयन की दृष्टि से बेहद अहम रहे हैं। पिछले 10 वर्षों में मनरेगा के तहत सैकड़ों नए पोखरे बनाए गए, पुराने का जीर्णोद्धार हुआ। इन सबके पीछे मकसद सिर्फ भूजल के संरक्षण का रहा है। बावजूद इन तमाम कोशिशों के जिले का भूगर्भ जल भंडार तेजी से घट रहा है। वर्ष 2004 और 2011 में हुई माप के आंकड़ों पर गौर करें तो इन सात वर्षों में भूगर्भ जल का भंडार आधा रह गया है। इसका असर जलस्तर पर भी पड़ा है। पांच वर्षों में जिले के जलस्तर में 8-10 सेमी की औसत गिरावट दर्ज हुई है।
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भूगर्भ जल के दोहन में तेजी और वाटर हार्वेस्टिंग के लिए उचित प्रबंध न होने के कारण भूगर्भ जल की मात्रा तेजी से घट रही है। विभाग के आंकड़ों के मुताबिक वर्ष 2004 में जहां जिले में कुल भूगर्भ जल की उपलब्धता 104492.05 हेक्टोमीटर थी वहीं यह वर्ष 2011 में 51964.28 हेमी तक सिमट गई। वर्ष 2004 में वार्षिक भूगर्भ जल दोहन का आंकड़ा 58137.09 हेक्टोमीटर प्रतिवर्ष था, वहीं वर्ष 2011 में दोहन 93308.06 तक जा पहुंचा है। लगातार यह आंकड़ा बढ़ता ही जा रहा है। जल संचयन व भूगर्भ जल रिचार्ज की कोई व्यवस्था न होने से स्थिति भयावह हो रही है। उपलब्धता घटने और दोहन बढने के कारण जलस्तर भी तेजी से नीचे खिसक रहा है।
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इंसेफेलाइटिस प्रभावित जिले में कम गहराई के हैंडपंपों का पानी सेवन को विशेषज्ञ खतरनाक बताते रहे हैं। 20 से 25 फीट की गहराई पर पानी तो है, लेकिन पीने योग्य पानी के लिए 30 से 35 फीट की गहराई को ही कुछ उपयुक्त माना जाता है। जानकारों की मानें तो करीब 10 वर्ष पहले जिले में पेयजल 25-30 फीट तक ही सहजता से उपलब्ध था, लेकिन लगातार दोहन के चलते अब यह स्तर तेजी से नीचे खिसका है। जलनिगम भी पहले 80 से 100 फीट तक बोरिंग के बाद हैंडपंप लगाता था, लेकिन अब उनका मानक 110-115 फीट तक पहुंच गया है।
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