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Siddharthnagar News: घर पहुंचने लगी गैस...उपभोक्ताओं के थमे कदम

Sun, 15 Mar 2026 12:28 AM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Sun, 15 Mar 2026 12:28 AM IST
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Gas started reaching homes...consumers stopped
होन डिलीवरी करता हॉकर।
देवरिया। रसोई गैस के संकट को कम करने के लिए शनिवार को शहर की सभी सात गैस एजेंसियों ने होम डिलीवरी शुरू की। इसकी निगरानी के लिए एसडीएम ने सभी एजेंसियों पर एक-एक कर्मचारियों की ड्यूटी लगाई थी। सभी एजेंसियों को पुरानी बुकिंग के अनुसार वितरण के लिए निर्देश दिया गया। शाम तक 6 मार्च तक की बुकिंग पर डिलीवरी कराई गई।
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देवरिया शहर में सात गैस एजेंसियां हैं। इनमें से चार भारत पेट्रोलियम, दो इंडेन व एक एचपी कंपनी की है। शनिवार को जिला प्रशासन की सख्ती के चलते सभी जगह होम डिलीवरी की व्यवस्था कराई गई। देर शाम तक अलग-अलग मोहल्लों में गैस सिलिंडरों का वितरण हुआ, जिससे उपभोक्ताओं को थोड़ी राहत मिली।
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बुकिंग के लिए पूरे दिन जूझते रहे लोग : रसोई गैस सिलिंडरों की होम डिलीवरी शुरू करने का आदेश होने के बाद उपभोक्ताओं को अब अपने कनेक्शन पर बुकिंग के लिए जूझना पड़ रहा है। वजह यह कि किसी का मोबाइल नंबर अपडेट नहीं है तो कोई बुकिंग नंबर के लगातार बिजी रहने से परेशान है।
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सिविल लाइन निवासी राजेंद्र ने बताया कि जिस नंबर पर कॉल करके गैस बुक करना है, वह नंबर ही पूरे दिन नहीं लगा। बैतालपुर निवास निशिकांत तिवारी ने बताया कि उन्हें जो इनवायस मिला है, उस पर डिलीवरी ब्वाय का नाम प्रकाश प्रसाद लिखा है।
उसका जो मोबाइल नंबर है उससे संपर्क करने पर पता लगा कि वह सात साल पहले ही गैस वितरण का काम छोड़ चुका है। संजीव मिश्र ने बताया कि एक एजेंसी पर संपर्क करने पर बताया गया कि सिलिंडर आपके घर पहुंचेगा, लेकिन जो वितरक उनके मोहल्ले में गया था, उसके पास संजीव के नाम का सिलिंडर ही नहीं था।
ब्लैक में 1700 से 2000 रुपये तक में मिला : प्रशासन की व्यवस्था को एजेंसी संचालकों की मनमानी से दिक्कत आ रही है। होम डिलीवरी या लाइन में लगे लोगों को जहां दिक्कत का सामना करना पड़ रहा है, वहीं तय से अधिक रेट देने पर बिना किसी ओटीपी के भी सिलिंडर मिल जा रहा है। शनिवार को एक घर में बहूभोज का कार्यक्रम था।

उनको चार सिलिंडरों की जरूरत थी, जिसके लिए गैस एजेंसी संचालक से लेकर पूर्ति विभाग तक के अफसरों से गुजारिश की। सबने नियमों का हवाला दिया। अंत में उपभोक्ता ने स्वयं जुगाड़ लगाया और 1000 की जगह 1800 रुपये देकर उसी एजेंसी के कर्मचारी से चार सिलिंडर लेकर अपना काम चलाया।
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