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बजट के अभाव में अटका ड्रीम प्रोजेक्ट

Sat, 17 Dec 2016 10:54 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला सिद्धार्थनगर
ब्यूरो/अमर उजाला सिद्धार्थनगर Updated Sat, 17 Dec 2016 10:54 PM IST
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Dream project stuck due to lack of budget
अधूरा पड़ा सिद्धार्थ विश्वविद्यालय का भवन। - फोटो : अमर उजाला
सिद्धार्थनगर। नेपाल सीमा पर सज रहे उच्च शिक्षा के भव्य मंदिर के निर्माण में बजट ने रोड़ा अटका दिया है। सीएम का यह ड्रीम प्रोजेक्ट दो माह से पूरी तरह ठप है। पैसा न होने से कार्यदायी संस्था ने काम रोक दिया है। अब आचार संहिता की आहट के साथ अधूरे काम को लेकर चिंताएं बढ़ती जा रही हैं। शीघ्र धनराशि उपलब्ध न हुई तो चुनाव तक काम प्रभावित रहेगा। ऐसे में नए सत्र से यूनिवर्सिटी को सभी विषयों के साथ संचालित करने की कोशिशों को भी झटका लगना तय है।
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भारत-नेपाल के रिश्तों को प्रगाढ़ बनाने के लिए सीएम अखिलेश यादव ने तथागत की जन्मभूमि पर भव्य यूनिवर्सिटी का सपना देखा था। इसे मूर्त रूप देने के लिए सरकार ने 236 करोड़ रुपये की परियोजना मंजूर करते हुए सिद्धार्थ यूनिवर्सिटी की नींव भी रख दी। दो वर्ष की अथक कोशिशों के बाद यूनिवर्सिटी शुरू भी हो चुका है, मगर फिलहाल सिर्फ कॉमर्स संकाय में बीकॉम की पढ़ाई ही हो पा रही है। कला और विज्ञान संकाय में प्रवेश भी शुरू नहीं हो पाया है। मुख्यमंत्री के हाथों लोकार्पण के चलते यूनिवर्सिटी का निर्माण कार्य जोर-शोर से चल रहा था।
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इससे उम्मीद जताई जा रही थी कि अगले सत्र से सभी 22 कोर्सों में प्रवेश और पढ़ाई शुरू हो जाएगी। मगर 15 अक्टूबर को लोकार्पण होने के बाद से काम पूरी तरह बंद हो गया है, जबकि अभी पर्याप्त काम शेष है। कार्यदायी संस्था के अफसर-कर्मचारी भी यहां से जा चुके हैं। जिम्मेदारों का कहना है कि निर्माण कार्य के लिए धनराशि उपलब्ध नहीं हो पा रही, फिर काम कहां से कराएंगे। वैसे भी लोकार्पण के दबाव में तकरीबन 4 करोड़ रुपये ठेकेदारों ने अपने स्तर से खर्च कर दिया है। अब और पैसा नहीं है।
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लिहाजा धनराशि मिलेगी, तभ्ज्ञी काम हो पाएगा। इस संबंध में सिद्धार्थ यूनिवर्सिटी के कुलपति प्रो. रजनीकांत पांडेय ने बताया कि भवन निर्माण का काम भले ही रुका हो, लेकिन यूनिवर्सिटी अगले सत्र से अन्य संकायों में भी पठन-पाठन आरंभ करने के लिए तैयारी शुरू कर चुकी है। वैसे भी इतना जगह उपलब्ध है, जिससे विज्ञान और कला की कक्षाएं आरंभ की जा सकें। कम संसाधनों के बावजूद बेहतर व गुणात्मक शिक्षा के मिशन को पूरा करने में यूनिवर्सिटी कहीं से पीछे नहीं रहेगी। 
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