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मंत्री के जाते ही जिला अस्पताल पुराने ढर्रे पर

Tue, 09 May 2017 11:01 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला सिद्धार्थनगर
ब्यूरो/अमर उजाला सिद्धार्थनगर Updated Tue, 09 May 2017 11:01 PM IST
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District Hospital on the old course as soon as the minister goes
जिला अस्पताल में लगा गंदगी का अंबार। - फोटो : अमर उजाला
स्वास्थ्य मंत्री के निरीक्षण में चकाचक दिखने वाला जिला अस्पताल 24 घंटे में ही पुराने अंदाज में लौट आया है। मंगलवार की सुबह पड़ताल के दौरान न बेड पर चादर मिलीं और न ही जगह-जगह रखे गमले। बड़ी मशक्कत से चालू हुए लिफ्ट भी एक दिन चलने के बाद बंद हो गया और वाटर कूलर शो-पीस बन गया। कई दिनों से अस्पताल को चमकाने में जुटे जिम्मेदारों की लापरवाही का आलम यह था कि मरीजों को चढ़ाई गई ड्रिप की खाली बोतलों को जनरल वार्ड में एक कोने में फेंक दिया गया था।
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जिला अस्पताल में स्वास्थ्य मंत्री के आने की आहट के बाद से सप्ताह भर से डॉक्टर मरीजों पर मेहरबान हो गए थे। मशीन से अस्पताल की दिन में तीन बार साफ-सफाई कराई जा रही थी। निर्माण के बाद से ही बंद पड़े लिफ्ट को जैसे-तैसे चालू कराया गया। मंत्री के स्वागत के लिए हर द्वार पर फूल-पत्तीदार गमले सजाए गए। यहां तक कि मरीजों को बेड पर सफेद चादर बिछाया गया था। शुद्ध पेयजल के लिए वाटर कूलर जनरल वार्ड के पास लगाया गया। स्वास्थ्य मंत्री सिद्धार्थनाथ सिंह के जाते ही सब पुराने ढर्रे पर लौट गए। मंगलवार की सुबह जिला अस्पताल की हालत टटोली गई तो सब कुछ पुराने अंदाज में ही नजर आया। बिन चादर वाली पॉलीथिनयुक्त बेड पर मरीज पड़े थे। इमरजेंसी वार्ड में भर्ती भिटिया निवासी आकिब ने बताया कि चादर मांगा गया तो कर्मचारी ने कहा कि धुलने के लिए गया है।
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वहीं इमरजेंसी वार्ड के ओटी में बिना सफाई के खुले में टाका लगाने वाले उपकरण सहित अन्य सामान पड़े थे। जनरल वार्ड में खुले में ड्रिप की बोतलें फेंकी हुई थीं। सर्जिकल वार्ड का भी कुछ ऐसा ही दृश्य रहा। यहां भर्ती शहीदुन्निशा, सूरज लाल यादव और आफताब अली के परिजनों ने बताया कि चादर की मांग की गई, लेकिन उसके बाद भी अभी तक नहीं दिया गया। इसी पॉलीथिन वाले विस्तार पर सो रहे हैं। वहीं अस्पताल के मुख्य गेट के पास दिव्यांगों के लिए बने शौचालय पर ताला लगा था, जबकि ओपीडी के समय इसे खुला रखने का प्रावधान है। हालांकि इस बाबत सीएमएस डॉ. रोचस्मति पांडेय से संपर्क किया गया तो उनका जवाब भी पुराना ही था। बोलीं, अस्पताल में भर्ती मरीजों को चादर दिया जा रहा है। सफाई व्यवस्था पर विशेष ध्यान है, जो सुविधाएं है उसे मरीजों को दिया जा रहा है।
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