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Siddharthnagar News: बैनामा तत्काल... खारिज-दाखिल के लिए वर्षों इंतजार

Wed, 23 Jul 2025 11:17 PM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Wed, 23 Jul 2025 11:17 PM IST
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Deed immediately... waiting for years for cancellation and filing
तहसील नौगढ़ में अपनी समस्याओं को लेकर मौजूद लोग। संवाद
संवाद न्यूज एजेंसी
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सिद्धार्थनगर। अगर आपने आवास बनाने अथवा खेती के लिए जमीन खरीदी और दाखिल-खारिज के पहले किसी ने भी आपत्ति कर दी तो इसके निस्तारण में वर्षों लगना तय है, जिससे दाखिल-खारिज में देरी से आपका आशियाना बनाने अथवा खेती का सपना टूटता नजर आएगा।
नौगढ़ तहसील क्षेत्र के बर्डपुर नंबर आठ टोला बभनी निवासी केशरी प्रसाद ने डेढ़ वर्ष पूर्व डेढ़ बीघा जमीन बैनामा कराया, जिसके दाखिल-खारिज के लिए उन्होंने आवेदन किया। इसी बीच एक व्यक्ति जिसका खतौनी में नाम भी नहीं था, उसने आपत्ति कर दी। तभी से मामला न्यायालय में लंबित है, और उन्हें तारीख पर तारीख मिल रही है।
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दाखिल-खारिज में आपत्ति के बाद चलने वाले मुकदमे के हालात यह हैं कि बुधवार को सुनवाई न होने से नियाज अहमद, ज्योति व सोनमती को कोर्ट से अगली तारीख का इंतजार था। वहीं मंगलवार को दाखिल-खारिज मामले के निस्तारण के लिए लगी रामनरेश, मोलहू, चंद्रभान व इशहाक को अगली तारीख चार अगस्त मिल चुकी है। यह लोग आवास अथवा खेती के लिए भूमि खरीद कर दाखिल-खारिज के लिए आवेदन किया था, जिस पर आपत्ति लगने के बाद मामला कोर्ट में लंबित है।
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नौगढ़ तहसील में दाखिल-खारिज के 350 मामले लंबित हैं। जबकि जिले की सभी पांचों तहसीलों में दाखिल-खारिज के डेढ़ हजार से अधिक मामले लंबित हैं। दाखिल-खारिज के मामलों में स्वामित्व नामांतरण के लिए कानून में 35 दिन की अवधि निर्धारित की गई है, लेकिन आपत्ति के बाद लग रही तारीख में वादकारी को आदेश कराने के लिए कोर्ट के चक्कर लगाने पड़ते हैं। इतना ही नहीं आदेश होने के बाद भी नाम दर्ज कराने के लिए लंबे समय तक इंतजार करना पड़ता है।
कोर्ट के आदेश के तुरंत बाद वास्तविक स्वामी का नाम रजिस्टर मालिकान पर दर्ज कराने और कंप्यूटर में शीघ्र फीडिंग कराने की कानूनी व्यवस्था है। यदि नियमानुसार दाखिल-खारिज के बाद समय से निपटाए जाएं तो इसमें डेढ़ माह से अधिक का समय नहीं लगना चाहिए। पीड़ित वादकारियों का कहना है कि एक वर्ष बीत जाने के बाद भी दाखिल-खारिज का बाद निस्तारित नहीं हो सका है। इसके कारण अब तक अभिलेखों में नाम दर्ज नहीं हो सका है। साथ ही घर का निर्माण, लोन की प्रक्रिया बाधित है।
कोर्ट में कई वर्ष से लंबित है मामला : नौगढ़ तहसील के नायब तहसीलदार सदर कोर्ट में दाखिल-खारिज के मामले कई वर्ष से लंबित हैं। इनमें नंद किशोर बनाम शिव पूजन का मामला 15 वर्ष से लंबित है। वहीं तहसीलदार कोर्ट में कई मामले लंबित चल रहे हैं। आठ जुलाई को तारीख देखने आए राजाराम, सोनमती, रागनी, ऋषिदेव, खुर्शीद व दिलीप को अगली तारीख 29 जुलाई मिली है। वादकारियों को मिल रही तारीख पर तारीख से तहसील का चक्कर लगाना मजबूरी हो गया है।

यह है दाखिल-खारिज की प्रक्रिया : भूमि की रजिस्ट्री बैनामा होने के बाद बैनामेदार द्वारा तहसीलदार न्यायालय में दस्तावेज की एक प्रति दाखिल की जाती है। दाखिला की तिथि से 35 दिन तक आपत्ति का इंतजार किया जाता है। इसमें आपत्ति न होने पर तहसीलदार न्यायालय दाखिल-खारिज का आदेश देता है, जिसके बाद रजिस्ट्रार कानूनगो की ओर से फीडिंग कराई जाती है और खतौनी में नाम दर्ज हो जाता है। वहीं आपत्ति होने की स्थिति में बैनामेदार को लाखों रुपये खर्च कर जमीन खरीदने के बाद भी लोगों को मुकदमों का बोझ ढोना मजबूरी हो जाता है।
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