{"_id":"60d216888ebc3e2d971fdd1b","slug":"date-extended-but-no-purchase-of-produce-siddharthnagar-news-gkp3990990126","type":"story","status":"publish","title_hn":"खरीद पूरी, फिर भी किसान रह गए वंचित","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
खरीद पूरी, फिर भी किसान रह गए वंचित
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
तिथि बढ़ी पर नहीं हुई उपज की खरीद
शासन ने आठ दिन बढ़ाई थी गेहूं खरीद की तिथि
बोले किसान, ऑनलाइन के बाद भी चक्कर लगाकर परेशान, फिर भी नहीं हुई खरीद
संवाद न्यूज एजेंसी
सिद्धार्थनगर। गेहूं की खरीद की तिथि पूरी हो गई। पिछले वर्ष की तुलना में लगभग 28 हजार मीट्रिक टन गेहूं की खरीद अधिक हो चुकी है। बावजूद इसके किसान वंचित रह गए। किसानों का कहना है कि ऑनलाइन पंजीकरण के बाद केंद्रों का चक्कर लगाते रहे, लेकिन कभी गोदाम खाली नहीं होने का हवाला तो कभी बारिश और बोरी न होने की दलील देते हुए टरका दिया गया। तिथि बढ़ने के बावजूद भी उनकी उपज को नहीं खरीदा गया। अब बिचौलियों के हाथ 1500 से 1600 रुपये प्रति क्विंटल की दर से बेचना पड़ेगा।
किसानों की आय को दोगुना करने की सरकार दलील दे रही है। क्रय केंद्रों को क्रियाशील बनाकर किसानों की उपज का वाजिब मूल्य दिलाने की बात की जा रही है। मगर गेहूं की खरीद में जमीन हकीकत कुछ और ही है। शासन की ओर से एक अप्रैल से 15 जून तक गेहूं खरीद की तिथि तय की गई थी। जिले में गेहूं खरीद के लिए 131 क्रय केंद्र बनाए गए हैं। ऑनलाइन पंजीकरण के बाद ही किसानों की उपज को खरीदने का नियम है। एक अप्रैल से 15 जून यानी ढाई माह में 14360 किसानों से 82318.95 मीट्रिक टन गेहूं की खरीद की गई थी। खरीददारी को देखते हुए शासन ने 22 जून तक खरीद की तिथि बढ़ा दी थी। इसके बावजूद अधिकांश किसान तौल से वंचित रह गए। पंजीकरण के बावजूद उनकी उपज को खरीद नहीं किया गया। कभी जगह न होने की बात कहकर टरका दिया गया तो कभी बारिश और बोरा न होने के कारण उन्हें घुमाया गया। उन्हें स्पष्ट नहीं कहा गया कि खरीद नहीं हो सकती है नहीं तो वह दूसरा विकल्प खोजते। अब खरीद की तिथि भी खत्म हो गई, लेकिन आज भी अधिकांश किसान सारी प्रक्रिया पूरी करने के बावजूद उपज को नहीं बेच पाए। वह खरीद व्यवस्था पर सवाल खड़ा कर रहे हैं। जिला विपणन अधिकारी संजय कुमार पांडेय ने बताया कि अनाज रखने की कुछ समस्याएं थीं। उधर बारिश भी बीच-बीच में होती रही। इसके बावजूद जो किसान क्रय केंद्र पर आए, उनकी तौल कराई गई। खरीद में किसी भी प्रकार की शिथिलता नहीं बरती गई है।
बोले किसान- पंजीकरण के बाद भी नहीं हुई खरीद
भनवापुर ब्लॉक क्षेत्र के नावडीह गांव निवासी गोदावरी, कृष्ण लाल चौधरी, रामकिशोर, राधेश्याम ने बताया कि साधन सहकारी समिति रमवापुर जगतराम में गेहूं तौल होना था। मगर जब जाते थे तो यही कहा जाता था की खरीद लिया जाएगा। मगर खरीद की तिथि समाप्त हो गई, लेकिन अभी तक तौल नहीं हुआ। बिना जुगाड़ के कोई काम होने वाला नहीं है। उसी गांव के किसान त्रियुगी नरायन वर्मा और मंजू देवी ने बताया कि हमारा रजिस्ट्रेशन 13 जून को हुआ। हम लोगों का गेहूं का तौल साधन सहकारी समिति रमवापुर जगतराम में होना था। वहां पर जाने के बाद केंद्र सचिव कभी बोरा नहीं होने की बात कहकर लौटा देते थे। खरीद की तिथि सरकार ने बढ़ाई तो लगा खरीद हो जाएगी। मगर अब तो बिचौलियों के हाथ बेचना पड़ेगा।
विज्ञापन
सात दिन में खरीदे दो हजार मीट्रिक टन गेहूं
इस वर्ष गेहूं खरीद का जिले में कोई लक्ष्य नहीं निर्धारित नहीं हुआ था। आंकड़ों पर गौर करें तो एक अप्रैल से 15 जून तक 14360 किसानों से 82318.33 मीट्रिक टन गेहूं की खरीद की गई। वहीं 16 से 21 जून तक 510 किसानों से लगभग दो हजार मीट्रिक टन अधिक खरीद की गई।
दौड़ते रहे किसान, नहीं की गई तौल
किसान ऑनलाइन पंजीकरण कराने के बाद क्रय केंद्रों का चक्कर लगाता रहा। मगर उसे तारीख पर तारीख दी जा रही थी। बारिश और तमाम समस्याओं के बावजूद रिकॉर्ड खरीद बताई जा रही है। जब किसान तौल ही नहीं पाए तो खरीद कहां से बढ़ गई। इस मामले में जांच की मांग करेंगे, क्योंकि आज भी अधिकांश किसानों का गेहूं नहीं खरीदा गया।
- कपिलदेव राय, राष्ट्रीय महासचिव भाकियू अंबावता गुट
विज्ञापन
शासन ने आठ दिन बढ़ाई थी गेहूं खरीद की तिथि
बोले किसान, ऑनलाइन के बाद भी चक्कर लगाकर परेशान, फिर भी नहीं हुई खरीद
संवाद न्यूज एजेंसी
सिद्धार्थनगर। गेहूं की खरीद की तिथि पूरी हो गई। पिछले वर्ष की तुलना में लगभग 28 हजार मीट्रिक टन गेहूं की खरीद अधिक हो चुकी है। बावजूद इसके किसान वंचित रह गए। किसानों का कहना है कि ऑनलाइन पंजीकरण के बाद केंद्रों का चक्कर लगाते रहे, लेकिन कभी गोदाम खाली नहीं होने का हवाला तो कभी बारिश और बोरी न होने की दलील देते हुए टरका दिया गया। तिथि बढ़ने के बावजूद भी उनकी उपज को नहीं खरीदा गया। अब बिचौलियों के हाथ 1500 से 1600 रुपये प्रति क्विंटल की दर से बेचना पड़ेगा।
किसानों की आय को दोगुना करने की सरकार दलील दे रही है। क्रय केंद्रों को क्रियाशील बनाकर किसानों की उपज का वाजिब मूल्य दिलाने की बात की जा रही है। मगर गेहूं की खरीद में जमीन हकीकत कुछ और ही है। शासन की ओर से एक अप्रैल से 15 जून तक गेहूं खरीद की तिथि तय की गई थी। जिले में गेहूं खरीद के लिए 131 क्रय केंद्र बनाए गए हैं। ऑनलाइन पंजीकरण के बाद ही किसानों की उपज को खरीदने का नियम है। एक अप्रैल से 15 जून यानी ढाई माह में 14360 किसानों से 82318.95 मीट्रिक टन गेहूं की खरीद की गई थी। खरीददारी को देखते हुए शासन ने 22 जून तक खरीद की तिथि बढ़ा दी थी। इसके बावजूद अधिकांश किसान तौल से वंचित रह गए। पंजीकरण के बावजूद उनकी उपज को खरीद नहीं किया गया। कभी जगह न होने की बात कहकर टरका दिया गया तो कभी बारिश और बोरा न होने के कारण उन्हें घुमाया गया। उन्हें स्पष्ट नहीं कहा गया कि खरीद नहीं हो सकती है नहीं तो वह दूसरा विकल्प खोजते। अब खरीद की तिथि भी खत्म हो गई, लेकिन आज भी अधिकांश किसान सारी प्रक्रिया पूरी करने के बावजूद उपज को नहीं बेच पाए। वह खरीद व्यवस्था पर सवाल खड़ा कर रहे हैं। जिला विपणन अधिकारी संजय कुमार पांडेय ने बताया कि अनाज रखने की कुछ समस्याएं थीं। उधर बारिश भी बीच-बीच में होती रही। इसके बावजूद जो किसान क्रय केंद्र पर आए, उनकी तौल कराई गई। खरीद में किसी भी प्रकार की शिथिलता नहीं बरती गई है।
विज्ञापन
बोले किसान- पंजीकरण के बाद भी नहीं हुई खरीद
भनवापुर ब्लॉक क्षेत्र के नावडीह गांव निवासी गोदावरी, कृष्ण लाल चौधरी, रामकिशोर, राधेश्याम ने बताया कि साधन सहकारी समिति रमवापुर जगतराम में गेहूं तौल होना था। मगर जब जाते थे तो यही कहा जाता था की खरीद लिया जाएगा। मगर खरीद की तिथि समाप्त हो गई, लेकिन अभी तक तौल नहीं हुआ। बिना जुगाड़ के कोई काम होने वाला नहीं है। उसी गांव के किसान त्रियुगी नरायन वर्मा और मंजू देवी ने बताया कि हमारा रजिस्ट्रेशन 13 जून को हुआ। हम लोगों का गेहूं का तौल साधन सहकारी समिति रमवापुर जगतराम में होना था। वहां पर जाने के बाद केंद्र सचिव कभी बोरा नहीं होने की बात कहकर लौटा देते थे। खरीद की तिथि सरकार ने बढ़ाई तो लगा खरीद हो जाएगी। मगर अब तो बिचौलियों के हाथ बेचना पड़ेगा।
विज्ञापन
सात दिन में खरीदे दो हजार मीट्रिक टन गेहूं
इस वर्ष गेहूं खरीद का जिले में कोई लक्ष्य नहीं निर्धारित नहीं हुआ था। आंकड़ों पर गौर करें तो एक अप्रैल से 15 जून तक 14360 किसानों से 82318.33 मीट्रिक टन गेहूं की खरीद की गई। वहीं 16 से 21 जून तक 510 किसानों से लगभग दो हजार मीट्रिक टन अधिक खरीद की गई।
दौड़ते रहे किसान, नहीं की गई तौल
किसान ऑनलाइन पंजीकरण कराने के बाद क्रय केंद्रों का चक्कर लगाता रहा। मगर उसे तारीख पर तारीख दी जा रही थी। बारिश और तमाम समस्याओं के बावजूद रिकॉर्ड खरीद बताई जा रही है। जब किसान तौल ही नहीं पाए तो खरीद कहां से बढ़ गई। इस मामले में जांच की मांग करेंगे, क्योंकि आज भी अधिकांश किसानों का गेहूं नहीं खरीदा गया।
- कपिलदेव राय, राष्ट्रीय महासचिव भाकियू अंबावता गुट