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Siddharthnagar News: चंद्रशेखर आजाद के बलिदान को भुलाया नहीं जा सकता
Fri, 11 Aug 2023 02:18 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
Updated Fri, 11 Aug 2023 02:18 AM IST
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बांसी में चंद्रशेखर आजाद की प्रतिमा का अनावरण करने के बाद माल्यार्पण करते एस डी एम प्रमोद कुमार
सिद्धार्थनगर। भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के महानायक चंद्रशेखर आजाद पर सभी देशवासियों को गर्व है और उनके बलिदान को कभी भुलाया नहीं जा सकता। यह बातें, नगर पालिका अध्यक्ष चमन आरा राईनी ने बुधवार को डाकबंगला तिराहे पर लगी चंद्रशेखर आजाद की प्रतिमा अनावरण के अवसर पर कहीं।
एसडीएम प्रमोद कुमार ने अमर शहीद चंद्रशेखर आजाद को नमन करते हुए उनके जीवन पर प्रकाश डाला। अनावरण के मौके पर चौराहे का नामकरण आजाद चौक किया गया। कार्यक्रम को पूर्व सांसद डाॅ. चंद्रशेखर त्रिपाठी , प्रो केपी त्रिपाठी , डाॅ. ज्ञानेंद्र द्विवेदी, रमेश उपाध्याय ने भी संबोधित किया। इस दौरान बजरंगी वर्मा, अरुण गुप्ता, अशफाक अहमद, बरकत अली राईनी, प्रतिमा वर्मा, बृजेश चौबे आदि मौजूद रहे।
चंद्रशेखर आजाद का बांसी से था गहरा नाता
सिद्धार्थनगर। चंद्रशेखर आजाद का बांसी से काफी गहरा नाता था। यहां के एक क्रूर सामंत को सबक सिखाने के लिए वह बांसी आए थे। बांसी नगर व आसपास के ग्रामीण अंचल के लोग अंग्रेजों के समर्थक एक सामंत के आतंक से लोग काफी पीड़ित थे। यहां तक की स्वतंत्रता संग्राम में बढ़ चढ़ कर भाग लेने वाले तेजगढ़ गांव को आजादी की लड़ाई के दौरान फुंकवा दिया गया था। घटना की जानकारी होने पर सामंत से मोर्चा लेने के लिए चंद्रशेखर आजाद, बांसी आकर एक दिन रुके भी थे और तेजगढ़ गांव का दौरा भी किया था।
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एसडीएम प्रमोद कुमार ने अमर शहीद चंद्रशेखर आजाद को नमन करते हुए उनके जीवन पर प्रकाश डाला। अनावरण के मौके पर चौराहे का नामकरण आजाद चौक किया गया। कार्यक्रम को पूर्व सांसद डाॅ. चंद्रशेखर त्रिपाठी , प्रो केपी त्रिपाठी , डाॅ. ज्ञानेंद्र द्विवेदी, रमेश उपाध्याय ने भी संबोधित किया। इस दौरान बजरंगी वर्मा, अरुण गुप्ता, अशफाक अहमद, बरकत अली राईनी, प्रतिमा वर्मा, बृजेश चौबे आदि मौजूद रहे।
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चंद्रशेखर आजाद का बांसी से था गहरा नाता
सिद्धार्थनगर। चंद्रशेखर आजाद का बांसी से काफी गहरा नाता था। यहां के एक क्रूर सामंत को सबक सिखाने के लिए वह बांसी आए थे। बांसी नगर व आसपास के ग्रामीण अंचल के लोग अंग्रेजों के समर्थक एक सामंत के आतंक से लोग काफी पीड़ित थे। यहां तक की स्वतंत्रता संग्राम में बढ़ चढ़ कर भाग लेने वाले तेजगढ़ गांव को आजादी की लड़ाई के दौरान फुंकवा दिया गया था। घटना की जानकारी होने पर सामंत से मोर्चा लेने के लिए चंद्रशेखर आजाद, बांसी आकर एक दिन रुके भी थे और तेजगढ़ गांव का दौरा भी किया था।
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