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रोटी-बेटी के रिश्ते में भंसार की गांठ
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भारत-नेपाल सीता ककरहवा बार्डर। फाइल फोटो
- फोटो : SIDDHARTHNAGAR
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रोटी-बेटी के रिश्ते में भंसार की गांठ
- नेपाल की ओर से भंसार लगाए जाने से ककरहवा बार्डर से आवागमन में कमी
-ग्रीष्मावकाश व लगन बीतने के बाद कम हो जाएंगे लुंबिनी जाने वाले लोग
सिद्धार्थनगर। भारत-नेपाल के बीच रोटी-बेटी के रिश्ते में नेपाल की ओर से भंसार लगाया जाना लोगों को गांठ की तरह तकलीफ दे रहा है। फरवरी में नेपाल के लुंबिनी जाने वाले भारतीय पर्यटकों के वाहनों का भंसार ( सीमा शुल्क) नहीं लगता था और सुविधा पर्ची के माध्यम से लोग भगवान बुद्घ की जन्मस्थली कपिलवस्तु तक दर्शन करने जाते थे। ककरवा बार्डर पर भंसार के नए नियम से स्थानीय लोगों को रिश्तेदारों के यहां जाने में भी अब जेब ढीली करनी पड़ रही है।
ककरवा बार्डर से 10 किमी दूर लुंबिनी जाने में अब चार पहिया वाहनों से नेपाली मुद्रा में 500 रुपये एवं दो पहिया वाहनों से 150 रुपये भंसार जमा करना पड़ रहा है। इस कारण सीमा क्षेत्र के लोगों को ज्यादा दिक्कत हो रही है। हालांकि, नए नियम का नुकसान गोरखपुर अंचल सहित देश के अन्य पर्यटकों को भी हो रहा है।
कस्टम विभाग की रिपोर्ट के अनुसार ककरहवा बार्डर से प्रतिदिन औसतन 110 चार पहिया और 210 दो पहिया वाहन नेपाल सीमा में प्रवेश कर रहे हैं। ग्रीष्मवकाश एवं शादियों के सीजन के कारण इधर नेपाल जाने वाले वाहनों की संख्या अधिक है, जबकि दोनों स्थितियां नहीं होगी तो वाहनों की संख्या में कमी आ जाएगी। स्थानीय लोगों के अनुसार उन्होंने नेपाल जाना कम कर दिया है।
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कोट--
नेपाल में मेरी बुआ का घर है। पहले लुंबिनी तक आने-जाने का कोई भंसार नहीं लगता था। कोई काम होने पर अपने रिश्तेदारों को लुंबिनी में ही बुलाकर मिल लेते थे, अब नुकसान हो रहा है।
- विनोद चौधरी, परसा
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नेपाल में मेरी मौसी का घर है। जितना पेट्रोल उनके घर जाने में लगता था, उससे अधिक अब भंसार जमा करना पड़ रहा है। नया नियम हम लोगों को बहुत अखर रहा है, भारत सरकार को इस पर बात करनी चाहिए।
- पंकज कुमार, हरदासपुर
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अब नेपाल आना-जाना कम कर दिया है। लुंबिनी तक जाने में भंसार से जेब ढीली हो रही है। यदि भारत में प्रवेश करने पर सीमा शुल्क नहीं है तो नेपाल को भी मनमानी नहीं करनी चाहिए। नेपाल में मेरे भाई की ससुराल है।
- अविनाश पटेल, परसा
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नेपाल में मेरे मामा का घर है। लॉकडाउन समाप्त होने के बाद वाहनों का प्रवेश शुरू हुआ तो नेपाल ने नियम बदल दिए। नियम वापस नहीं हुए तो बार्डर पार करने वाले वाहनों की संख्या कम हो जाएगी।
- सुधीर कन्नौजिया, बनियाबारी
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वर्जन--
ककरहवा बार्डर पर लुंबिनी तक भंसार नहीं लगता था। नए नियम से परेशानी हो रही है। मामले में मैं नौ जून को विदेश मंत्रालय में बात करूंगा। भारत-नेपाल के बीच हुए समझौते का उल्लंघन नहीं होना चाहिए। दोनों देशों के बीच रोटी-बेटी का रिश्ता है। यह मधुर बना रहना चाहिए।
जगदंबिका पाल, सांसद
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- नेपाल की ओर से भंसार लगाए जाने से ककरहवा बार्डर से आवागमन में कमी
-ग्रीष्मावकाश व लगन बीतने के बाद कम हो जाएंगे लुंबिनी जाने वाले लोग
सिद्धार्थनगर। भारत-नेपाल के बीच रोटी-बेटी के रिश्ते में नेपाल की ओर से भंसार लगाया जाना लोगों को गांठ की तरह तकलीफ दे रहा है। फरवरी में नेपाल के लुंबिनी जाने वाले भारतीय पर्यटकों के वाहनों का भंसार ( सीमा शुल्क) नहीं लगता था और सुविधा पर्ची के माध्यम से लोग भगवान बुद्घ की जन्मस्थली कपिलवस्तु तक दर्शन करने जाते थे। ककरवा बार्डर पर भंसार के नए नियम से स्थानीय लोगों को रिश्तेदारों के यहां जाने में भी अब जेब ढीली करनी पड़ रही है।
ककरवा बार्डर से 10 किमी दूर लुंबिनी जाने में अब चार पहिया वाहनों से नेपाली मुद्रा में 500 रुपये एवं दो पहिया वाहनों से 150 रुपये भंसार जमा करना पड़ रहा है। इस कारण सीमा क्षेत्र के लोगों को ज्यादा दिक्कत हो रही है। हालांकि, नए नियम का नुकसान गोरखपुर अंचल सहित देश के अन्य पर्यटकों को भी हो रहा है।
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कस्टम विभाग की रिपोर्ट के अनुसार ककरहवा बार्डर से प्रतिदिन औसतन 110 चार पहिया और 210 दो पहिया वाहन नेपाल सीमा में प्रवेश कर रहे हैं। ग्रीष्मवकाश एवं शादियों के सीजन के कारण इधर नेपाल जाने वाले वाहनों की संख्या अधिक है, जबकि दोनों स्थितियां नहीं होगी तो वाहनों की संख्या में कमी आ जाएगी। स्थानीय लोगों के अनुसार उन्होंने नेपाल जाना कम कर दिया है।
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कोट--
नेपाल में मेरी बुआ का घर है। पहले लुंबिनी तक आने-जाने का कोई भंसार नहीं लगता था। कोई काम होने पर अपने रिश्तेदारों को लुंबिनी में ही बुलाकर मिल लेते थे, अब नुकसान हो रहा है।
- विनोद चौधरी, परसा
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नेपाल में मेरी मौसी का घर है। जितना पेट्रोल उनके घर जाने में लगता था, उससे अधिक अब भंसार जमा करना पड़ रहा है। नया नियम हम लोगों को बहुत अखर रहा है, भारत सरकार को इस पर बात करनी चाहिए।
- पंकज कुमार, हरदासपुर
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अब नेपाल आना-जाना कम कर दिया है। लुंबिनी तक जाने में भंसार से जेब ढीली हो रही है। यदि भारत में प्रवेश करने पर सीमा शुल्क नहीं है तो नेपाल को भी मनमानी नहीं करनी चाहिए। नेपाल में मेरे भाई की ससुराल है।
- अविनाश पटेल, परसा
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नेपाल में मेरे मामा का घर है। लॉकडाउन समाप्त होने के बाद वाहनों का प्रवेश शुरू हुआ तो नेपाल ने नियम बदल दिए। नियम वापस नहीं हुए तो बार्डर पार करने वाले वाहनों की संख्या कम हो जाएगी।
- सुधीर कन्नौजिया, बनियाबारी
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वर्जन--
ककरहवा बार्डर पर लुंबिनी तक भंसार नहीं लगता था। नए नियम से परेशानी हो रही है। मामले में मैं नौ जून को विदेश मंत्रालय में बात करूंगा। भारत-नेपाल के बीच हुए समझौते का उल्लंघन नहीं होना चाहिए। दोनों देशों के बीच रोटी-बेटी का रिश्ता है। यह मधुर बना रहना चाहिए।
जगदंबिका पाल, सांसद
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