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नगर पालिका के खिलाफ आमरण अनशन शुरू
अमर उजाला ब्यूरो/सिद्धार्थनगर
Updated Wed, 27 Jan 2016 11:22 PM IST
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नगर पालिका के कार्यों में गड़बड़ी और जांच के नाम पर लीपापोती का आरोप लगाते हुए अधिवक्ता ने बुधवार से आमरण अनशन शुरू कर दिया है। कलेक्ट्रेट परिसर में अनशन पर बैठे अधिवक्ता को दो सभासदों ने भी समर्थन दिया है।
जांच अधिकारियों पर मिलीभगत का आरोप लगाया और नगर पालिका के खिलाफ चल रही विभिन्न जांचों की रिपोर्ट को सार्वजनिक करने की मांग की है। चेतावनी दी कि जब तक मांगें पूरी नहीं होती अनशन जारी रहेगा।
अनशन पर बैठे अधिवक्ता प्रशस्त उपाध्याय ने जिलाधिकारी को दिए ज्ञापन में कहा है कि नगर पालिका के विभिन्न कार्यों के लिए मनमाने ढंग से टेंडर किए गए हैं। प्रत्येक टैक्सी स्टैंड पर अवैध रूप से वसूली की जा रही है।
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स्वतंत्रता के स्वर्ण जयंती वर्ष पर नगर के स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों के नाम पर रखे गए मार्गों के नाम का शिलापट्ट को तुड़वाया गया था, उसे अब तक नहीं लगाया गया। तीन वर्षों में हुई निविदाओं की प्रक्रिया के बारे में भी स्पष्ट नहीं किया गया है।
विज्ञापन संबंधित होर्डिंग की निविदा कब आमंत्रित की गई, कितने लोगों ने इसमें हिस्सा लिया, इसकी भी जांच होनी चाहिए। नगर पालिका की टेंडर प्रक्रिया पूरी तरह मनमाना है।
यह भी आरोप लगाया है कि विभिन्न विकास कार्यों के बाद लोकार्पण के शिलापट्ट पर जनप्रतिनिधियों और जिला स्तरीय अधिकारियों के नाम अंकित किए गए हैं, जबकि लोकार्पण में वह शामिल ही नहीं थे।
मानक की गड़बड़ियों पर पर्दा डालने के लिए यह कृत्य रचा गया है। कर निर्धारण संबंधित विज्ञापन स्थानीय समाचार पत्रों की बजाए गोरखपुर के नगर संस्करण में प्रकाशित कराया गया है।
नगर पालिका क्षेत्र के बाहर ग्राम सभाओं में भी नगर पालिकाओं के पद से काम कराया गया है, जो नियमों से परे है। उन्होंने कहा कि इन तमाम शिकायतों को लेकर कई बार जांच कमेटियां एडीएम, एसडीएम के स्तर पर बनाई गई, मगर किसी भी कमेटी की जांच अब तक पूरी नहीं हो पाई है।
यह कमेटियां अपनी जांच को स्पष्ट करें और गड़बड़ियां करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करें। अधिवक्ता के अनशन को नगर पालिका बांसी के सभासद मंगल प्रसाद चौरसिया और संजय रावत ने भी समर्थन देते हुए अनशन पर बैठने की चेतावनी दी है।
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जांच अधिकारियों पर मिलीभगत का आरोप लगाया और नगर पालिका के खिलाफ चल रही विभिन्न जांचों की रिपोर्ट को सार्वजनिक करने की मांग की है। चेतावनी दी कि जब तक मांगें पूरी नहीं होती अनशन जारी रहेगा।
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अनशन पर बैठे अधिवक्ता प्रशस्त उपाध्याय ने जिलाधिकारी को दिए ज्ञापन में कहा है कि नगर पालिका के विभिन्न कार्यों के लिए मनमाने ढंग से टेंडर किए गए हैं। प्रत्येक टैक्सी स्टैंड पर अवैध रूप से वसूली की जा रही है।
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स्वतंत्रता के स्वर्ण जयंती वर्ष पर नगर के स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों के नाम पर रखे गए मार्गों के नाम का शिलापट्ट को तुड़वाया गया था, उसे अब तक नहीं लगाया गया। तीन वर्षों में हुई निविदाओं की प्रक्रिया के बारे में भी स्पष्ट नहीं किया गया है।
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यह भी आरोप लगाया है कि विभिन्न विकास कार्यों के बाद लोकार्पण के शिलापट्ट पर जनप्रतिनिधियों और जिला स्तरीय अधिकारियों के नाम अंकित किए गए हैं, जबकि लोकार्पण में वह शामिल ही नहीं थे।
मानक की गड़बड़ियों पर पर्दा डालने के लिए यह कृत्य रचा गया है। कर निर्धारण संबंधित विज्ञापन स्थानीय समाचार पत्रों की बजाए गोरखपुर के नगर संस्करण में प्रकाशित कराया गया है।
नगर पालिका क्षेत्र के बाहर ग्राम सभाओं में भी नगर पालिकाओं के पद से काम कराया गया है, जो नियमों से परे है। उन्होंने कहा कि इन तमाम शिकायतों को लेकर कई बार जांच कमेटियां एडीएम, एसडीएम के स्तर पर बनाई गई, मगर किसी भी कमेटी की जांच अब तक पूरी नहीं हो पाई है।
यह कमेटियां अपनी जांच को स्पष्ट करें और गड़बड़ियां करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करें। अधिवक्ता के अनशन को नगर पालिका बांसी के सभासद मंगल प्रसाद चौरसिया और संजय रावत ने भी समर्थन देते हुए अनशन पर बैठने की चेतावनी दी है।