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Siddharthnagar News: सतर्क रहें...अस्पताल में आए हैं इलाज कराने, नोच लेंगे कुत्ते
Mon, 12 Aug 2024 11:56 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
Updated Mon, 12 Aug 2024 11:56 PM IST
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मेडिकल कालेज के एसएनसीयू वार्ड के पास शो रहे तीमारदारों के पास बैठे और शो रहे कुत्ते। संवाद
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हमलावर कुत्तों में मरीजों के बीच बनाया ठिकाना
कुत्तों के हमले में जा चुकी है अब तक कई लोगों की जान, फिर भी जिम्मेदार अनजान
माधव प्रसाद त्रिपाठी मेडिकल कॉलेज रात में कुत्तों का बन जाता है अड्डा
डीएम ने दिए हैं कुत्तों को पकड़े का निर्देश, अस्पताल में आकर आदेश तोड़ रहा दम
संवाद न्यूज एजेंसी
सिद्धार्थनगर। माधव प्रसाद त्रिपाठी मेडिकल काॅलेज में अगर आप इलाज के लिए आते हैं तो अपनी सुरक्षा स्वयं करिए। क्योंकि अस्पताल कुत्तों का ठिकाना बन चुका है, रात में वह मरीज के बीच और उनके आसपास सोते हुए मिल जाएंगे। यह हाल तब है, जब जनपद में कुत्तों के हमलावर होने से मौत और नोचने का सिलसिला जारी है।
नगर में बीते सप्ताह एक कुत्ते ने भरी बाजार में एक-एक करके 50 से अधिक लोगों को नोचकर घायल कर दिया था। जिलाधिकारी की ओर से नगर पालिका और नगर पंचायतों में अभियान चलाकर कुत्तों को पकड़ने का आदेश दिया गया था, लेकिन मेडिकल कॉलेज में आकर यह आदेश दम तोड़ रहा है। क्योंकि हकीकत जानने की कोशिश की गई तो चौंकाने वाली तस्वीर सामने आई है। यहां तो मरीजों के बीच कुत्तों का समूह देख गया। ऐसे में यह कहना गलत नहीं होगा कि बीमारी का इलाज कराने आए हैं और एक बीमारी मिल जाएगी, जो आपके लिए जानलेवा साबित हो सकती है। इसलिए आगाह किया जाता है कि अगर मरीज को लेकर आएं तो उनके पास रहें, रात में उनकी निगरानी करें। खासकर बीमार बच्चों की निगरानी अधिक जरूरी है। क्योंकि अबतक जो घटनाएं जिले में सामने आई हैं, उसमें मृतकों में बच्चों की संख्या चार है।
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इमरजेंसी से जनरल वार्ड तक ठिकाना
रात के तकरीबन 11:30 बजे मेडिकल कॉलेज के इमरजेंसी वार्ड में पहुंचे। यहां प्रवेश करते ही घुमंतू कुत्ते दिखाए पड़ गए, जो मरीजों के बीच मंडरा रहे थे। लोग उन्हें भगाने के बजाए खुद बचते हुए नजर आए। इसके बाद आगे बढ़े तो एसएनसीयू और पीआईसीयू वार्ड की तरफ जाने वाली गैलरी में मरीज सोए हुए थे। उन्हीं के बगल कुत्ते भी सोते और घूमते हुए दिखे। इसके बाद जनरल वार्ड की गैलरी का नजारा तो देखने वाला रहा है। यहां तो तीन से चार की संख्या में दिखे, जो अकेले व्यक्ति पर हमला कर दें तो शायद उनका बचना मुश्किल रहता। यह हाल एक दो दिन का नहीं है। बल्कि हमेशा रहता है। एक बीमारी को लेकर आए जोगिया क्षेत्र के निवासी एक व्यक्ति ने ऐसी जानकारी दी। उन्होंने बताया कि बीते आठ दिन से हैं। रात में उठने पर डर लगता है। लेकिन कहा कि नाम और फोटो मत लीजिए नहीं तो इलाज में दिक्कत न हो जाए। अन्य मरीजों मरीजों के तीमारदारों से बात नहीं हो पाई की वह गहरी नींद में थे।
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पांच माह में पांच को कुत्तों ने नोचकर मार डाला
कुत्तों के हमले की और मौत के आंकड़ों पर गौर करें तो अप्रैल से अब तक जनपद में उनके हमले से पांच लोगों की जान जा चुकी है। मरने वालों में चार बच्चे थे। जबकि एक महिला शामिल है। इसमें इटवा थाना क्षेत्र में कुत्तों के हमले में तीन मासूम बच्चों की जान चली गई थी। इसी प्रकार डुमरियागंज नगर में रहने वाली महिला को डेढ़ माह पहले उस वक्त कुत्तों के झुंड ने हमला बोलकर नोच डाला जब वह बकरी के लिए घास लेने निकली थी। तेज बारिश के कारण वह भाग नहीं पाई। उसे तब तक काटते रहे जबतक लोग बचाने नहीं पहुंच गए। अस्पताल ले जाने की सोचते उसने दम तोड़ दिया। इसी प्रकार पुरानी नौगढ़ में जून में मां के साथ बाग की ओर गए छह साल के बच्चे को नोचकर मार डाला था।
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एक कुत्ते ने 50 को नोचा
नगर में इसी सप्ताह एक कुत्ता आक्रामक हुआ और बाजार में लोगों को काटने लगा। लगभग सात घंटे में वह 50 से अधिक लोगों को काट चुका था। एक-एक करके हमला करते हुए चला गया। नगर के लोगों ने मिलकर उसे मार दिया नहीं तो न जाने कितने लोगों को काटता।
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घुमंतू कुत्तों की जनसंख्या पर एक नजर
एक रिपोर्ट के मुताबिक वर्ष 2019 में हुई पशु गणना के हिसाब से 19900 घुमंतू कुत्ते पाए गए थे। पांच साल में इनकी तादाद कम से कम 30 हजार हो गई होगी। इसी प्रकार से लगभग एक हजार कुत्ते पालतू हैं, जिनका लोग नियमित देखभाल करते हैं।
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मेडिकल कॉलेज कैंपस में कुत्तों के घूमने के मामले की जानकारी है। उन्हें पकड़ने के लिए नगर पालिका का पत्राचार किए हैं। अगर कोई एनजीओ आता है तो पकड़कर ले जाने के लिए उस पर लगने वाला कास्ट देने के लिए तैयार हैं। अस्पताल के अंदर और परिसर में कुत्तों को हटाए जाने के लिए प्रयास किया जा रहा है।
-डॉ. राजेश मोहन, प्राचार्य, माधव प्रसाद त्रिपाठी मेडिकल कॉलेज
कुत्तों के हमले में जा चुकी है अब तक कई लोगों की जान, फिर भी जिम्मेदार अनजान
माधव प्रसाद त्रिपाठी मेडिकल कॉलेज रात में कुत्तों का बन जाता है अड्डा
डीएम ने दिए हैं कुत्तों को पकड़े का निर्देश, अस्पताल में आकर आदेश तोड़ रहा दम
संवाद न्यूज एजेंसी
सिद्धार्थनगर। माधव प्रसाद त्रिपाठी मेडिकल काॅलेज में अगर आप इलाज के लिए आते हैं तो अपनी सुरक्षा स्वयं करिए। क्योंकि अस्पताल कुत्तों का ठिकाना बन चुका है, रात में वह मरीज के बीच और उनके आसपास सोते हुए मिल जाएंगे। यह हाल तब है, जब जनपद में कुत्तों के हमलावर होने से मौत और नोचने का सिलसिला जारी है।
नगर में बीते सप्ताह एक कुत्ते ने भरी बाजार में एक-एक करके 50 से अधिक लोगों को नोचकर घायल कर दिया था। जिलाधिकारी की ओर से नगर पालिका और नगर पंचायतों में अभियान चलाकर कुत्तों को पकड़ने का आदेश दिया गया था, लेकिन मेडिकल कॉलेज में आकर यह आदेश दम तोड़ रहा है। क्योंकि हकीकत जानने की कोशिश की गई तो चौंकाने वाली तस्वीर सामने आई है। यहां तो मरीजों के बीच कुत्तों का समूह देख गया। ऐसे में यह कहना गलत नहीं होगा कि बीमारी का इलाज कराने आए हैं और एक बीमारी मिल जाएगी, जो आपके लिए जानलेवा साबित हो सकती है। इसलिए आगाह किया जाता है कि अगर मरीज को लेकर आएं तो उनके पास रहें, रात में उनकी निगरानी करें। खासकर बीमार बच्चों की निगरानी अधिक जरूरी है। क्योंकि अबतक जो घटनाएं जिले में सामने आई हैं, उसमें मृतकों में बच्चों की संख्या चार है।
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इमरजेंसी से जनरल वार्ड तक ठिकाना
रात के तकरीबन 11:30 बजे मेडिकल कॉलेज के इमरजेंसी वार्ड में पहुंचे। यहां प्रवेश करते ही घुमंतू कुत्ते दिखाए पड़ गए, जो मरीजों के बीच मंडरा रहे थे। लोग उन्हें भगाने के बजाए खुद बचते हुए नजर आए। इसके बाद आगे बढ़े तो एसएनसीयू और पीआईसीयू वार्ड की तरफ जाने वाली गैलरी में मरीज सोए हुए थे। उन्हीं के बगल कुत्ते भी सोते और घूमते हुए दिखे। इसके बाद जनरल वार्ड की गैलरी का नजारा तो देखने वाला रहा है। यहां तो तीन से चार की संख्या में दिखे, जो अकेले व्यक्ति पर हमला कर दें तो शायद उनका बचना मुश्किल रहता। यह हाल एक दो दिन का नहीं है। बल्कि हमेशा रहता है। एक बीमारी को लेकर आए जोगिया क्षेत्र के निवासी एक व्यक्ति ने ऐसी जानकारी दी। उन्होंने बताया कि बीते आठ दिन से हैं। रात में उठने पर डर लगता है। लेकिन कहा कि नाम और फोटो मत लीजिए नहीं तो इलाज में दिक्कत न हो जाए। अन्य मरीजों मरीजों के तीमारदारों से बात नहीं हो पाई की वह गहरी नींद में थे।
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पांच माह में पांच को कुत्तों ने नोचकर मार डाला
कुत्तों के हमले की और मौत के आंकड़ों पर गौर करें तो अप्रैल से अब तक जनपद में उनके हमले से पांच लोगों की जान जा चुकी है। मरने वालों में चार बच्चे थे। जबकि एक महिला शामिल है। इसमें इटवा थाना क्षेत्र में कुत्तों के हमले में तीन मासूम बच्चों की जान चली गई थी। इसी प्रकार डुमरियागंज नगर में रहने वाली महिला को डेढ़ माह पहले उस वक्त कुत्तों के झुंड ने हमला बोलकर नोच डाला जब वह बकरी के लिए घास लेने निकली थी। तेज बारिश के कारण वह भाग नहीं पाई। उसे तब तक काटते रहे जबतक लोग बचाने नहीं पहुंच गए। अस्पताल ले जाने की सोचते उसने दम तोड़ दिया। इसी प्रकार पुरानी नौगढ़ में जून में मां के साथ बाग की ओर गए छह साल के बच्चे को नोचकर मार डाला था।
एक कुत्ते ने 50 को नोचा
नगर में इसी सप्ताह एक कुत्ता आक्रामक हुआ और बाजार में लोगों को काटने लगा। लगभग सात घंटे में वह 50 से अधिक लोगों को काट चुका था। एक-एक करके हमला करते हुए चला गया। नगर के लोगों ने मिलकर उसे मार दिया नहीं तो न जाने कितने लोगों को काटता।
घुमंतू कुत्तों की जनसंख्या पर एक नजर
एक रिपोर्ट के मुताबिक वर्ष 2019 में हुई पशु गणना के हिसाब से 19900 घुमंतू कुत्ते पाए गए थे। पांच साल में इनकी तादाद कम से कम 30 हजार हो गई होगी। इसी प्रकार से लगभग एक हजार कुत्ते पालतू हैं, जिनका लोग नियमित देखभाल करते हैं।
मेडिकल कॉलेज कैंपस में कुत्तों के घूमने के मामले की जानकारी है। उन्हें पकड़ने के लिए नगर पालिका का पत्राचार किए हैं। अगर कोई एनजीओ आता है तो पकड़कर ले जाने के लिए उस पर लगने वाला कास्ट देने के लिए तैयार हैं। अस्पताल के अंदर और परिसर में कुत्तों को हटाए जाने के लिए प्रयास किया जा रहा है।
-डॉ. राजेश मोहन, प्राचार्य, माधव प्रसाद त्रिपाठी मेडिकल कॉलेज