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Raksha Bandhan: सिद्धार्थनगर में बर्डपुर की रामकटोरी, बांसी का खजला की मिठास होती है खास

Wed, 30 Aug 2023 12:57 PM IST
vivek shukla संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर।
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर। Published by: vivek shukla Updated Wed, 30 Aug 2023 12:57 PM IST
सार

दुकानदार लालचंद्र मोदनवाल ने बताया कि रक्षाबंधन पर्व पर रामकटोरी की मांग बढ़ जाती है। इस बार दोगुनी राम कटोरी की बिक्री होनी की आशा है। शास्त्री नगर निवासी प्रीति वर्मा ने बताया की हर साल रक्षा बंधन पर राखी बांधने के बाद राम कटोरी की मिठाई ही खिलाते हैं।

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Bardpur Ramkatori Bansi Khajla famous in siddharthnagar
बर्डपुर की रामकटोरी - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

सिद्धार्थनगर जिले में रक्षाबंधन पर्व पर बर्डपुर की रामकटोरी और बांसी का खजला की मिठास बढ़ गई है। ये दोनों मिठाइयां जिले में खास हैं, इसलिए यहां से लोग दोनों मिठाइयां लेकर जा रहे हैं तो आने वालों के स्वागत में इसका महत्व है। इसकी वजह यह है कि रामकटोरी जिले में ही बनती है, जबकि बांसी के खाजा की चर्चा दूर दूर तक होती है।

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बहन अपने भाइयों को राखी बाधने के बाद मुंह मीठा करने के लिए राम कटोरी ही सबसे ज्यादा लेकर जाती हैं। वहीं बांसी की पहचान बन चुकी खजला मिठाई यहां आने वाले लोग अक्सर खजला खरीदकर घर ले जाते हैं। पर्व पर तो लोग खजला खरीदते हैं और रिश्तेदारों के घर जाने पर खजला लेकर जाते हैं।
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रामकटोरी खोवा, मलाई व घी के मिश्रण से तैयार होने वाली मिठाई है। हल्के मीठे स्वाद वाली इस मिठाई को मुंबई, अहमदाबाद, सूरत व दिल्ली में रहने वाले प्रदेश साहित नेपाल के लोग भी ले जाते हैं।
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Bardpur Ramkatori Bansi Khajla famous in siddharthnagar
बांसी का खजला। - फोटो : अमर उजाला।
दुकानदार लालचंद्र मोदनवाल ने बताया कि रक्षाबंधन पर्व पर रामकटोरी की मांग बढ़ जाती है। इस बार दोगुनी राम कटोरी की बिक्री होनी की आशा है। शास्त्री नगर निवासी प्रीति वर्मा ने बताया की हर साल रक्षा बंधन पर राखी बांधने के बाद राम कटोरी की मिठाई ही खिलाते हैं।

इसे भी पढ़ें: दो दिन मनेगा रक्षाबंधन, जानिए किस शुभ मुहूर्त में बांधे राखी

बांसी का खजला का खूब का असर है कि कस्बे के सभी प्रमुख सड़कों व चौराहों पर खजले की दुकान लग गई है। खजले की शुरुआत वर्ष 1954 में माघ मेला से हुई है। उस समय खजले की दुकान बुलंदशहर, खुर्जा आदि शहरों से आती थी।

लोगों ने मिठाई को काफी पसंद किया जिसका परिणाम रहा कि मेले में खजले की काफी दुकान सजने लगी। धीरे धीरे खजले की मांग बढ़ता देख स्थानीय लोगों ने इसे बनाना सीख लिया और मेले के बाद भी कस्बे में खजले की दुकान लगाना शुरू कर दिया।
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