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सहयोग से की गई गरीब परिवार की बेटी की शादी
ब्यूरो/अमर उजाला सिद्धार्थनगर
Updated Thu, 07 Jul 2016 10:19 PM IST
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लड़की की मां को सहायता राशि सौंपते जन कल्याण समिति के लोग।
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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डुमरियागंज। तहसील क्षेत्र में एक ऐसी गरीब महिला की बेटी की शादी धूमधाम से हुई, जिसके पास दो जून की रोटी के लिए घर में अनाज तक नहीं था। ग्रामीणों व क्षेत्र के जन कल्याण समिति के सदस्यों की मदद से बेटी को शादी के बाद, घरेलू उपयोग का सामान देकर विदा किया गया।
भनवापुर ब्लाक क्षेत्र के चैनिया गांव निवासिनी निर्मला के पति चिनकू निषाद की करीब आठ साल पहले मौत हो गई थी। चिनकू निर्मला पर तीन बेटियों व दो बेटों के परवरिश की जिम्मेदारी छोड़ गया था। खेती के नाम पर उसके पास सिर्फ एक बीघा जमीन थी, जिसमें हाड़तोड़ मेहनत के बाद उससे जो उपज मिलती थी, उससे पांचों बच्चों और उसका पेट भी भरना निर्मला के लिए मुश्किल था।
जैसे-तैसे उसने अपने बच्चों की परवरिश की। पांचों बच्चों में सबसे बड़ी लड़की पूनम फिर सोनम, अर्चना के बाद बेटे अरविंद और सुभाष थे। पूनम शादी योग्य हुई तो निर्मला को उसकी चिंता सताने लगी। जिसके बाद वह गांव के लोगों से शादी में मदद कर अपनी हैसियत के मुताबिक बेटी की शादी करवाने की फरियाद करने लगी।
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लोगों ने निर्मला और उसके पट्टीदारों के साथ पूनम की शादी फूलपुर दर्जिना गांव में तय कर दी और शादी का दिन भी निर्धारित कर दिया गया। इस दौरान गांव के लोग अपनी हैसियत के मुताबिक निर्मला की मदद करने लगे।
गुरुवार को जब जन कल्याण समिति के प्रबंधक सच्च्दिानंद मिश्रा को पूनम की शादी के बारें में जानकारी हुई, तो उन्होंने समिति के सदस्यों को बुलाकर मदद करने की बात कही। जिसके बाद कुछ ही देर में सदस्य पैसा जुटा कर निर्मला के घर पहुंचे और उसे सौंपते हुए शादी के बाद भी मदद करने व सरकारी आर्थिक मदद दिलवाने का वादा किया। इस दौरान शिवा पांडेय, फूलचंद चौहान, मनोज शुक्ला, लवकुश पांडेय, मुकेश गौतम और सुनील पांडेय आदि मौजूद रहे।
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भनवापुर ब्लाक क्षेत्र के चैनिया गांव निवासिनी निर्मला के पति चिनकू निषाद की करीब आठ साल पहले मौत हो गई थी। चिनकू निर्मला पर तीन बेटियों व दो बेटों के परवरिश की जिम्मेदारी छोड़ गया था। खेती के नाम पर उसके पास सिर्फ एक बीघा जमीन थी, जिसमें हाड़तोड़ मेहनत के बाद उससे जो उपज मिलती थी, उससे पांचों बच्चों और उसका पेट भी भरना निर्मला के लिए मुश्किल था।
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जैसे-तैसे उसने अपने बच्चों की परवरिश की। पांचों बच्चों में सबसे बड़ी लड़की पूनम फिर सोनम, अर्चना के बाद बेटे अरविंद और सुभाष थे। पूनम शादी योग्य हुई तो निर्मला को उसकी चिंता सताने लगी। जिसके बाद वह गांव के लोगों से शादी में मदद कर अपनी हैसियत के मुताबिक बेटी की शादी करवाने की फरियाद करने लगी।
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लोगों ने निर्मला और उसके पट्टीदारों के साथ पूनम की शादी फूलपुर दर्जिना गांव में तय कर दी और शादी का दिन भी निर्धारित कर दिया गया। इस दौरान गांव के लोग अपनी हैसियत के मुताबिक निर्मला की मदद करने लगे।
गुरुवार को जब जन कल्याण समिति के प्रबंधक सच्च्दिानंद मिश्रा को पूनम की शादी के बारें में जानकारी हुई, तो उन्होंने समिति के सदस्यों को बुलाकर मदद करने की बात कही। जिसके बाद कुछ ही देर में सदस्य पैसा जुटा कर निर्मला के घर पहुंचे और उसे सौंपते हुए शादी के बाद भी मदद करने व सरकारी आर्थिक मदद दिलवाने का वादा किया। इस दौरान शिवा पांडेय, फूलचंद चौहान, मनोज शुक्ला, लवकुश पांडेय, मुकेश गौतम और सुनील पांडेय आदि मौजूद रहे।