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Siddharthnagar News: गांवों में बंद हुए अखाड़े, शहर में नहीं लग सके कुश्ती के मैट

Tue, 08 Aug 2023 10:47 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर Updated Tue, 08 Aug 2023 10:47 PM IST
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Arenas closed in villages, wrestling mats could not be installed in the city
सिद्धार्थनगर। गांवों में चलने वाले अखाड़े बंद होते गए और शहर के जिला स्पोर्ट्स स्टेडियम में कुश्ती के मैट नहीं लग पाए हैं। इस कारण जिले में कुश्ती का माहौल नहीं बन पाया है। ग्रामीण खेल कुश्ती का दंगल या प्रतियोगिता होती है तो बाहरी पहलवानों को बुलाना पड़ता है।
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जिला स्पोर्ट्स स्टेडियम में कोच की नियुक्त नहीं हो सकी है। इस कारण जिले में कुश्ती के युवा खिलाड़ी नहीं निकल पा रहे हैं, जबकि सावन के महीने में पहले गांव-गांव में कुश्ती के लिए अखाड़े तैयार किए जाते थे, जिसमें गांव के युवा कुश्ती की प्रैक्टिस करते रहते थे।
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अखाड़े में कोई सुविधा न होने से युवा कुश्ती का खेल लोग छोड़ रहे हैं। जबकि दो दशक पूर्व सावन में प्रत्येक गांव में अखाड़े में सुबह से ही युवा वर्ग पहुंच जाते थे और अखाड़े के गुरु युवाओं को धोबिया पाट, बगल पछाड़, कालाजंग, बांकुड़ी व अन्य कुश्ती के तौर तरीके सिखाते थे, लेकिन वर्तमान समय में कुश्ती समाप्त होने के कगार पर है। युवा इस प्राचीन विधा से दूर हो रहे हैं। कुश्ती से लोगों को शारीरिक रूप से स्वस्थ रहने में मदद मिलती है, जबकि कुश्ती में कॅरियर की बेहतर संभावनाएं हैं।
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गांव में कुश्ती का प्रचलन खत्म सा हो गया है। जिले के स्पोर्ट्स स्टेडियम में कुश्ती के लिए मैट व मैदान की व्यवस्था नहीं है। जब प्रैक्टिस नहीं होगी तो पहलवान कहां से निकलेंगे। -रूपेश पांडेय, पहलवान
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कुश्ती लड़ने से शरीर स्वस्थ रहता है। इस विधा को प्रमोट करने की जरूरत है। स्थानीय स्तर पर प्रोत्साहन मिलेगा तो लोग आगे आएंगे। दो दशक पहले गांव- गांव कुश्ती होती थी, लेकिन अब लोग इसके महत्व को भूल रहे हैं। -कमलेश पहलवान
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अब कहीं न तो अखाड़ा है, और न ही कहीं सावन के महीने में कुश्ती प्रतियोगिता की संभावना है। जिले में खिलाड़ियों की संख्या पर्याप्त है, लेकिन कुश्ती अपने अस्तित्व के लिए जूझ रही है। -दया शंकर यादव, पहलवान

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वर्जन
जिला स्पोर्ट्स स्टेडियम में कुश्ती कोच की नियुक्ति की मांग की गई है। कुश्ती के मैट हैं, कोच की नियुक्ति होते ही प्रैक्टिस शुरू हो जाएगी। -आशुतोष अग्निहोत्री, जिला क्रीड़ाधिकारी
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