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28 हजार का पैकेट, 20 हजार में करते थे सौदा
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28 हजार का पैकेट, 20 हजार में सौदा
लोगों की जांच दिखाकर खाली कर देते थे स्टॉक
गहराई से हो जांच तो पकड़ में आ सकते है कई लोग
संवाद न्यूज एजेंसी
सिद्धार्थनगर। कोरोना संकट से निपटने के लिए पूरा अमला जुटा था। मगर उसमें भी ऐसे लोग हैं, जो व्यवस्था को दीमक की तरह से खोखला करने में जुटे थे। हम बात कर रहे हैं उन संविदा कर्मियों की जिनके कंधों पर जांच करके लोगों की जान बचाने की जिम्मेदारी थी। वे जांच की बजाए सरकारी संपत्ति को बेचकर धन अर्जित करने में जुटे रहे। जांच में एंटीजन किट बेचने का भंडाफोड़ होने के बाद परत-दर-परत नए तथ्य सामने आ रहे हैं। जांच आगे बढ़ने पर कई और लोगों का गर्दन फंसना तय है।
बताया यह भी जा रहा है कि पकड़े गए संविदाकर्मी किट की सरकारी कीमत से कम दर पर सौदा करते थे। स्वास्थ्य विभाग से जुड़े लोगों की माने तो बाजार में एक पैकेट, जिसमें 25 किट होती है। उसकी कीमत लगभग 28 हजार रुपये है। लेकिन सूत्र बताते हैं यह गिरोह एक पैकेट का सौदा 20 हजार रुपये में करता था। हालांकि इस खेल को शुरू होने में अधिक दिन नहीं हुए थे। तभी सभी निशाने पर आ गए और कार्रवाई के साथ जेल की हवा खानी पड़ी। अब जांच में पता चलेगा इनका सौदा कहां और कितनी बार, किससे हुआ था।
जांच में बेनकाब हो सकते हैं कई चेहरे
सरकार किट जिसका लेखाजोखा रहता है। उस किट को निकालकर यहां से बिहार तक सौदा करना आसान काम नहीं है। भले ही टीम की गिरफ्त में चार लोग आए हैं, लेकिन इसके पीछे किसकी छत्रछाया है इसकी पड़ताल जरूरी है। नहीं तो इतना बड़ा कांड संविदा कर्मचारी नहीं कर सकता है। अगर जांच का दौर चला तो इसकी आंच कई लोगों आ सकती है और कई लोगों की गर्दन फंस सकती है।
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खाते से रुपये आने की बात आ रही सामने
बताया जा रहा है कि एंटीजन किट को बिहार में बेचा जा रहा था। किट के बदले में गिरोह के एक सदस्य के पास बैंक खाते के जरिए 10 हजार रुपये भेजा गया था। हालांकि अभी यह जांच का विषय है किसके खाते से रुपये आए थे और किसने भेजा था।
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लोगों की जांच दिखाकर खाली कर देते थे स्टॉक
गहराई से हो जांच तो पकड़ में आ सकते है कई लोग
संवाद न्यूज एजेंसी
सिद्धार्थनगर। कोरोना संकट से निपटने के लिए पूरा अमला जुटा था। मगर उसमें भी ऐसे लोग हैं, जो व्यवस्था को दीमक की तरह से खोखला करने में जुटे थे। हम बात कर रहे हैं उन संविदा कर्मियों की जिनके कंधों पर जांच करके लोगों की जान बचाने की जिम्मेदारी थी। वे जांच की बजाए सरकारी संपत्ति को बेचकर धन अर्जित करने में जुटे रहे। जांच में एंटीजन किट बेचने का भंडाफोड़ होने के बाद परत-दर-परत नए तथ्य सामने आ रहे हैं। जांच आगे बढ़ने पर कई और लोगों का गर्दन फंसना तय है।
बताया यह भी जा रहा है कि पकड़े गए संविदाकर्मी किट की सरकारी कीमत से कम दर पर सौदा करते थे। स्वास्थ्य विभाग से जुड़े लोगों की माने तो बाजार में एक पैकेट, जिसमें 25 किट होती है। उसकी कीमत लगभग 28 हजार रुपये है। लेकिन सूत्र बताते हैं यह गिरोह एक पैकेट का सौदा 20 हजार रुपये में करता था। हालांकि इस खेल को शुरू होने में अधिक दिन नहीं हुए थे। तभी सभी निशाने पर आ गए और कार्रवाई के साथ जेल की हवा खानी पड़ी। अब जांच में पता चलेगा इनका सौदा कहां और कितनी बार, किससे हुआ था।
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जांच में बेनकाब हो सकते हैं कई चेहरे
सरकार किट जिसका लेखाजोखा रहता है। उस किट को निकालकर यहां से बिहार तक सौदा करना आसान काम नहीं है। भले ही टीम की गिरफ्त में चार लोग आए हैं, लेकिन इसके पीछे किसकी छत्रछाया है इसकी पड़ताल जरूरी है। नहीं तो इतना बड़ा कांड संविदा कर्मचारी नहीं कर सकता है। अगर जांच का दौर चला तो इसकी आंच कई लोगों आ सकती है और कई लोगों की गर्दन फंस सकती है।
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खाते से रुपये आने की बात आ रही सामने
बताया जा रहा है कि एंटीजन किट को बिहार में बेचा जा रहा था। किट के बदले में गिरोह के एक सदस्य के पास बैंक खाते के जरिए 10 हजार रुपये भेजा गया था। हालांकि अभी यह जांच का विषय है किसके खाते से रुपये आए थे और किसने भेजा था।