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खुनवां बाईपास के चौड़ीकरण का विरोध, मुआवजे की मांग
Updated Fri, 20 Jul 2018 12:05 AM IST
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खुनवां बाईपास के चौड़ीकरण का विरोध, मुआवजे की मांग
चालीस साल पहले हुए सड़क निर्माण में ली गई थी किसानों की जमीन
मुआवजे के लिए भटक रहे 250 से ज्यादा लोग
अमर उजाला ब्यूरो
शोहरतगढ़। खुनुवां बाईपास सड़क का मुआवजा दिए बिना सड़क का चौड़ीकरण कराए जाने पर किसान पीडब्ल्यूडी विभाग के खिलाफ लामबंद हो गए हैं। किसानों ने गुरुवार को सांसद जगदंबिका पाल को ज्ञापन देकर मुआवजा दिलाने के बाद ही सड़क का चौड़ीकरण कराने की मांग की है। किसानों ने कहा कि अगर मुआवजा नहीं मिला तो वह सड़क चौड़ीकरण का कार्य नहीं होने देंगे।
शोहरतगढ़-खुनुवां बाईपास सड़क का निर्माण चालीस वर्ष पूर्व 1978-79 में लोक निर्माण विभाग बस्ती ने कराया था। उस दौरान शोहरतगढ़ से लगभग तीन किलोमीटर तक बिना किसानों के जमीन की रजिस्ट्री कराए व मुआवजा दिए बगैर सड़क का निर्माण कार्य करा दिया गया था जिसमें नीबी-दोहनी गांव की प्रधान कलावती देवी, मदन मोहन पांडेय, मुकुंद मोहन पांडेय, दिनेश पांडेय, सहदेव गुप्ता, बासुदेव, रामचंद्र, गड़ाकुल गांव के रामचंद्र, श्याम सुंदर चौधरी, राधेश्याम, राकेश, शिव प्रसाद अग्रवाल, बालमुकुंद, मुन्नी, सीताराम, महदेवा नानकार गांव के संतराम, कल्पनाथ, उदयराज, प्रभावती, विक्रम, विंद्र प्रसाद, रामकुमार, अब्दुल अजीज आदि सहित लगभग 250 किसानों की जमीन सड़क में चली गई थी। मुआवजा पाने के लिए किसान बार-बार अधिकारियों का चक्कर लगाते रहे फिर भी किसानों को मुआवजा नहीं मिला।
30 जून 2014 को किसानों ने आयुक्त बस्ती, राज्यपाल, मुख्यमंत्री सहित देश के प्रधानमंत्री को पत्र भेज कर न्याय की गुहार लगाई थी लिहाजा कोई कार्रवाई नहीं हुई। पीड़ित किसानों के मुताबिक चार अप्रैल 2017 को फिर से पीड़ित किसानों ने सीएम व डिप्टी सीएम को पत्र भेज कर मुआवजे की मांग की थी। जिस पर डिप्टी सीएम ने डीएम को सार्थक परिणाम दिला कर अवगत कराने का निर्देश दिया था। इसके बावजूद किसानों को मुआवजा नहीं मिला। तब किसानों ने मुआवजे के लिए हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। किसानों का कहना है कि मामला अभी कोर्ट में विचाराधीन है। बिना मुआवजा भुगतान किए बाईपास मार्ग शोहरतगढ़-खुनुवा का चौड़ीकरण कराया जाना किसानों के साथ न्याय नहीं होगा। पीड़ित किसान रविवार को खुनुवां बाईपास सड़क जाम कर धरना-प्रदर्शन के लिए बाध्य होंगे। इसकी सारी जिम्मेदारी सिर्फ शासन व प्रशासन की होगी।
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चालीस साल पहले हुए सड़क निर्माण में ली गई थी किसानों की जमीन
मुआवजे के लिए भटक रहे 250 से ज्यादा लोग
अमर उजाला ब्यूरो
शोहरतगढ़। खुनुवां बाईपास सड़क का मुआवजा दिए बिना सड़क का चौड़ीकरण कराए जाने पर किसान पीडब्ल्यूडी विभाग के खिलाफ लामबंद हो गए हैं। किसानों ने गुरुवार को सांसद जगदंबिका पाल को ज्ञापन देकर मुआवजा दिलाने के बाद ही सड़क का चौड़ीकरण कराने की मांग की है। किसानों ने कहा कि अगर मुआवजा नहीं मिला तो वह सड़क चौड़ीकरण का कार्य नहीं होने देंगे।
शोहरतगढ़-खुनुवां बाईपास सड़क का निर्माण चालीस वर्ष पूर्व 1978-79 में लोक निर्माण विभाग बस्ती ने कराया था। उस दौरान शोहरतगढ़ से लगभग तीन किलोमीटर तक बिना किसानों के जमीन की रजिस्ट्री कराए व मुआवजा दिए बगैर सड़क का निर्माण कार्य करा दिया गया था जिसमें नीबी-दोहनी गांव की प्रधान कलावती देवी, मदन मोहन पांडेय, मुकुंद मोहन पांडेय, दिनेश पांडेय, सहदेव गुप्ता, बासुदेव, रामचंद्र, गड़ाकुल गांव के रामचंद्र, श्याम सुंदर चौधरी, राधेश्याम, राकेश, शिव प्रसाद अग्रवाल, बालमुकुंद, मुन्नी, सीताराम, महदेवा नानकार गांव के संतराम, कल्पनाथ, उदयराज, प्रभावती, विक्रम, विंद्र प्रसाद, रामकुमार, अब्दुल अजीज आदि सहित लगभग 250 किसानों की जमीन सड़क में चली गई थी। मुआवजा पाने के लिए किसान बार-बार अधिकारियों का चक्कर लगाते रहे फिर भी किसानों को मुआवजा नहीं मिला।
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30 जून 2014 को किसानों ने आयुक्त बस्ती, राज्यपाल, मुख्यमंत्री सहित देश के प्रधानमंत्री को पत्र भेज कर न्याय की गुहार लगाई थी लिहाजा कोई कार्रवाई नहीं हुई। पीड़ित किसानों के मुताबिक चार अप्रैल 2017 को फिर से पीड़ित किसानों ने सीएम व डिप्टी सीएम को पत्र भेज कर मुआवजे की मांग की थी। जिस पर डिप्टी सीएम ने डीएम को सार्थक परिणाम दिला कर अवगत कराने का निर्देश दिया था। इसके बावजूद किसानों को मुआवजा नहीं मिला। तब किसानों ने मुआवजे के लिए हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। किसानों का कहना है कि मामला अभी कोर्ट में विचाराधीन है। बिना मुआवजा भुगतान किए बाईपास मार्ग शोहरतगढ़-खुनुवा का चौड़ीकरण कराया जाना किसानों के साथ न्याय नहीं होगा। पीड़ित किसान रविवार को खुनुवां बाईपास सड़क जाम कर धरना-प्रदर्शन के लिए बाध्य होंगे। इसकी सारी जिम्मेदारी सिर्फ शासन व प्रशासन की होगी।
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